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सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया, हीमोफीलिया और रक्तदान पर विशेष कार्यशाला का आयोजन



अजय त्यागी 2025-03-21 10:06:55 स्थानीय

थैलेसीमिया, हीमोफीलिया और रक्तदान पर विशेष कार्यशाला
थैलेसीमिया, हीमोफीलिया और रक्तदान पर विशेष कार्यशाला
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बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज एवं प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल चिकित्सालय के ब्लड सेंटर द्वारा कॉलेज सभागार में थैलेसीमिया, हीमोफीलिया एवं स्वैच्छिक रक्तदान पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इन गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करना था।

चिकित्सा जगत के प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

इस कार्यशाला में अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. एनएल महावर, पीबीएम अधीक्षक डॉ. सुरेन्द्र कुमार और सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने थैलेसीमिया और हीमोफीलिया जैसी बीमारियों की गंभीरता पर प्रकाश डाला और स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व को रेखांकित किया।

रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों का निवारण: विशेषज्ञों की राय

ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ. अरुण भारती ने बताया कि इस आयोजन में रक्तदान से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने, थैलेसीमिया और हीमोफीलिया से पीड़ित रोगियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और नवीन शोध पर चिकित्सक शिक्षकों एवं डॉक्टर्स ने अपने व्याख्यान दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान से न केवल रोगियों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि यह समाज में एक सकारात्मक संदेश भी प्रसारित करता है।

पीबीएम अस्पताल में रक्त की उपलब्धता: मरीजों के लिए राहत की खबर

पीबीएम अधीक्षक डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि वर्तमान में पीबीएम अस्पताल में रक्त की कमी के कारण मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। यह स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और सहभागिता का परिणाम है।

विशेषज्ञों के विचार: थैलेसीमिया और हीमोफीलिया पर गहन चर्चा

इस कार्यशाला में डॉ. ऋषि माथुर, सविता गर्ग, डॉ. आयुषी श्रीवास्तव, डॉ. मनोज माली और डॉ. कुलदीप मेहरा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के उपचार, प्रबंधन और रोकथाम पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही, उन्होंने इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए नवीनतम चिकित्सा तकनीकों और शोध के बारे में जानकारी साझा की।

स्वैच्छिक रक्तदान: समाज की जिम्मेदारी

कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि स्वैच्छिक रक्तदान समाज की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। स्वस्थ व्यक्ति नियमित अंतराल पर रक्तदान करके अनेक जीवन बचा सकते हैं। रक्तदान से शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।

थैलेसीमिया और हीमोफीलिया: जागरूकता की आवश्यकता

थैलेसीमिया और हीमोफीलिया जैसी आनुवंशिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। समय पर निदान और उचित उपचार से इन बीमारियों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके लिए समाज में जागरूकता फैलाना और नियमित स्वास्थ्य जांच को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला का निष्कर्ष: सामूहिक प्रयास की आवश्यकता

कार्यशाला के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि थैलेसीमिया और हीमोफीलिया जैसी बीमारियों से निपटने और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। चिकित्सा समुदाय, सामाजिक संगठनों और आम जनता को मिलकर इस दिशा में कार्य करना होगा ताकि इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर जीवन प्रदान किया जा सके।