Fri, 04 April 2025 10:25:38pm
चित्तौड़गढ़, राजस्थान: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित हजारेश्वर महादेव मंदिर में हर वर्ष दो बार एक अद्भुत खगोलीय घटना घटित होती है, जिसे 'सूर्य किरणाभिषेक' के नाम से जाना जाता है। इस दौरान, सूर्य की पहली किरणें सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं, जिससे भगवान भोलेनाथ का प्राकृतिक अभिषेक होता है। यह घटना मंदिर की अनूठी वास्तुकला और खगोलीय गणनाओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मंदिर की वास्तुकला और सूर्य किरणाभिषेक
हजारेश्वर महादेव मंदिर की संरचना इस प्रकार से बनाई गई है कि वर्ष में दो बार, सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण और उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर गमन के समय, सूर्य की पहली किरणें मंदिर के वेधशाला मंडप और गर्भगृह के छोटे द्वार से होकर सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं। यह खगोलीय घटना मंदिर की वास्तुकला की विशेषता को प्रदर्शित करती है।
महंत चंद्र भारती जी महाराज का दृष्टिकोण
मंदिर के महंत चंद्र भारती जी महाराज के अनुसार, यह खगोलीय घटना तब होती है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण और उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर गमन करता है। सूर्य की किरणें न केवल शिवलिंग को प्रकाशित करती हैं, बल्कि पीछे विराजमान माताजी की दिव्य प्रतिमा को भी आशीर्वादित करती हैं। ऐसी अनूठी घटना को एक महान आशीर्वाद माना जाता है।
भक्तों की आस्था और उत्साह
सूर्य किरणाभिषेक के इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए भक्तजन बड़ी संख्या में मंदिर में एकत्रित होते हैं। उनकी आस्था और उत्साह इस खगोलीय घटना के प्रति गहरा संबंध प्रकट करते हैं, जो उन्हें आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है।
Chittorgarh, Rajasthan: At the Hazareshwar Mahadev Temple in Chittorgarh, Lord Bholenath is anointed with the first rays of the sun twice a year. The temple’s unique architecture allows the sun’s first rays to pass through the observatory pavilion and the sanctum’s small door,… pic.twitter.com/K0dDZPBhiJ
— IANS (@ians_india) March 22, 2025
वास्तुशास्त्र और खगोलीय गणनाओं का संगम
मंदिर की संरचना इस प्रकार से की गई है कि सूर्य की किरणें वर्ष में दो बार सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं। यह घटना वास्तुशास्त्र और खगोलीय गणनाओं का एक उत्कृष्ट संगम है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान की गहराई को दर्शाता है।
सूर्य किरणाभिषेक का आध्यात्मिक महत्व
सूर्य किरणाभिषेक को भक्तजन एक दिव्य आशीर्वाद के रूप में मानते हैं। इस खगोलीय घटना के दौरान मंदिर में उपस्थित होना और भगवान शिव के इस प्राकृतिक अभिषेक का साक्षी बनना भक्तों के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव होता है।
पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व
हजारेश्वर महादेव मंदिर में होने वाली यह खगोलीय घटना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। देश-विदेश से पर्यटक इस अद्भुत घटना को देखने के लिए चित्तौड़गढ़ आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।
चित्तौड़गढ़ के हजारेश्वर महादेव मंदिर में होने वाला सूर्य किरणाभिषेक एक अद्वितीय खगोलीय और वास्तुशास्त्रीय घटना है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान और संस्कृति की समृद्धि को प्रदर्शित करती है। यह घटना भक्तों और पर्यटकों के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र है, जो उन्हें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर समृद्ध अनुभव प्रदान करती है।
Chittorgarh, Rajasthan: Mahant Chandra Bharti Ji Maharaj says, "...This celestial event happens when the Sun transitions between Dakshinayan (southern solstice) and Uttarayan (northern solstice). The rays not only illuminate the Shivling but also bless the divine idol of Mataji… pic.twitter.com/rY5Clu3RPG
— IANS (@ians_india) March 22, 2025