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प्रादेशिक

पंजाब में दूध और खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावटखोरी पर बड़ा खुलासा

पंजाब में मिलावटखोरी का खेल चरम पर है, जहाँ दूध का हर छठा सैंपल फेल हो रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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पंजाब में दूध और खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर चल रही मिलावटखोरी ने राज्य की सेहत को गंभीर संकट में डाल दिया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में दूध का हर छठा सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। पिछले चार वर्षों के दौरान लिए गए 24,405 सैंपलों में से 4,253 फेल पाए गए, जो इस मिलावटी कारोबार की भयावहता को उजागर करते हैं।

असुरक्षित दूध का संकट

सरकारी आंकड़ों की मानें तो पिछले चार सालों में 503 सैंपल ऐसे पाए गए हैं जो सीधे तौर पर सेहत के लिए खतरनाक हैं। वर्ष 2022-23 में 8,179 सैंपलों में से 1,724 फेल हुए, जबकि 124 असुरक्षित थे। इसके बाद वर्ष 2023-24 में 6,041 नमूनों में से 929 फेल रहे। यह स्पष्ट है कि राज्य में मिलावटखोरी की जड़ें काफी गहरी हैं, जिसके चलते आम लोगों का स्वास्थ्य लगातार दांव पर लगा हुआ है।

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा हाल ही में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान स्थिति और भी चिंताजनक दिखी, जहाँ दो दिनों में लिए गए 204 नमूनों में से 33 फीसदी सैंपल फेल हो गए। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बाजार में बिकने वाला दूध और दूध से बने उत्पाद किस कदर मिलावटी हो सकते हैं। सरकार ने अब इस खतरे को भांपते हुए निगरानी के दायरे को और अधिक बढ़ा दिया है।[1]

रासायनिक पनीर की सच्चाई

केवल दूध ही नहीं, बल्कि पनीर में भी खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि पंजाब में दूसरे राज्यों से सप्लाई होने वाला पनीर स्टार्च और सुक्रोज जैसी चीजों से बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पनीर में मिलाए जा रहे ये केमिकल लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इस प्रकार की मिलावटखोरी बच्चों और वृद्धों के लिए विशेष रूप से घातक है।

खाद्य सुरक्षा विभाग अब ''फूड सेफ्टी ऑन व्हील'' वैन के जरिए सीधे मंडियों और दुकानों पर छापेमारी कर रहा है। इन वैनों में ऑन-द-स्पॉट टेस्टिंग की सुविधा है, जिससे मिलावटी सामान को तुरंत पकड़ा जा रहा है। FSSAI अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए नियमित निरीक्षण कर रहा है और दोषी पाए जाने वाले व्यापारियों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके लाइसेंस भी रद्द किए जा रहे हैं।

सख्त कानूनी कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी फूड बिजनेस ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। विभाग ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के प्रावधानों के तहत अब तक हजारों मामलों में जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की है।

प्रशासन का यह अभियान अब और तेज होने वाला है। आने वाले दिनों में दूध की डेयरियों और पनीर बनाने वाली इकाइयों पर गहन निगरानी रखी जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं तक शुद्ध और सुरक्षित भोजन पहुँचाना है। आम जनता से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि इस जहरीले कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सके।

जन-स्वास्थ्य ही प्राथमिकता

अंत में, यह स्पष्ट है कि पंजाब में मिलावटखोरी पर लगाम लगाने के लिए केवल जुर्माने ही काफी नहीं हैं, बल्कि जनता की जागरूकता भी अनिवार्य है। लोगों को ब्रांडेड और भरोसेमंद जगहों से ही दूध और पनीर खरीदना चाहिए। सरकार और नागरिकों के बीच का यह तालमेल ही समाज को इस मिलावटी जहर से बचा सकता है। प्रशासन की सख्ती और सतर्कता ही इस बड़े संकट का एकमात्र स्थायी समाधान है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी खाद्य उत्पाद के उपयोग से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच करें। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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