राष्ट्रीय कवि चौपाल: साहित्य के माध्यम से नौतपा का संदेश
राष्ट्रीय कवि चौपाल 569वीं कड़ी में राष्ट्रीय कवि चौपाल: नौतपा में समाहित सृष्टि संचलन का नफा विषय पर कवियों ने अपनी शानदार रचनाएं प्रस्तुत कीं।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
साहित्यिक जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली 'राष्ट्रीय कवि चौपाल' की 569वीं कड़ी का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस बार का आयोजन राष्ट्रीय कवि चौपाल: नौतपा में समाहित सृष्टि संचलन का नफा विषय को समर्पित रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद की अध्यक्ष डॉ. बसंती हर्ष ने की। मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान पत्रिका के संवाद दाता चंद्र प्रकाश ओझा और विशिष्ट अतिथि के रूप में अनेक गणमान्य हस्तियां मंच पर उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ रामेश्वर साधक ने स्व-बोधक रचना से किया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए बताया कि "जब ग्रीष्म ऋतु में रोहिणी नक्षत्र में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर पड़ती हैं, तो जमीन के अंदर भयंकर उमस और गर्मी बनती है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नौ दिनों तक वर्षा या ठंडी हवा न चले, तो यह प्रक्रिया सृष्टि के चक्र को सुचारू बनाने और अच्छी वर्षा के लिए अत्यंत फलदाई होती है।
साहित्यिक रचनाओं का दौर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. बसंती हर्ष ने नौतपा की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि "जल का मोल समझो बहना, नई भोर फिर से आएगी।" मुख्य अतिथि चंद्र प्रकाश ओझा ने कवियों को संबोधित करते हुए कहा कि नौतपा ऋतु के अनुकूल होना प्रकृति के लिए एक शुभ संकेत है। इस दौरान के.के. व्यास शिल्पी, नरसिंह भाटी, रामदेव आसोपा और श्याम सुंदर तंवर ने अपनी कविताओं के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कविताओं का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा, जिसमें समाज के विभिन्न पहलुओं पर कटाक्ष और दार्शनिक चिंतन देखने को मिला। डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने अपनी राजस्थानी कविताओं से सभी को पुरानी कहानियों की याद दिलाई, तो कैलाश टाक ने दौलत और खामियों पर तीखा व्यंग्य किया। राष्ट्रीय कवि चौपाल: नौतपा में समाहित सृष्टि संचलन का नफा विषय पर आधारित सभी रचनाएं अत्यंत प्रासंगिक और प्रेरणादायी रहीं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह का मन जीत लिया।
काव्य और सरोकार
हास्य व्यंग्य के दिग्गज कवि बाबू बमचकरी ने अपने विशिष्ट अंदाज में जीवन की भागदौड़ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "रोज घर से दफ्तर जाना, गली-गली में ध्यान रखना कि क्या खाना है।" भानू प्रताप सिंह देशनौक ने ईश्वर और साधु-संतों के स्वरूप पर अपनी रचना प्रस्तुत की। वहीं रामेश्वर साधक ने मौत के सत्य को हंसकर स्वीकार करने का संदेश अपनी ओजस्वी वाणी से दिया, जिसे सुनकर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कृष्णा वर्मा ने तपते सूरज और लू की शुरुआत पर अपनी कविता पढ़ी, जबकि राजकुमार ग्रोवर ने सत्ता और राजनीति पर गहरा व्यंग्य करते हुए श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। राष्ट्रीय कवि चौपाल: नौतपा में समाहित सृष्टि संचलन का नफा कार्यक्रम में मेहराजुद्दीन एडवोकेट और शिव प्रकाश शर्मा ने भी जीवन के सत्य और दर्शन को अपनी कविताओं का आधार बनाया, जो उपस्थित बुद्धिजीवियों के लिए एक नया अनुभव था।
समापन और उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन बाबू बमचकरी ने अपने रसीले और चुटीले अंदाज में किया, जिससे वातावरण खुशनुमा बना रहा। अंत में विनोद शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस भव्य कार्यक्रम में कुल 19 साहित्यकारों ने अपनी स्वरचित रचनाओं का लोकार्पण किया। मंच पर धर्मेंद्र राठोड़, घनश्याम सौलंकी, हाजी रफीक अहमद, काजल और भवानी शंकर सुथार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन भारत माता के जयघोष के साथ हुआ।
यह आयोजन न केवल साहित्य साधना का केंद्र बना, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के अंतर्संबंधों को भी स्पष्ट किया। राष्ट्रीय कवि चौपाल: नौतपा में समाहित सृष्टि संचलन का नफा जैसे विषय साहित्यिक विमर्श में विज्ञान को शामिल करने की अनूठी परंपरा का हिस्सा हैं। निरंतर 569 कड़ियों तक चलना इस संस्था की सफलता का प्रमाण है, जो आने वाले समय में भी साहित्य और समाज को इसी प्रकार नई दिशाएं प्रदान करती रहेगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी आयोजन समिति द्वारा प्रदान किए गए तथ्यों और कवियों की प्रस्तुतियों पर आधारित है। यह जनहित में साहित्य प्रसार के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या साहित्यिक व्याख्या हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।