सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार देश में बढ़ती खुदरा महंगाई दर अब एक नए स्तर पर पहुँच चुकी है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
नई दिल्ली, दिल्ली। देश में बढ़ती खुदरा महंगाई दर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक इस बार यह आंकड़ा बढ़कर तीन दशमलव नौ प्रतिशत पर दर्ज किया गया है। यह वृद्धि पिछले कुछ समय की तुलना में एक बड़ा उछाल दर्शाती है।[1]
इससे पहले के महीने में दर्ज की गई सांख्यिकीय दर तीन दशमलव पांच प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई थी। पिछले महीने के मुकाबले चालू अवधि में दर्ज किया गया यह उछाल देश की घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। इस बदलाव से बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के नए मानकों से यह साफ जाहिर होता है कि वर्तमान समय में कीमतों में बढ़ोतरी की यह रफ़्तार जनवरी दो हजार पच्चीस के बाद से सबसे तेज़ देखी गई है। इस वित्तीय बदलाव का सीधा असर देश के प्रमुख बाजारों में साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में आए इस बदलाव ने सबको चौंका दिया है।
देश में बढ़ती खुदरा महंगाई दर के पीछे मुख्य वजह रसोई की आवश्यक सामग्रियां और सब्जियों की कीमतों में हुआ अप्रत्याशित इजाफा है। इसके अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण वस्तुओं पर भी स्थानीय स्तर पर मूल्य का भारी दबाव देखा जा रहा है। इस कारण थोक और खुदरा दोनों ही बाजारों में उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
देश के टियर-वन और टियर-टू शहरों में रहने वाले आम नागरिकों ने इस स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि लगातार महंगे होते सामान के कारण उनके घर का मासिक बजट पूरी तरह से सिकुड़ गया है। इस वजह से मध्यमवर्गीय परिवारों को अपनी जमा पूंजी से अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बढ़ती खुदरा महंगाई दर में आया यह अचानक उछाल भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा को भी प्रभावित कर सकता है। बैंक द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले निर्णयों पर अब इस नए डेटा का सीधा और गहरा असर देखने को मिल सकता है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी तंत्र भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। आपूर्ति व्यवस्था में आने वाली बाधाओं को दूर करने और मौसमी खाद्य पदार्थों की सप्लाई को सामान्य बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है। सरकार का मुख्य प्रयास बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कृषि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि मानसून के असमान वितरण के कारण घरेलू खाद्य उत्पादन लागत पर दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है। यदि आने वाले समय में आपूर्ति सुचारू नहीं रही, तो देश में बढ़ती खुदरा महंगाई दर आने वाले महीनों में आम उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद गंभीर समस्या बन सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह विवरण देश में जारी खुदरा महंगाई के आंकड़ों और उससे संबंधित आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।