अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के 60 साल बाद भी साक्षरता की चुनौती। UNESCO के अनुसार दुनिया में 739 मिलियन युवा और वयस्क बुनियादी साक्षरता से दूर।
बाल मजदूरी पर बड़ी कार्रवाई में 3800 से ज्यादा बच्चे बचाए गए और 575 से ज्यादा FIR हुईं, अब सवाल है कि इन बच्चों का भविष्य कितना बदलेगा।
चीनी के दाम घटे जरूर हैं, लेकिन पुराना महंगा स्टॉक और बाजार की सुस्त चाल ग्राहक को तुरंत राहत नहीं देगी, जानिए घर तक राहत कब आयेगी।
सरकारी स्कूलों की बदहाली के बीच मीडिया कैमरा रोक पर सवाल उठे हैं। सुरक्षा जरूरी है, मगर पारदर्शिता, सीसीटीवी और जवाबदेही से ही सच सामने आएगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है। जानिए इसका इतिहास, रासलीला और आधुनिक महत्व।
द्वितीय विश्व युद्ध को दुनिया ने जीत और हार के तराजू पर तौला, मगर सवाल यह है कि इस विजय के नीचे कितनी जिंदगियां दफन हुईं और किसने युद्ध की असली कीमत चुकाई।
मिहिर आहूजा ने बताया कि असली वायुसेना अधिकारी का किरदार निभाना आसान नहीं था। सलामी से चाल तक बारीकियां सीखीं, असली कारगिल योद्धा से जुड़कर भूमिका को खास बनाया।
सरकारी कैंसर दवा के 4 वॉयल दिल्ली के ब्लैक मार्केट में मिले। बीकानेर से गई सरकारी सप्लाई ने दवा वितरण और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बेरोजगारी दर घटकर जुलाई में 5.1% पर आ गई। गांवों में राहत मिली, महिलाओं की कामकाजी भागीदारी बढ़ी, लेकिन शहरों में दर बढ़ी और रोजगार अनुपात भी चढ़ा।
भारत में स्वास्थ्य बीमा सुधार की तैयारी तेज है। इलाज की दरें तय करने, क्लेम पारदर्शी बनाने और साझा एक्सचेंज से मरीजों को राहत की उम्मीद है।
भारत में हाथियों की संख्या करीब 22,514 आंकी गई है, लेकिन आवास टूटने, बिजली, रेल हादसों और बढ़ते मानव हाथी संघर्ष से हाथियों का संरक्षण चुनौती बन गया है।
ईरान अमेरिका युद्ध का असर अब खाड़ी देशों की कंपनियों की दूसरी तिमाही के नतीजों में साफ दिखेगा तेल और बैंकिंग क्षेत्रों में बड़े बदलाव की आशंका है।
मरुस्थलीकरण को रोकने और दम तोड़ते पर्यावरण को बचाने के लिए शुरू हुआ अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट वास्तव में अरावली की संजीवनी साबित होगा।
वैज्ञानिक शोध में पर्माफ्रॉस्ट के लगातार पिघलने का दावा किया गया है जिससे पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसे जलवायु परिवर्तन का खतरा गहरा गया है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार देश में बढ़ती खुदरा महंगाई दर अब एक नए स्तर पर पहुँच चुकी है।