आम आदमी होना बहुत मुश्किल है। सड़क, पानी, अतिक्रमण, शोर और प्रशासनिक उदासीनता के बीच नागरिक रोज संघर्ष कर रहा है जबकि जिम्मेदारों की प्राथमिकताएं अलग दिखाई देती
गेहूं की खेती पर जलवायु परिवर्तन का गहरा असर पड़ा है। बढ़ती रात की गर्मी और बदलते मौसम से पैदावार और अनाज की गुणवत्ता पर संकट खड़ा हो गया है।
ये महंगाई की मार नहीं जनस्वास्थ्य अभियान है, बढ़ती कीमतों के जरिए सरकार जनता की सेहत सुधार रही है, जनता व्यर्थ परेशान ना हो।
बीकानेर की बदहाल सड़कों, गंदगी और यातायात की समस्याओं से जूझती जनता का बड़ा सवाल क्यों ना ऐसे निष्क्रिय सरकारी विभागों को बंद कर दिया जाए?
विकास और पर्यावरण के संतुलन पर प्रबुद्धजनों का गंभीर मंथन। जानिए कैसे कंक्रीट का अनियंत्रित विस्तार हमारे भविष्य के लिए एक बड़ा संकट बन रहा है।
बीकानेर के आनंद निकेतन में लोककला मर्मज्ञ डॉ. श्रीलाल मोहता की पुण्यतिथि पर पत्रकारिता के संकट विषय पर विचार-विमर्श हुआ।
आर्थिक विकास हेतु पर्यावरण की अनदेखी आत्मघाती है। खाद्य सुरक्षा, गिरता भूजल और प्रदूषण रोकने हेतु विकेंद्रीकृत जल संचयन व कड़े नीतिगत फैसले अनिवार्य हैं।
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