टेक्नोलॉजी

ISRO की बड़ी कामयाबी, 36000 किमी ऊपर से धरती पर होगी पैनी नजर

EOS 05 का सफल प्रक्षेपण ISRO की बड़ी कामयाबी है।  36000 किलोमीटर ऊपर से बड़े इलाके पर नजर रखने वाला यह महत्वपूर्ण मिशन है।

By अजय त्यागी 1 min read
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ISRO की बड़ी कामयाबी

श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश। ISRO की बड़ी कामयाबी के साथ भारत ने जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की इमेजिंग करने वाला अपना पहला उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचा दिया है। GSLV F17 ने EOS 05 को निर्धारित Sub GTO में सफलतापूर्वक स्थापित किया। ISRO के मुताबिक यह GSLV की 19वीं उड़ान है। करीब 36000 किलोमीटर ऊपर से बड़े इलाके पर नजर रखने वाला यह मिशन पृथ्वी अवलोकन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अंतरिक्ष में कैमरा पहुंच गया है, अब उसकी नजर का असली फायदा जमीन पर दिखना बाकी है।  [1]

आसमान की नई आंख

EOS 05 की सबसे खास बात इसकी जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की इमेजिंग करने की क्षमता है। सामान्य इमेजिंग उपग्रह अलग अलग इलाकों के ऊपर से गुजरकर तस्वीरें लेते हैं। EOS 05 को बड़े क्षेत्र पर लगातार नजर रखने की क्षमता के लिए तैयार किया गया है। करीब 36000 किलोमीटर की ऊंचाई से इसकी निगरानी का दायरा व्यापक हो सकता है। आसान भाषा में कहें तो ISRO की बड़ी कामयाबी है कि भारत ने आसमान में ऐसा कैमरा पहुंचाया है जो बड़े इलाके पर नजर रखने में मदद करेगा। अंतरिक्ष में यह नई आंख जितनी ऊंचाई पर है, इससे जुड़ी उम्मीदें भी उतनी ही बड़ी हैं।

इस क्षमता से कृषि, मौसम और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है। फसल और जमीन में होने वाले बदलावों को समझने के लिए उपग्रह की तस्वीरें उपयोगी हो सकती हैं। बाढ़ और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बड़े इलाके की जानकारी हालात का आकलन आसान कर सकती है। यानी उपग्रह ऊपर रहेगा लेकिन उसका असली फायदा नीचे दिखाई देना चाहिए। वरना अंतरिक्ष में महंगा कैमरा घूमता रहे और उसकी तस्वीरें नीचे फाइलों में घूमती रहें तो तकनीक से ज्यादा व्यवस्था पर सवाल उठेंगे। अब देखना यही है कि इस नई क्षमता का इस्तेमाल कितनी तेजी से होता है।

पिछली चूक का जवाब

इस सफलता का संबंध 2021 की पिछली कोशिश से भी है। उस समय GSLV F10 के जरिए EOS 03 मिशन सफल नहीं हो पाया था। अब GSLV F17 ने EOS 05 को निर्धारित Sub GTO में सफलतापूर्वक स्थापित किया है। यह GSLV की 19वीं उड़ान भी रही। अंतरिक्ष मिशन में पिछली असफलता के बाद अगली सफलता सिर्फ तालियों की खबर नहीं होती। इसके पीछे तकनीकी जांच, सुधार, परीक्षण और तैयारी की लंबी प्रक्रिया होती है। इस बार रॉकेट ने अपना निर्धारित काम पूरा करके पिछली चूक से आगे बढ़ने का भरोसा मजबूत किया है।

ISRO की बड़ी कामयाबी के बाद इस मिशन की अगली तकनीकी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। EOS 05 को आगे उसकी निर्धारित जियोसिंक्रोनस कक्षा तक पहुंचाया जाएगा और फिर इसकी परिचालन क्षमता सामने आएगी। फिलहाल उपग्रह को Sub GTO में सफलतापूर्वक स्थापित किया जा चुका है। आगे मिलने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता और उनका वास्तविक इस्तेमाल मिशन की उपयोगिता तय करेगा। अंतरिक्ष में नई आंख पहुंचना बड़ी उपलब्धि है लेकिन उससे मिली जानकारी को सही समय पर सही जगह इस्तेमाल करना उससे भी जरूरी है। रॉकेट ने ऊपर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा दी है, अब आंकड़ों को जमीन पर कामयाब बनाने की बारी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। EOS 05 की अंतिम परिचालन क्षमता और उससे प्राप्त आंकड़े संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं तथा आधिकारिक आकलनों पर निर्भर करेंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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