टेक्नोलॉजी

कम लागत वाले अपशिष्ट जल उपचार समाधान को मिली यूएनडीपी की मान्यता

देश के एक युवा ने कम लागत वाला अपशिष्ट जल उपचार समाधान विकसित किया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा मान्यता मिली है।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। पर्यावरण और तकनीक जगत से इस वक्त एक बेहद प्रेरणादायक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जो देश के युवाओं की रचनात्मक सोच से जुड़ी हुई है। बिहार के मधुबनी से ताल्लुक रखने वाले और वर्तमान में मुंबई में रहने वाले बीस वर्षीय युवा पीयूष झा ने एक बेहद किफायती और विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली विकसित की है। इस अनूठी तकनीकी खोज का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों द्वारा निकलने वाले दूषित पानी को बहुत कम खर्च में और बिना भारी-भरकम बुनियादी ढांचे के साफ करना है, जिससे देश के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में काफी मदद मिलेगी।   [1]

नवाचार की विशेषताएं

विस्तृत जानकारियों के मुताबिक, इस अभिनव अपशिष्ट जल उपचार तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके संचालन के लिए किसी भी प्रकार के महंगे रासायनिक डोजिंग या भारी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं पड़ती है। पारंपरिक जल उपचार संयंत्रों को स्थापित करने में उद्योगों को बहुत अधिक पूंजी खर्च करनी पड़ती है, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के उद्योग कई बार कतराते हैं। यह नई प्रणाली सूक्ष्मजीवों की मदद से जैविक कचरे को विघटित करती है और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बिजली का उत्पादन भी करती है, जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों दृष्टियों से बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।

औद्योगिक लाभ

विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस किफायती समाधान के आने से देश के टेक्सटाइल, लेदर, फूड एंड बेवरेज, डिस्टिलरी और शुगर जैसे प्रमुख उद्योगों को भारी वित्तीय राहत मिलेगी। सामान्य तौर पर जिन उद्योगों को अपने यहां अपशिष्ट जल के उपचार के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट के रूप में भारी भरकम रकम खर्च करनी पड़ती थी, उनका यह खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा। कम लागत पर प्रभावी अपशिष्ट जल उपचार समाधान उपलब्ध होने से अब छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग भी आसानी से पर्यावरण नियमों का पालन कर सकेंगे और बिना उपचारित पानी को सीधे नदियों या जलाशयों में छोड़ने से बचेंगे।

यूएनडीपी की मान्यता

इस उल्लेखनीय पर्यावरण-अनुकूल नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) भारत द्वारा इसे सम्मानित किया गया है। इस युवा को 'यूथ को: लैब' कार्यक्रम के तहत उद्योग जगत के दिग्गजों से मेंटरशिप, निवेशकों से जुड़ने के अवसर और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है, जो नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन और अन्य प्रमुख संगठनों के सहयोग से चलाया जाता है। इस प्रकार की पहलों से देश के प्रतिभाशाली युवाओं को अपने स्टार्टअप्स और वैज्ञानिक आविष्कारों को बड़े पैमाने पर लागू करने का शानदार अवसर मिल रहा है।

भविष्य की संभावनाएं

आने वाले समय में इस तकनीक के प्रसार से देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन की तस्वीर पूरी तरह से बदलने की उम्मीद की जा रही है। कई प्रमुख स्वच्छ-तकनीक स्टार्टअप्स और अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं ने इस मॉडल में गहरी रुचि दिखाई है, जिससे इसके व्यावसायिक उपयोग का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। पर्यावरणविदों और तकनीकी विश्लेषकों का यह मानना है कि जल प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए इस तरह के किफायती, विकेंद्रीकृत और हरित समाधान आने वाले दिनों में देश के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट तथ्यात्मक स्रोतों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

#WastewaterTreatment #UNDP #Innovation #GreenTech #Environment #StartupIndia
Read Full Article on RexTV India