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समीक्षा

1971 के बाद सबसे बड़ा हमला: सिंदूर ने बदल दिया भारत का सैन्य रुख

1971 के बाद सबसे बड़ा हमला: सिंदूर ने बदल दिया भारत का सैन्य

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Internet

प्रतीकात्मक फोटो - Internet

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ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारत के बदले हुए सैन्य तेवर का प्रदर्शन था। 1971 के युद्ध के बाद, भारत ने इतनी बड़ी, गहरी और आधुनिक तकनीक वाली सैन्य कार्रवाई पहले कभी नहीं की थी। इस ऑपरेशन में, भारत ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। यह कार्रवाई दिखाती है कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और दुश्मन के घर में घुसकर उसे सबक सिखाने की क्षमता रखता है।

उरी और बालाकोट से अलग, 'सिंदूर' था बड़ा और महंगा

पहले, भारत ने उरी (2016) और बालाकोट (2019) में जो हमले किए थे, वे छोटे और जल्दी खत्म होने वाले थे। लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' अलग था। यह एक बड़ा और महंगा ऑपरेशन था, जिसमें हवा, जमीन और अंतरिक्ष से हमला किया गया। भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) में कई जगहों पर एक साथ हमले किए। यह दिखाता है कि भारत अब आतंकवाद को लेकर अपनी रणनीति बदल रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उरी में जो हमला हुआ था, वह जमीन पर सैनिकों द्वारा किया गया एक छोटा सा ऑपरेशन था। बालाकोट में, भारत ने पहली बार 1971 के बाद हवाई हमला किया था। लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' में, भारत ने हवा, तोपखाने और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। इससे भारत को दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला करने और एक साथ कई ठिकानों को निशाना बनाने में मदद मिली।

राफेल और आत्मघाती ड्रोन का इस्तेमाल

'ऑपरेशन सिंदूर' में, भारत ने राफेल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया, जिनमें SCALP और HAMMER मिसाइलें लगी थीं। भारत ने आत्मघाती ड्रोन (सुसाइड ड्रोन) का भी इस्तेमाल किया, जो दुश्मन के इलाके में जाकर खुद को विस्फोट कर देते हैं। इन हथियारों की मदद से, भारत ने पाकिस्तान में बहुत दूर तक हमला किया और दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया।

बहावलपुर पर हमला था खास

भारतीय वायुसेना ने बहावलपुर पर जो हमला किया, वह 'ऑपरेशन सिंदूर' का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। बहावलपुर में पाकिस्तान सेना का 31 कोर मुख्यालय है। इस मुख्यालय पर हमला करके, भारत ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि वह आतंकवादियों और उनकी मदद करने वालों दोनों को निशाना बनाने के लिए तैयार है। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने यह हमला करके दिखाया कि उसके पास दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसकर हमला करने की क्षमता है।

सेना ने दिखाया दम

भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन में आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। सेना ने Excalibur 155mm तोप के गोले और M777 हल्की तोपों का इस्तेमाल किया, जो GPS और ड्रोन से निशाना साधते हैं। इससे सेना ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले किए और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। 1971 के बाद यह शायद पहली बार था कि भारत ने सीमा पार मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

हमले का समय और तरीका

'ऑपरेशन सिंदूर' 1:05 पूर्वाह्न से 1:30 पूर्वाह्न तक चला। इससे भारतीय सेना को दुश्मन पर हमला करने, नुकसान का अंदाजा लगाने और जरूरत पड़ने पर फिर से हमला करने का समय मिला। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की सेना को भारतीय सेना के हमले का जवाब देने में 20-25 मिनट लग गए। इससे पता चलता है कि भारत ने यह हमला अचानक और बहुत सटीकता से किया था।

खैबर पख्तूनख्वा पर भी नजर

खबर है कि भारत ने खैबर पख्तूनख्वा में भी कुछ जगहों की पहचान की है, जहां भविष्य में हमले किए जा सकते हैं। इससे पता चलता है कि भारत के पास दुश्मन के ठिकानों की जानकारी जुटाने और उन पर निशाना साधने की बेहतर तकनीक है।

'सिंदूर' का मतलब

'ऑपरेशन सिंदूर' सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं थी। यह भारत की नई सैन्य रणनीति का ऐलान था। भारत अब आतंकवादियों और उन्हें पनाह देने वालों दोनों पर हमला करने की क्षमता रखता है, चाहे वे दुश्मन के इलाके में कितने भी दूर क्यों न हों। भारत के पास आधुनिक हथियार हैं, अच्छी खुफिया जानकारी है और वह दुश्मन पर सटीक हमले करने में सक्षम है। 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह साबित कर दिया है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief