उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अप्रत्याशित इस्तीफा: स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अप्रत्याशित इस्तीफा: स्वास्थ्य क
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
सोमवार को भारतीय राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला, जब भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। इस इस्तीफे ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब संसद का मानसून सत्र अभी-अभी शुरू हुआ है। धनखड़ ने अपने इस निर्णय के पीछे स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को मुख्य कारण बताया है।
संवैधानिक प्रावधान के तहत त्यागपत्र
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को भारत के संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा। यह संवैधानिक प्रावधान उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षरित पत्र द्वारा पद छोड़ने की अनुमति देता है। धनखड़ का कार्यकाल अभी 2027 तक था, और उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से लगभग दो वर्ष पूर्व ही पद छोड़ दिया है, जो एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
स्वास्थ्य कारणों पर दिया जोर
अपने त्यागपत्र में, धनखड़ ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने" के लिए यह पद छोड़ रहे हैं। हालाँकि, उनके इस्तीफे की अचानक टाइमिंग ने कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है, क्योंकि संसद सत्र के पहले दिन तक वे राज्यसभा की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे। गौरतलब है कि मार्च में उन्हें दिल संबंधी समस्याओं के चलते एम्स में भर्ती कराया गया था।
कृतज्ञता से भरा विदाई संदेश
अपने इस्तीफे के पत्र में, धनखड़ ने गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रति उनके "अटूट समर्थन और सुखद कार्य संबंध" के लिए आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के सहयोग व समर्थन को "अमूल्य" बताया, और कहा कि उन्हें संसद के सभी माननीय सदस्यों से प्राप्त "स्नेह, विश्वास और अपनापन" हमेशा याद रहेगा।
राज्यसभा अध्यक्ष पद पर प्रभाव
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब वह राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद, यह पद अब रिक्त हो गया है, जिससे राज्यसभा की कार्यवाही और नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया पर तुरंत ध्यान केंद्रित होगा। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव जल्द से जल्द कराया जाना अनिवार्य है।
धनखड़ का संक्षिप्त कार्यकाल
जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उपराष्ट्रपति बनने से पहले, उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य किया था। उनका कार्यकाल छोटा रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने संसद के ऊपरी सदन के सभापति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका इस्तीफा भारत के संवैधानिक इतिहास में ऐसा तीसरा उदाहरण है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा हो।