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ड्रोन की मदद से भंडाफोड़: हाईवे पर चल रहे तेल चोरों के रैकेट का खुलासा

ड्रोन की मदद से भंडाफोड़: हाईवे पर चल रहे तेल चोरों के रैकेट

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg मौके से गिरफ्तार आरोपी

मौके से गिरफ्तार आरोपी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक ऐसे काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ है, जो हाईवे के किनारे एक साधारण सी बालू मंडी की आड़ में सालों से चल रहा था। इस अवैध धंधे में टैंकरों से डीजल और पेट्रोल चोरी कर उसे सस्ते दामों पर बेचा जा रहा था, जिससे सरकार और तेल कंपनियों को बड़ा नुकसान हो रहा था। यह गोरखधंधा पुलिस की अपराध शाखा (एसओजी-2) की सतर्कता और आधुनिक तकनीक के उपयोग से उजागर हुआ। पुलिस ने न केवल इस अवैध गोदाम का भंडाफोड़ किया, बल्कि मौके से आठ आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया, जिससे एक बड़े आपराधिक नेटवर्क को भारी झटका लगा है।

ड्रोन की मदद से भंडाफोड़

यह कार्रवाई वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र के भीटी इलाके में की गई, जहाँ एसओजी-2 टीम को एक अवैध तेल गोदाम के संचालन की गुप्त सूचना मिली थी। इस गुप्त सूचना को सत्यापित करने और ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने एक आधुनिक और अनूठे तरीके का सहारा लिया। टीम ने ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल करते हुए गोदाम की सटीक लोकेशन और वहाँ चल रही गतिविधियों की हवाई रेकी की। ड्रोन से मिली फुटेज में गोदाम पर टैंकरों से तेल चोरी करते हुए कई लोग दिखाई दिए। इस तकनीकी सबूत ने पुलिस को निर्णायक कार्रवाई करने का मौका दिया और एक बड़ा छापा मारने का मार्ग प्रशस्त किया।

साजिश का तरीका और ठिकाना

डीसीपी क्राइम सरवणन टी. के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि यह अवैध तेल गोदाम रामनगर हाईवे किनारे स्थित एक बालू मंडी की आड़ में संचालित हो रहा है। अपराधी इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी बड़ी कंपनियों के टैंकरों को निशाना बनाते थे। वे टैंकरों की सील लॉक को बड़ी सफाई से तोड़कर उसमें से तेल निकालते थे और फिर उसे दोबारा बंद कर देते थे। यह धोखाधड़ी इसलिए भी मुश्किल थी, क्योंकि टैंकरों का बाहरी सील सुरक्षित दिखाई देता था। यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें हर सदस्य की अपनी एक निश्चित भूमिका थी।

मौके पर खड़ा टैंकर

पुलिस की निर्णायक छापेमारी

ड्रोन से पुष्ट जानकारी मिलने के बाद, पुलिस की टीम ने तुरंत ही छापेमारी की योजना बनाई। एसीपी कोतवाली अतुल अंजान त्रिपाठी और रामनगर पुलिस के साथ एसओजी-2 ने संयुक्त रूप से इस गोदाम पर छापा मारा। पुलिस ने इतनी तेजी से कार्रवाई की कि मौके पर मौजूद आठ आरोपियों को भागने का कोई मौका नहीं मिला। सभी को एक ही बार में धर दबोचा गया, जिससे यह कार्रवाई पूरी तरह सफल रही। इस छापेमारी के दौरान, पुलिस को न केवल भारी मात्रा में चोरी का सामान मिला, बल्कि इस पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगे।

भारी मात्रा में बरामदगी

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली चीजें बरामद कीं। इसमें इंडियन ऑयल के दो टैंकर, 525 लीटर चोरी का डीजल, ₹36,200 की नकद राशि, एक रिपीट मशीन (जिसका इस्तेमाल टैंकरों की सील को दोबारा लगाने के लिए किया जाता था), तेल नापने के बर्तन और 20 खाली ड्रम शामिल हैं। ये सभी बरामदगी इस बात का प्रमाण हैं कि यह गिरोह छोटे-मोटे अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित और बड़े पैमाने पर चल रहे नेटवर्क का हिस्सा था। बरामद किए गए सामान को जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।

प्रतिदिन 1700 लीटर तेल की चोरी

गिरफ्तार आरोपियों से की गई गहन पूछताछ में इस अवैध कारोबार का चौंकाने वाला सच सामने आया। पुलिस को मौके से एक रजिस्टर भी मिला, जिसमें चोरी किए गए तेल का हिसाब-किताब दर्ज था। रजिस्टर से पता चला कि यह गिरोह औसतन प्रतिदिन 1700 लीटर डीजल की चोरी करता था। इस बड़ी मात्रा में चोरी किए गए तेल को वे बाद में ग्रामीण इलाकों में कम कीमत पर बेच देते थे, जिससे उन्हें भारी मुनाफा होता था। इस नेटवर्क से जुड़े लोग न केवल अपनी जेब भर रहे थे, बल्कि वे सरकार और आम उपभोक्ताओं को भी धोखा दे रहे थे।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

इस मामले में पुलिस ने कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान मिर्जापुर के विनोद पटेल, जौनपुर के आशीष सिंह उर्फ पप्पू, चंदौली के दिनेश पटेल, दीपक गुप्ता, अजय और भुवनेश्वर पाल, भदोही के राजेश सिंह और जफराबाद के दीपक कुमार सरोज के रूप में हुई है। पूछताछ में यह भी पता चला है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से दो टैंकर चालक भी हैं। उनका काम टैंकरों से तेल चोरी करना और उसे अवैध गोदाम तक पहुंचाना था। यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई जिलों में फैला हुआ था।

जांच और आगे की राह

पुलिस ने इस मामले में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। इंडियन ऑयल और जिला पूर्ति अधिकारी की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर छानबीन की है। यह सफलता न केवल वाराणसी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के अन्य हिस्सों में भी चल रहे इस तरह के अवैध तेल कारोबार पर लगाम लगाने के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। पुलिस की यह कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग अपराध से लड़ने में कितना प्रभावी हो सकता है।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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