भीलवाड़ा को राष्ट्रपति सम्मान: आदिवासी सशक्तिकरण में उत्कृष्ट कार्य
भीलवाड़ा को राष्ट्रपति सम्मान: आदिवासी सशक्तिकरण में उत्कृष्
प्रतीकात्मक फोटो : Internet
समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही सच्चे सशक्तिकरण की पहचान है। इसी लक्ष्य को साधते हुए राजस्थान के भीलवाड़ा जिले ने जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भीलवाड़ा को 'आदि कर्मयोगी अभियान' के तहत सम्मानित किया है। यह सम्मान जिले के आदिवासी समुदायों के विकास और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए किए गए अथक प्रयासों का राष्ट्रीय प्रमाण है, जिसने भीलवाड़ा को अन्य जिलों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना दिया है।
राष्ट्रीय सम्मान और उसकी पृष्ठभूमि
भीलवाड़ा जिले को आदिवासी कल्याण और उनके सशक्तिकरण में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। यह सम्मान आदि कर्मयोगी अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रदान किया गया। इस अभियान का उद्देश्य आदिवासी कल्याण के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिलों को पहचानना और उन्हें प्रोत्साहित करना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव विभु नायर ने भीलवाड़ा के कार्य को सराहा और इसे उत्कृष्ट प्रयास का प्रतीक बताया। यह उपलब्धि जिले की व्यापक विकासात्मक दृष्टि को दर्शाती है।

कलेक्टर संधू का सम्मान और पहल
भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू को यह प्रतिष्ठित सम्मान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिया गया। यह सम्मान नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में प्रदान किया गया। कलेक्टर संधू के नेतृत्व में जिले ने आदिवासी समुदायों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ शुरू कीं। इन पहलों में विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह पुरस्कार जिले के अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन के सामूहिक सहयोग और समर्पण का परिणाम है, जैसा कि कलेक्टर संधू ने स्वयं आभार व्यक्त करते हुए कहा।
प्रभाव और भविष्य की कार्ययोजना
इस राष्ट्रीय सम्मान का प्रमुख प्रभाव यह है कि यह भीलवाड़ा को आदिवासी कल्याण के क्षेत्र में रोल मॉडल के रूप में स्थापित करता है। जिले में 'धरती आभा योजना' के तहत 141 राजस्व ग्रामों में आदिवासी सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। भीलवाड़ा प्रशासन का अगला लक्ष्य मिशन-2030 के तहत जिले के एसटी बहुल क्षेत्रों में शत-प्रतिशत समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। इसका अर्थ है कि सभी पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिससे आदिवासी समुदाय का समग्र विकास होगा और वे देश के विकास में समान भागीदार बन सकेंगे।
रिपोर्ट - पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा।
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