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महाराष्ट्र

अदालत की शरण में निदा खान: गिरफ्तारी से बचने को गर्भावस्था का हवाला

अदालत की शरण में निदा खान: गिरफ्तारी से बचने को गर्भावस्था क

By अजय त्यागी
1 min read
TCS यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान

TCS यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान

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नाशिक के आईटी परिदृश्य को हिला देने वाले 'टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज' (TCS) यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान की तलाश अब तेज हो गई है। नाशिक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने तीन विशेष टीमें गठित कर मुंबई, पुणे और उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। यह मामला केवल कार्यस्थल पर उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने और संगठित तरीके से धर्मांतरण के प्रयास जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, कॉर्पोरेट कार्य संस्कृति और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कई कड़वे सच सामने आ रहे हैं। इस रिपोर्ट में हम उस नेटवर्क का विश्लेषण करेंगे जिसने प्रतिष्ठित कंपनी की आड़ में महिलाओं का मानसिक और शारीरिक शोषण किया।

पुलिस की सक्रियता और निदा खान की लोकेशन का सस्पेंस
नाशिक पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक के मार्गदर्शन में गठित एसआईटी ने शुक्रवार रात को निदा खान के पति को मुंब्रा पुलिस क्षेत्र से हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि निदा एक रिश्तेदार के घर गई है। हालांकि, जब पुलिस वहां पहुँची, तो घर पर ताला लटका मिला और सभी संदिग्धों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ पाए गए।

नाशिक पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार रात स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:

"एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न, यौन शोषण और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। अब तक इस मामले में कुल 9 आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।"

कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी और वकील का पक्ष
फरार चल रही निदा खान के वकील बाबा सैयद ने अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया कि निदा खान 'गर्भावस्था' के कारण चिकित्सा देखभाल में है और वह फरार नहीं है। एडवोकेट बाबा सैयद ने एफआईआर (FIR) की विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा:

"यदि आप एफआईआर को देखें, तो जबरन धर्मांतरण का कोई जिक्र नहीं है। मुझे नहीं पता कि उसे मास्टरमाइंड के रूप में क्यों दिखाया जा रहा है जबकि उसका नाम केवल एक ही मामले (CR) में आया है। उन पर केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है। यदि वह सामने आती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वह कभी एचआर (HR) नहीं थीं, कंपनी द्वारा भेजे गए निलंबन पत्र में भी उन्हें 'प्रोसेस एसोसिएट' बताया गया है।"

जांच का दायरा और धर्मांतरण के संगीन आरोप
एसआईटी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह उत्पीड़न पिछले चार वर्षों से चल रहा था। पुलिस ने मोहम्मद दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और आसिफ अफरोज अंसारी जैसे मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने टीम लीडर और अन्य वरिष्ठ पदों का दुरुपयोग कर कनिष्ठ महिला कर्मचारियों का शोषण किया।

नाशिक पुलिस प्रमुख संदीप कर्णिक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईए (NIA) और एटीएस (ATS) जैसी एजेंसियों को भी पत्र लिखकर इस संगठित गिरोह की जांच में सहयोग मांगा गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कई महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया और उनकी धार्मिक मान्यताओं का अपमान किया गया।

टीसीएस का रुख और राष्ट्रीय एजेंसियों की नजर
18 अप्रैल 2026 की ताजा जानकारी के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने स्पष्ट किया है कि निदा खान कभी भी एचआर विभाग का हिस्सा नहीं थी और कंपनी के पास आंतरिक रूप से इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली थी। हालांकि, कंपनी ने 'डेलॉयट' (Deloitte) और कानूनी विशेषज्ञों के माध्यम से एक स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त जज साधना जाधव के नेतृत्व में एक 'फैक्ट-फाइंडिंग' समिति का गठन किया है, जो अगले 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और 'स्पेकुलेटिव' रिपोर्ट्स से बचें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, 18 अप्रैल तक रजा मेमन और शफी शेख पुलिस हिरासत में हैं, जबकि अन्य आरोपी न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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