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सफेद चूहे के दर्शन का महत्व: करणी माता धाम की दिव्य और अनोखी परंपराएं

बीकानेर का करणी माता मंदिर 25,000 चूहों (काबा) के साथ आस्था और विस्मय का केंद्र है, जहाँ चूहों को दिव्य स्वरूप माना जाता है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg Ma Karni Temple, Deshnok, Bikaner

Ma Karni Temple, Deshnok, Bikaner

राजस्थान की रेतीली धरती पर बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर देशनोक में करणी माता का भव्य मंदिर स्थित है। मां करणी को साक्षात जगदम्बा का अवतार माना जाता है, जिनका जन्म 14वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने लोक कल्याण और धर्म की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह द्वारा 20वीं सदी में निर्मित यह मंदिर अपनी नक्काशीदार संगमरमर की कलाकृति और चांदी के विशाल द्वारों के लिए प्रसिद्ध है। मां करणी को बीकानेर राजघराने और चारण समाज की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है।

'काबा' का रहस्य और धार्मिक मान्यताएं

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ रहने वाले हजारों चूहे हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'काबा' कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये चूहे माता के वंशज हैं जो मृत्यु के पश्चात अस्थाई रूप से इस रूप में जन्म लेते हैं। भक्तों के बीच सफेद चूहे के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसे स्वयं माता या उनके पुत्र का प्रतीक माना जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में चूहों की मौजूदगी के बावजूद मंदिर में कभी कोई बीमारी या महामारी नहीं फैली और न ही परिसर में कोई दुर्गंध आती है।

आस्था के अनूठे नियम और सुरक्षा

देशनोक मंदिर में श्रद्धालुओं को विशेष नियमों का पालन करना होता है। चूहों की सुरक्षा के लिए यहाँ फर्श पर पैर उठाकर चलने के बजाय घसीटकर चलने की परंपरा है। यदि अनजाने में किसी चूहे की मृत्यु हो जाती है, तो प्रायश्चित के रूप में सोने या चांदी का चूहा मंदिर में दान करना अनिवार्य होता है। मंदिर में चूहों द्वारा जूठा किया गया प्रसाद (चूरी) और दूध भक्तों को वितरित किया जाता है, जिसे ग्रहण करना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत

देशनोक का यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि दुनिया भर के शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का विषय है। प्रतिवर्ष नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेलों का आयोजन होता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। यह स्थान जीव-जंतुओं और मानव के बीच के अटूट प्रेम और सह-अस्तित्व का एक महान उदाहरण पेश करता है, जो तर्क और विज्ञान से परे केवल श्रद्धा पर टिका है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह रिपोर्ट स्थानीय मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित है। लेख में वर्णित चमत्कारी घटनाएं व्यक्तिगत आस्था और पारंपरिक कथाओं का हिस्सा हैं। लेखक और प्रकाशक/संपादक किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा देने का इरादा नहीं रखते हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे धार्मिक स्थलों के नियमों और स्वच्छता मानकों का सम्मान करें।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief