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प्रादेशिक

डीसीपी शांतनु गिरफ्तार: ईडी की 10 घंटे की पूछताछ के बाद बड़ी कार्रवाई

ईडी ने उगाही सिंडिकेट और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में कोलकाता पुलिस के उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास को 10 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया

By अजय त्यागी
1 min read
डीसीपी शांतनु गिरफ्तार

डीसीपी शांतनु गिरफ्तार

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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जांच ने उस समय एक नया मोड़ ले लिया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी, उपायुक्त (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास को हिरासत में लिया। साल्ट लेक स्थित सी-जी-ओ कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को हुई यह कार्रवाई किसी नाटकीय घटनाक्रम से कम नहीं थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ईडी के अधिकारियों ने बिस्वास से लगातार 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। इस दौरान उनके वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों के विवरण और संदिग्ध व्यक्तियों के साथ उनके संबंधों पर तीखे सवाल किए गए। संतोषजनक उत्तर न मिलने और प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद देर रात उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की गई। शुक्रवार सुबह उन्हें आवश्यक चिकित्सा परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश करने की तैयारी है।

लुकआउट नोटिस और वकीलों के साथ आत्मसमर्पण
शांतनु सिन्हा बिस्वास की मुश्किलें उस समय बढ़नी शुरू हुई थीं जब जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ 'लुकआउट नोटिस' जारी कर दिया था। यह नोटिस तब जारी किया गया जब वे एजेंसी के पिछले कई समन पर पेश नहीं हुए थे। गिरफ्तारी के डर और कानूनी दबाव के बीच, बिस्वास शुक्रवार को अपने दो निजी वकीलों के साथ खुद ईडी कार्यालय पहुंचे थे। हालांकि, उन्होंने जांच में सहयोग करने की कोशिश की, लेकिन ईडी के पास उनके खिलाफ पुख्ता सबूत पहले से ही मौजूद थे। पिछले महीने उनके बालीगंज स्थित आवास और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे, जिन्होंने इस पूरे मामले की नींव रखी।

Salt Lake, West Bengal: DCP Shantanu Sinha Biswas has been taken to a hospital for a medical examination and will subsequently be produced in court. Biswas was arrested by the Enforcement Directorate (ED) in a money laundering case pic.twitter.com/gyVonVlNIn

— IANS (@ians_india) May 15, 2026

उगाही सिंडिकेट और 'सोना पप्पू' का कनेक्शन
ईडी की जांच का मुख्य केंद्र एक संगठित उगाही सिंडिकेट है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि बिस्वास इसका अहम हिस्सा थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि डीसीपी बिस्वास कुख्यात अपराधी विश्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' और एक प्रभावशाली व्यवसायी जॉय कामदार के सीधे संपर्क में थे। यह सिंडिकेट मुख्य रूप से जमीन के अवैध सौदों, जबरन वसूली और प्रभावशाली व्यापारियों को पुलिसिया धौंस दिखाकर डराने का काम करता था। आरोप है कि बिस्वास अपनी वर्दी और पद का दुरुपयोग कर इस अवैध नेटवर्क को न केवल संरक्षण दे रहे थे, बल्कि इससे होने वाली काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा भी प्राप्त कर रहे थे। मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इस पैसे को विभिन्न बेनामी संपत्तियों में निवेश किए जाने का भी अंदेशा है।

भाजपा का तीखा हमला और राजनीतिक घमासान
इस गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल सिन्हा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। राहुल सिन्हा ने कहा कि यह गिरफ्तारी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य का प्रशासन और पुलिस तंत्र भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई शीर्ष नेता इस सिंडिकेट के वास्तविक लाभार्थी हैं और पुलिस अधिकारी केवल उनके मोहरे के रूप में काम कर रहे हैं। भाजपा ने दावा किया है कि बिस्वास की गिरफ्तारी से कई ऐसी कड़ियां खुलेंगी जो राज्य के सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं तक पहुँचेंगी। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग तेज कर दी है।

भविष्य की जांच और कानूनी चुनौतियां
आने वाले दिनों में शांतनु सिन्हा बिस्वास की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ईडी कोर्ट से उनकी अधिकतम दिनों की हिरासत मांगने की योजना बना रही है ताकि उन्हें 'सोना पप्पू' और अन्य सह-आरोपियों के सामने बिठाकर पूछताछ की जा सके। जांच एजेंसी अब उन सभी बैंक खातों और लॉकरों को खंगाल रही है जो बिस्वास या उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर हैं। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें एक सेवारत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की संलिप्तता पाई गई है, जो कानून-व्यवस्था पर जनता के भरोसे को हिलाने वाली घटना है। अब सबकी नजरें कोर्ट की कार्यवाही और ईडी द्वारा पेश किए जाने वाले आगामी दस्तावेजों पर टिकी हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह रिपोर्ट वर्तमान में उपलब्ध समाचार सूचनाओं और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। शांतनु सिन्हा बिस्वास के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं और उन्हें अभी तक दोषी सिद्ध नहीं किया गया है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी की कानूनी व्याख्या या भविष्य में आने वाले अदालती फैसलों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief