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प्रादेशिक

उधमपुर में ऐतिहासिक मौंगरी मेले का आगाज: शिव-पार्वती भक्ति का संगम

उधमपुर के मौंगरी में ऐतिहासिक तीन दिवसीय शिव-पार्वती मेले का शुभारंभ हो गया है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्राकृतिक गुफा के दर्शन करेंगे।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में स्थित सुरम्य क्षेत्र मौंगरी में आज से ऐतिहासिक तीन दिवसीय वार्षिक मेले का शुभारंभ हो गया है। इस धार्मिक आयोजन को स्थानीय स्तर पर 'शिव-पार्वती मेला' के नाम से भी जाना जाता है। उधमपुर जिला प्रशासन ने मौंगरी के प्रसिद्ध ‘सर डब्बर’ क्षेत्र में होने वाले इस भव्य आयोजन के लिए सुरक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन की व्यापक तैयारियां की हैं। मेले की शुरुआत पारंपरिक शिव त्रिशूल यात्रा के साथ हुई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ हिस्सा लिया। यह मेला न केवल उधमपुर बल्कि पूरे जम्मू संभाग की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक अटूट हिस्सा बन चुका है।

कब और कहाँ होता है मेले का आयोजन?

मौंगरी मेला प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की प्रथमा तिथि से तृतीया तिथि तक आयोजित किया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह समय आमतौर पर मई के मध्य में आता है। उधमपुर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित 'सर डब्बर' इस मेले का मुख्य केंद्र है। 'सर डब्बर' एक विस्तृत मैदान है जिसके बारे में माना जाता है कि प्राचीन काल में यहाँ एक विशाल झील हुआ करती थी, जो समय के साथ सूख गई। वर्तमान में यह स्थान ऊंचे पहाड़ों और हरियाली से घिरा हुआ है, जहाँ दो छोटी धाराओं का मिलान इसे और भी मनमोहक बनाता है। यहाँ स्थित भगवान शिव और माता पार्वती की प्राकृतिक गुफा भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहती है।

पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व

मौंगरी मेले से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं अत्यंत रोचक और गहरी हैं। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, प्राचीन काल में इस क्षेत्र को 'सोनारा' के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है सौ झरनों वाली भूमि। शिव-पार्वती गुफा का पता वर्ष 1998 में चला था, जिसके बाद से यहाँ वार्षिक मेले का आयोजन शुरू हुआ। इस गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बनी भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और नाग देवता की आकृतियाँ विद्यमान हैं। एक अन्य प्राचीन कथा के अनुसार, यहाँ एक झील थी जिसमें नाग देवता निवास करते थे। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस गुफा में प्रार्थना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहाँ भक्त शिवलिंग पर दूध अर्पित करते हैं और गुफा की प्राकृतिक सुंदरता के बीच आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

मेले के मुख्य आकर्षण और सांस्कृतिक गतिविधियां

मौंगरी मेला केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि डोगरा संस्कृति की झलक पेश करने वाला एक जीवंत उत्सव भी है। मेले के दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक लोक संगीत और नृत्य जैसे 'कुद' और 'गीतरू' का प्रदर्शन किया जाता है। श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए कुश्ती (दंगल) का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न राज्यों के पहलवान हिस्सा लेते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी विभागों द्वारा विभिन्न स्टॉल लगाए जाते हैं, जहाँ लोगों को सरकारी योजनाओं और कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाती है। स्थानीय लोग यहाँ हस्तशिल्प, खिलौनों और पारंपरिक मिठाइयों की दुकानें लगाते हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलता है।

सामाजिक सौहार्द और पर्यटन को बढ़ावा

यह ऐतिहासिक मेला सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। इसमें उधमपुर के अलावा पंचारी, चनैनी, रामनगर और जम्मू से विभिन्न समुदायों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होते हैं। मौंगरी की ठंडी जलवायु और शांत वातावरण के कारण यह क्षेत्र तेजी से पर्यटन मानचित्र पर भी उभर रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार, ऐसे मेलों का आयोजन स्थानीय विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। तीन दिनों तक चलने वाला यह उत्सव आध्यात्मिक ऊर्जा और हर्षोल्लास के साथ संपन्न होता है, जो आगंतुकों के मन पर अमिट छाप छोड़ जाता है।[1]

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह रिपोर्ट विभिन्न समाचार स्रोतों, आधिकारिक घोषणाओं और ऐतिहासिक मान्यताओं पर आधारित है। मेले से संबंधित तिथियाँ और परंपराएँ धार्मिक पंचांग और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार बदली जा सकती हैं। लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत या व्यावसायिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief