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मोटिवेशनल

दिव्यांगों के हौसलों की उड़ान: बीकानेर में प्रतिभा का अनूठा संगम

बीकानेर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में दिव्यांग खिलाड़ियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सबका दिल जीत लिया और सहयोग प्राप्त किया।

By अजय त्यागी
1 min read
हम में भी है जान, हौसलों की उड़ान कार्यक्रम

हम में भी है जान, हौसलों की उड़ान कार्यक्रम

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राजस्थान के बीकानेर जिले में "हम में भी है जान, हौसलों की उड़ान" कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। एसएमएस दिव्यांग सेवा संस्था पैरा स्पोर्ट्स और वी.आर. फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम डागा पैराडाइज में संपन्न हुआ। इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग खिलाड़ियों के भीतर छिपी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाना और उन्हें खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों से आए दिव्यांगजनों ने अपनी शारीरिक सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए जो उत्साह दिखाया, उसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन समाज में समावेशिता और दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभा का प्रदर्शन

कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता दिव्यांग खिलाड़ियों द्वारा दी गई विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं। मंच पर जब इन विशेष प्रतिभाओं ने फैशन शो और मॉडलिंग के दौरान रैंप वॉक किया, तो पूरे हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। केवल फैशन ही नहीं, बल्कि स्पीच, डांसिंग और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि आत्मविश्वास हो तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। संस्था की पदाधिकारी मंजू गुलगुलिया ने बताया कि दिव्यांग खिलाड़ियों को मंच प्रदान करना उनके सशक्तिकरण के लिए अनिवार्य है। डागा पैराडाइज प्रबंधन ने इस नेक कार्य के लिए अपना भवन निशुल्क उपलब्ध करवाकर सामाजिक सरोकार की एक नई मिसाल पेश की, जिसकी सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता हेतु विशेष वित्तीय सहयोग

कार्यक्रम के दौरान मानवता और सेवा की अद्भुत झलक तब देखने को मिली, जब मुख्य अतिथि मेघराज रिद्धीकरण सेठिया और मेघराज बोथरा ने दो होनहार दिव्यांग खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने का अवसर प्रदान किया। खिलाड़ी गुड्डी कुमारी और ललिता सैनी को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भेजने हेतु इन दोनों समाजसेवियों ने विशेष आर्थिक सहयोग दिया। एक खिलाड़ी की एंट्री फीस 30,000 रुपये थी, जिसे इन दोनों दानदाताओं ने सहर्ष वहन किया। इस सहयोग के बिना इन खिलाड़ियों के लिए वैश्विक मंच तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। समाज के अन्य प्रबुद्ध जनों जैसे प्रोफेसर बबीता जैन, मनीष वैष्णव और नागराज बेगानी ने भी खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए गुप्त दान और सहयोग राशि देकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

समाजसेवियों और सहयोगी संस्थाओं का अभिनंदन

कार्यक्रम में उन समाजसेवियों का भी विशेष सम्मान किया गया, जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता दिव्यांग खिलाड़ियों को निरंतर अपना सहयोग प्रदान करते रहे हैं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में चंपक सुराणा, डॉ. कन्हैयालाल कच्छावा, मदन स्वामी और झवर टाक जैसे गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वी.आर. फाउंडेशन की संस्थापक अर्चना सक्सेना के नेतृत्व में टीम के सभी सदस्यों—अलका पारीक, मोहना नारंग, चित्रा सोनी और अन्य ने—दिन-रात मेहनत कर इस आयोजन को सफल बनाया। एसएमएस सेवा संस्था की ओर से सरिता बोथरा और उर्मिला भंसाली ने भी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम का कुशल संचालन ज्योति प्रकाश रंगा और चित्रा वर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी वाणी से कार्यक्रम में प्राण फूँक दिए।

पैरा स्पोर्ट्स का विकास और भविष्य के लक्ष्य

संस्था के उपाध्यक्ष लक्ष्मण रामावत ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य बीकानेर जिले में पैरा स्पोर्ट्स के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। वे चाहते हैं कि यहाँ के दिव्यांग खिलाड़ी न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय तिरंगे का मान बढ़ा सकें। कार्यक्रम के अंत में उन पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया, जो निरंतर दिव्यांगजनों की उपलब्धियों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज के सामने लाते हैं। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज का साथ मिले, तो दिव्यांगजन भी आसमान की ऊँचाइयों को छू सकते हैं। बीकानेर की धरा पर हुई इस पहल की गूँज अब दूर तक सुनाई दे रही है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह रिपोर्ट बीकानेर में आयोजित "हम में भी है जान, हौसलों की उड़ान" कार्यक्रम से प्राप्त तथ्यों और आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। लेख में उल्लिखित वित्तीय सहयोग और नामों का विवरण संस्था द्वारा प्रदान किए गए विवरणों के अनुसार है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी प्रकार के दान या सहयोग से पूर्व संस्था की प्रमाणिकता की स्वयं जांच कर लें।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief