सिरोही में कलेक्टर की अनूठी पहल: साइकिल से ऑफिस पहुंचे अधिकारी
प्रधानमंत्री की अपील पर सिरोही कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने साइकिल से कार्यालय पहुंचकर ईंधन और पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।
जिला कलेक्टर साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचे
सिरोही (शिम्भु सिंह शेखावत)। राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर क्षेत्र में आज एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी, जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर, स्वयं साइकिल चलाकर अपने कार्यालय पहुंचे। वैश्विक स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और देश में ईंधन की खपत को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई विशेष अपील के सम्मान में कलेक्टर ने यह कदम उठाया है। कलेक्टर की इस पहल का अनुसरण करते हुए जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी शुक्रवार को अपने सरकारी और निजी वाहनों को त्यागकर साइकिल का सहारा लिया। इस मुहिम ने न केवल प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाया है, बल्कि आमजन को भी संसाधनों के संयमित उपयोग के प्रति जागरूक किया है।
प्रधानमंत्री की 'सात अपील' और राजस्थान में प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जिम्मेदार ऊर्जा उपभोग के लिए 'सात महत्वपूर्ण अपील' की थी। इनमें पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, कार-पूलिंग को बढ़ावा देने और छोटी दूरियों के लिए साइकिल का उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया था। इसी कड़ी में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी हाल ही में निर्देश जारी कर सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने और ईंधन की फिजूलखर्ची रोकने के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री के इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए सिरोही कलेक्टर ने शुक्रवार को 'नो व्हीकल डे' जैसा माहौल बना दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारियों का यह आचरण समाज के लिए एक उदाहरण बनेगा।
राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी दिखी ऊर्जा संरक्षण की झलक
ईंधन बचत की यह लहर केवल सिरोही तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि आज राजस्थान के कई अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के घटनाक्रम देखने को मिले। राजधानी जयपुर में 'संडे ऑन साइकिल' और 'मिशन लाइफ' के तहत विभिन्न विभागों द्वारा साइकिल रैलियों का आयोजन किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत अपने कुल आयात का एक बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों पर खर्च करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है। राजस्थान सरकार के उच्चाधिकारियों ने भी स्वैच्छिक रूप से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन या इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने का निर्णय लिया है। आज के दिन राज्य भर के कई नगर निगमों और कलेक्ट्रेट परिसरों में वाहनों की पार्किंग खाली नजर आई, जो ऊर्जा संरक्षण के प्रति बढ़ती जन-जागरूकता का प्रमाण है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति कलेक्टर की अपील
साइकिल से कार्यालय पहुंचने के बाद जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने मीडिया और उपस्थित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक मार्मिक अपील की। उन्होंने कहा कि साइकिल चलाना न केवल ईंधन की बचत करता है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभदायक है। वर्तमान की भागदौड़ भरी जीवनशैली में शारीरिक व्यायाम की कमी को साइकिलिंग के माध्यम से दूर किया जा सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अपनी भावी पीढ़ी के लिए एक स्वच्छ पर्यावरण छोड़कर जाना होगा। उन्होंने जिले के युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों से आग्रह किया कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन अपने निजी वाहनों का उपयोग बंद करें और साइकिल या सार्वजनिक बस सेवा को प्राथमिकता दें।
भविष्य की रणनीति और संसाधनों का प्रबंधन
प्रशासन का लक्ष्य इस पहल को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित रखना नहीं है। कलेक्टर तोमर ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट कराया जाएगा और सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा दिया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गैर-जरूरी यात्राओं से बचें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकों को प्राथमिकता दें। इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय निकायों और स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। रेवदर में आज के इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व स्वयं पहल करे, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव है। सिरोही प्रशासन की इस 'स्वर्ण पहल' की चर्चा अब पूरे प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हो रही है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, आधिकारिक सोशल मीडिया अपडेट्स और प्रधानमंत्री की ऊर्जा संरक्षण अपील के तथ्यों पर आधारित है। ईंधन बचत और साइकिलिंग के लाभ व्यक्ति के स्वास्थ्य और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। प्रस्तुत लेख का उद्देश्य जन-जागरूकता और सूचनात्मक है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी व्यक्तिगत या प्रशासनिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।