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प्रादेशिक

मरणोपरांत नेत्रदान से चमकेगी दो जिंदगियां: बाल्दी परिवार की मिसाल

भीलवाड़ा के स्वर्गीय जगदीश प्रसाद बाल्दी के निधन पर उनके परिवार ने नेत्रदान कर मानवता की मिसाल पेश की, जिससे दो नेत्रहीनों को रोशनी मिलेगी।

By अजय त्यागी
1 min read
कॉर्निया को जयपुर भेजते हुए

कॉर्निया को जयपुर भेजते हुए

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भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। राजस्थान के भीलवाड़ा शहर स्थित आरसी व्यास कॉलोनी में रहने वाले प्रतिष्ठित बाल्दी परिवार ने हाल ही में एक ऐसा कार्य किया है, जिसने समाज के सामने निस्वार्थ सेवा और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। परिवार के मुखिया, स्वर्गीय जगदीश प्रसाद बाल्दी का अचानक हृदय गति रुकने से निधन हो गया। पूरा परिवार गहरे शोक और गम में डूबा हुआ था, लेकिन इस दुखद घड़ी में भी उन्होंने अपने सामाजिक दायित्वों को नहीं भुलाया। बाल्दी परिवार ने शोक के उन क्षणों में एक अत्यंत साहसिक और पुनीत निर्णय लिया कि वे स्वर्गीय जगदीश प्रसाद जी की आंखों का दान करेंगे, ताकि उनकी मृत्यु के बाद भी वे किसी और की आंखों के जरिए इस खूबसूरत दुनिया को देख सकें।

अंधत्व निवारण हेतु परिवार की सामूहिक सहमति

जैसे ही परिवार ने नेत्रदान का विचार किया, स्वर्गीय जगदीश प्रसाद बाल्दी के पुत्र अजय बाल्दी ने अपने परिजनों रमेश चंद्र, सत्यनारायण और शिवनारायण के साथ मिलकर इस पर चर्चा की। सभी ने एक स्वर में अंधत्व निवारण के इस महान उद्देश्य के लिए अपनी लिखित सहमति प्रदान की। परिवार का मानना था कि पार्थिव शरीर को अग्नि को समर्पित करने से पूर्व यदि उसका कोई अंग किसी जरूरतमंद के काम आ सके, तो इससे बड़ी श्रद्धांजलि और कोई नहीं हो सकती। बाल्दी परिवार के इस निर्णय की खबर जैसे ही समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं तक पहुंची, चारों ओर से इस अनुकरणीय पहल की सराहना होने लगी।

संस्थाओं का समन्वय और नेत्र उत्सर्जन की प्रक्रिया

नेत्रदान की इस पुनीत प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए भारत विकास परिषद की वीर शिवाजी शाखा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, जयपुर (भीलवाड़ा चैप्टर) एवं लायंस आई बैंक की टीमों को तुरंत सूचित किया गया। लायन राकेश पगारिया ने जानकारी देते हुए बताया कि डॉक्टर प्रतिष्ठा छिपा के कुशल निर्देशन में आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के नेत्र सहायक चेतन भट्ट तुरंत आरसी व्यास कॉलोनी स्थित बाल्दी परिवार के निवास पर पहुंचे। वहां पूरी गरिमा और चिकित्सकीय मानकों का पालन करते हुए नेत्र उत्सर्जन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने पूरी प्रक्रिया में सहयोग कर अपना धैर्य और संकल्प प्रदर्शित किया।

जयपुर भेजी गई कॉर्निया: दो नेत्रहीनों को मिलेगी रोशनी

प्रक्रिया के बाद प्राप्त कॉर्निया को विशेष तकनीकों के साथ सुरक्षित रूप से आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, जयपुर भेजा गया है। मीडिया प्रभारी मनीष बंसल ने बताया कि इन कॉर्निया का उपयोग दो ऐसे नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए किया जाएगा जो लंबे समय से प्रतीक्षा सूची में हैं। यह चिकित्सा विज्ञान और मानवीय संवेदनाओं का ही संगम है कि एक व्यक्ति के निधन के बाद भी उसकी आंखों से दो अन्य लोगों के जीवन का अंधेरा दूर हो सकेगा। लायंस आई बैंक परिवार ने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बाल्दी परिवार का हृदय से आभार व्यक्त किया है कि उन्होंने समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य किया है।

समाजसेवियों का सहयोग और जागरूकता का संदेश

इस पुनीत कार्य के अवसर पर भारत विकास परिषद के प्रांतीय प्रकल्प प्रभारी महेश जाजू, वीर शिवाजी शाखा के अध्यक्ष कमलेश बोडाना, सचिव पंकज अग्रवाल और सह सचिव हरीश अग्रवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पुनीत भूतड़ा, योगेश मित्तल, हितेश तोषनीवाल और परिषद के अन्य सदस्यों ने भी इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में अपना विशेष सहयोग दिया। लायन पवन पंवार और कमलेश बोडाना ने संयुक्त रूप से कहा कि नेत्रदान वास्तव में 'महादान' है। समाज में अक्सर मृत्यु के बाद अंगों के प्रति रूढ़िवादी धारणाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन बाल्दी परिवार जैसे शिक्षित और जागरूक परिवारों की ऐसी पहल उन भ्रांतियों को तोड़ने का काम करती है।

बाल्दी परिवार की विरासत और प्रेरणा

स्वर्गीय जगदीश प्रसाद बाल्दी का जीवन स्वयं में सादगी और सेवा का प्रतीक रहा है, और उनके परिवार ने उनके अंतिम संस्कार से पूर्व नेत्रदान कर उनकी विरासत को और भी गौरवशाली बना दिया है। भीलवाड़ा शहर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने इस कार्य को 'प्रेरणा का स्रोत' बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस एक बड़ी समस्या है और यदि हर नागरिक मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प ले, तो देश से अंधत्व को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। बाल्दी परिवार का यह निर्णय न केवल दो लोगों के जीवन में रोशनी लाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अंगदान जैसे मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करता रहेगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह रिपोर्ट भीलवाड़ा के बाल्दी परिवार द्वारा किए गए नेत्रदान के तथ्यों और जारी सूचनाओं पर आधारित है। नेत्रदान और अंगदान से संबंधित कानूनी और चिकित्सकीय नियम भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अधीन हैं। प्रस्तुत लेख का उद्देश्य केवल सूचनात्मक और समाज में सकारात्मकता फैलाना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी व्यक्तिगत या सामाजिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief