डिजिटल संतुलन से सशक्त होगा परिवार: मारवाड़ी महिला समिति का संदेश
अखिल मारवाड़ी महिला समिति ने भीलवाड़ा में विचार गोष्ठी आयोजित कर महिलाओं को मोबाइल के सीमित उपयोग और परिवार को समय देने हेतु प्रेरित किया।
मारवाड़ी महिला समिति का संदेश
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित अखिल मारवाड़ी महिला समिति की भीलवाड़ा शाखा द्वारा एक अत्यंत प्रासंगिक विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। "नारी है समाज की धूरी और नारी ही है परिवार की आधारशिला" की उदात्त भावना के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण प्रकल्प के तहत "मोबाइल कितना उपयोगी और अनुपयोगी है" विषय पर गहन मंथन किया गया। सुभाष नगर स्थित किड्स इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में समिति की दो दर्जन से अधिक सदस्याओं ने भाग लेकर वर्तमान डिजिटल युग में मोबाइल फोन के बढ़ते प्रभाव, इसकी उपयोगिता और इससे उत्पन्न होने वाले दुष्प्रभावों पर अपने बेबाक विचार साझा किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को डिजिटल दुनिया के खतरों के प्रति सचेत करना और उन्हें पारिवारिक समय की महत्ता समझाना था।
नारी संबल और परिवार के प्रति उत्तरदायित्व
कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष मधु लड़ा और सचिव अनुपमा मंत्री द्वारा "नारी है सशक्त तो परिवार रहे सशक्त" के संकल्प के साथ की गई। इस अवसर पर शाखा संपादक सुमन असावा ने अपने संबोधन में कहा कि नारी न केवल परिवार का संबल है, बल्कि वह संपूर्ण समाज को सही दिशा देने की सामर्थ्य रखती है। उन्होंने जोर दिया कि परिवार के मूल्यों को संजोए रखने में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, और ऐसे में तकनीक का चुनाव और उसका उपयोग भी विवेकपूर्ण होना चाहिए। विचार गोष्ठी में यह बात उभरकर सामने आई कि यदि घर की महिला जागरूक है, तो वह पूरे परिवार को तकनीक के अति प्रयोग से बचाकर एक स्वस्थ वातावरण निर्मित कर सकती है।
मोबाइल का उपयोग: सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता
महिला सशक्तिकरण प्रकल्प प्रभारी जतन हिंगड़ ने मोबाइल के व्यवहारिक उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को सचेत करते हुए कहा कि मोबाइल का उपयोग अत्यंत सतर्कता और जागरूकता के साथ किया जाना चाहिए। वर्तमान में मोबाइल समय की बर्बादी का एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है, जिससे न केवल व्यक्तिगत उत्पादकता प्रभावित होती है, बल्कि परिवार के साथ बिताए जाने वाले गुणवत्तापूर्ण समय में भी कमी आती है। उन्होंने आग्रह किया कि महिलाओं को डिजिटल दुनिया में खोए रहने के बजाय अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए ताकि वे बच्चों के पालन-पोषण और परिवार की देखभाल को प्राथमिकता दे सकें। मोबाइल केवल संचार का साधन होना चाहिए, न कि जीवन का केंद्र।
बच्चों पर प्रभाव और डिजिटल संतुलन का संकल्प
गोष्ठी के दौरान उपस्थित सभी सदस्याओं ने एक स्वर में स्वीकार किया कि वर्तमान में बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत के पीछे कहीं न कहीं बड़ों का व्यवहार भी जिम्मेदार है। सदस्याओं ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक अभिभावक स्वयं मोबाइल का उपयोग कम नहीं करेंगे, तब तक बच्चों को इससे दूर रखना संभव नहीं होगा। चर्चा के अंत में सभी महिलाओं ने सामूहिक रूप से यह निश्चित किया कि वे स्वयं मोबाइल का सीमित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करेंगी और अपना अधिक से अधिक समय बच्चों और परिवार के साथ व्यतीत करेंगी। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि जब बच्चे अपनी माँ और परिवार के अन्य सदस्यों को रचनात्मक कार्यों में व्यस्त देखेंगे, तो उनमें भी मोबाइल के प्रति आकर्षण कम होगा।
सामाजिक एकजुटता और सहयोगात्मक प्रयास
इस सफल आयोजन में बाल विकास प्रकल्प प्रभारी मंजू बलदवा का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के दौरान सह सचिव निर्मला बाहेती, उर्मिला अजमेरा, रेखा बांगड और लक्ष्मी प्रजापत सहित प्रियंका, चंद्रकांता, सलोनी जैन, मंजू जैन, चंदा कंवर, दुर्गा कंवर, प्रिया राजपूत, अनुराधा राठौर, दीप्ति चुंडावत, सोनिया पालीवाल और मनीषा सिसोदिया जैसी अनुभवी एवं युवा सदस्याओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समिति ने न केवल आपस में विचार साझा किए, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश दिया कि डिजिटल युग में 'डिजिटल संतुलन' अपनाना अनिवार्य है। समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी यह गोष्ठी एक प्रेरणा स्रोत बनी है कि कैसे वे अपने घरों में मोबाइल के उपयोग को नियंत्रित कर सकती हैं।
भविष्य की राह और निष्कर्ष
अखिल मारवाड़ी महिला समिति की यह पहल भीलवाड़ा शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। समिति का मानना है कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों से महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और वे समाज की मुख्यधारा में तकनीकी रूप से जागरूक होकर योगदान दे सकती हैं। कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि मोबाइल एक दोधारी तलवार की तरह है; यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो यह वरदान है, अन्यथा यह पारिवारिक रिश्तों की मिठास को खत्म कर सकता है। समिति ने भविष्य में भी इस प्रकार के समाज सुधारक कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया है ताकि भीलवाड़ा के हर घर में डिजिटल और पारिवारिक संतुलन बना रहे।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह रिपोर्ट अखिल मारवाड़ी महिला समिति भीलवाड़ा शाखा द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी के दौरान व्यक्त किए गए विचारों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मोबाइल के उपयोग से संबंधित स्वास्थ्य या मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए विशेषज्ञों की सलाह लेना आवश्यक है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल सामाजिक जागरूकता और सूचना प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी व्यक्तिगत या सामाजिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।