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जनता का जनादेश लूटा गया: कालीघाट बैठक में गरजीं ममता बनर्जी

विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कालीघाट में बैठक कर नेताओं को संगठन के पुनर्निर्माण का मंत्र दिया है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg सभा को संबोधित करती पूर्व मुख्मंत्री ममता बनर्जी

सभा को संबोधित करती पूर्व मुख्मंत्री ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को लंबे समय बाद एक बड़ा चुनावी झटका लगा है, जिसके बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस अप्रत्याशित हार के बाद पार्टी को आंतरिक असंतोष और दलबदल की आशंकाओं से बचाने के लिए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार को कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके निजी आवास पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण सांगठनिक समीक्षा बैठक बुलाई गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित हालिया चुनावों में उतरने वाले सभी विधानसभा उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पराजय के कारणों पर मंथन करना और निराश हो चुके कार्यकर्ताओं में नए सिरे से जोश भरना था।

बागी नेताओं को दो टूक: जाने वालों को कोई रोक नहीं

बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक और कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी के भीतर चल रही दलबदल की फुसफुसाहटों पर विराम लगा दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने असंतुष्ट और पाला बदलने की सोच रहे नेताओं को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग विपरीत परिस्थितियों में पार्टी का साथ छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना चाहते हैं, वे जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। ममता बनर्जी ने दृढ़तापूर्वक कहा कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और यदि आवश्यक हुआ, तो वह पूरी पार्टी का निर्माण बिल्कुल नए सिरे से करेंगी। उनका यह बयान उन नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है जो चुनावी हार के बाद अपनी राजनीतिक राह बदलने की फिराक में हैं।

क्षतिग्रस्त दफ्तरों को फिर से चालू करने का आह्वान

पार्टी कार्यकर्ताओं और वफादार नेताओं में ऊर्जा का संचार करने के लिए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने जमीनी स्तर पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी उम्मीदवारों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाएं और हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान क्षतिग्रस्त हुए पार्टी कार्यालयों को फिर से दुरुस्त करें। उन्होंने भावुक और संबलात्मक लहजे में कहा कि सभी बंद पड़े दफ्तरों को नया रंग-रोगन करके दोबारा खोला जाए। ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए यहाँ तक कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह स्वयं उन दफ्तरों को रंगने के लिए आगे आएंगी। उन्होंने साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस एक जन आंदोलन से उपजी पार्टी है, जो इस तरह के चुनावी झटकों से कभी हार नहीं मानेगी।

जनता के जनादेश की लूट का गंभीर आरोप

इस महत्वपूर्ण बैठक में ममता बनर्जी ने विरोधी दलों और चुनावी प्रबंधन पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने पराजय को स्वीकार करने के साथ ही विरोधियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस बार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हनन किया गया है। उनके शब्दों में, "इस चुनाव में जनता के वास्तविक जनादेश को सरेआम लूटा गया है।" टीएमसी प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से इस कठिन समय में एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि उनकी पार्टी ने हमेशा संघर्षों के दम पर वापसी की है। पराजय के इस दौर को पीछे छोड़ते हुए पार्टी एक बार फिर जनता के बीच जाकर उनका विश्वास जीतेगी और आगामी राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना करेगी।[1]

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह रिपोर्ट तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक बैठक के बाद पार्टी सूत्रों और विभिन्न राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों द्वारा जारी सूचनाओं पर आधारित है। चुनाव परिणामों और राजनीतिक बयानों के वैधानिक विश्लेषण के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के तथ्यों को ही अंतिम माना जाना चाहिए। प्रस्तुत लेख का उद्देश्य केवल राजनीतिक घटनाक्रम की जानकारी देना और जन-जागरूकता फैलाना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, राजनीतिक या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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