भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परिसर घोषित हुआ मंदिर
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने धार के विवादित भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी का मंदिर घोषित कर हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है।
भोजशाला मंदिर परिसर
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित सदियों पुराने ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने एक अत्यंत युगांतकारी और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस विवादित स्थल को स्पष्ट रूप से मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित कर दिया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अयोध्या के राम मंदिर मामले के बाद देश के किसी उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह दूसरा सबसे बड़ा और अंतिम निर्णय है। इस फैसले के आते ही हिंदू समुदाय और वर्षों से इसके लिए संघर्ष कर रहे संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है। न्यायालय ने अपने आदेश में पुरातत्व और इतिहास के साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए माना कि यह संपूर्ण परिसर मूल रूप से राजा भोज द्वारा निर्मित एक पवित्र मंदिर और संस्कृत अध्ययन का केंद्र था।
संघर्ष समिति की प्रतिक्रिया और भावुक क्षण
उच्च न्यायालय के इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक कुमार जैन ने अत्यंत भावुक शब्दों में अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय इस न्याय के लिए एक लंबी अवधि से निरंतर संघर्ष कर रहा था। इस आंदोलन के दौरान हमारे तीन भाइयों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, जिन्हें समाज हमेशा याद रखेगा। उनके बलिदान और अनगिनत राष्ट्रभक्तों के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज भोजशाला में मां सरस्वती के मंदिर के कपाट हमेशा के लिए खुल गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि फैसले के अगले ही दिन सुबह वह सबसे पहले परिसर में पहुंचे और आंदोलन से जुड़े अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर मां वाग्देवी की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य आरती और पूजा-अर्चना संपन्न की।
MP High Court declares Dhar Bhojshala a temple, grants Hindus Pooja rights, and directs ASI to take full control. Court observed it was originally a centre of Sanskrit education
— Vertigo_Warrior (@VertigoWarrior) May 15, 2026
It says government should consider separate land for a mosque if soughtpic.twitter.com/POd03V3MU1
कानूनी बिंदु और वर्ष 2003 के आदेश में संशोधन
हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रख्यात अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले के कानूनी पहलुओं को मीडिया के समक्ष विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि अदालत ने हमारे द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी तर्कों और पुरातात्विक साक्ष्यों को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा 7 अप्रैल, 2003 को जारी किए गए उस आदेश के विशेष हिस्से को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को इस परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने माना कि प्राचीन काल से ही इस स्थान पर हिंदू पूजा की निरंतरता बनी हुई थी, जिसे प्रशासनिक आदेशों द्वारा सीमित कर दिया गया था। अब इस स्थान पर केवल हिंदू रीति-रिवाज से नियमित पूजा और अनुष्ठान ही संचालित किए जा सकेंगे।
लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा लाने का निर्देश
इस ऐतिहासिक निर्णय का एक और अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती (वाग्देवी) की मूल प्रतिमा की वापसी से जुड़ा हुआ है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि उच्च न्यायालय ने भारत सरकार को निर्देश दिया है कि वह लंदन के संग्रहालय से इस प्राचीन और पवित्र प्रतिमा को वापस भारत लाने और उसे पुनः भोजशाला परिसर में स्थापित करने के लिए आवश्यक कूटनीतिक और कानूनी उपायों पर गंभीरता से विचार करे। इसके साथ ही, न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष के धार्मिक अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें यह स्वतंत्रता दी है कि वे धार क्षेत्र में नमाज अदा करने और नई मस्जिद के निर्माण के लिए सरकार के समक्ष वैकल्पिक भूमि के आवंटन हेतु एक अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं, जिस पर राज्य सरकार नियमानुसार विचार करेगी।[1]
एएसआई का नियंत्रण और संरक्षण की जिम्मेदारी
न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि यह संपूर्ण विवादित संपत्ति वर्ष 1951 में जारी की गई एएसआई की अधिसूचना के दायरे में आती है। भोजशाला परिसर को उस अधिसूचना की प्रविष्टि संख्या 90 के तहत सूचीबद्ध किया गया है और यह पूरा स्थल एएसआई अधिनियम, 1958 की धारा 16 के प्रावधानों द्वारा शासित होता है। इसलिए, इस ऐतिहासिक स्थल पर प्रशासनिक और संरक्षण संबंधी संपूर्ण नियंत्रण और आधिपत्य केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) का ही रहेगा। एएसआई के अधिवक्ता अविरल खारे ने इस पर कहा कि हालांकि निर्णय की विस्तृत प्रति का पूरी तरह से अध्ययन किया जा रहा है, लेकिन अदालत ने हमारी इस दलील को स्वीकार कर लिया है कि यह एक 'संरक्षित स्मारक' है। इस ऐतिहासिक धरोहर के समग्र विकास, रखरखाव और इसके मूल स्वरूप के संरक्षण की पूरी रूपरेखा एएसआई के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार ही तैयार की जाएगी ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे।
VIDEO | Indore: Madhya Pradesh High Court declares disputed area of Bhojshala Complex a temple.
— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2026
Aviral Khare, ASI advocate, said, “We do not have the complete copy of the judgment yet. Once the full copy of the judgment and the order arrives, we will read it and then explain the… pic.twitter.com/vlJKh0DcSi
सामाजिक सद्भाव और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस संवेदनशील और दूरगामी फैसले के मद्देनजर मध्य प्रदेश प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा धार जिले सहित पूरे राज्य में सुरक्षा के अत्यंत कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि क्षेत्र में शांति और सामाजिक सद्भाव का माहौल बिगड़ने न पाए। हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों के प्रबुद्ध नागरिकों ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। सामाजिक विचारकों का मानना है कि यह निर्णय वर्षों से चले आ रहे एक जटिल विवाद को कानूनी दायरे में सुलझाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। धार की जनता ने भी न्यायालय के इस विधिक निर्णय का सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे को बनाए रखने का संकल्प दोहराया है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ द्वारा धार भोजशाला मामले में दिए गए निर्णय, अधिवक्ताओं के बयानों और विभिन्न राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक तथ्यों पर आधारित है। इस संवेदनशील और ऐतिहासिक विषय से जुड़े किसी भी कानूनी या वैधानिक संदर्भ के लिए न्यायालय के मूल निर्णय की प्रति को ही अंतिम और प्रामाणिक माना जाना चाहिए। इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल पाठकों को समसामयिक और विधिक घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, सामाजिक या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
VIDEO | Dhar, Madhya Pradesh: On the state High Court declaring the disputed Bhojshala complex as a temple, Bhoj Utsav Samiti Sanrakshak, Ashok Kumar Jain says, "We have never been more happier than we were yesterday. Hindu community was struggling for a long time and three of… pic.twitter.com/wR5TDDf7HV
— Press Trust of India (@PTI_News) May 16, 2026