ज्येष्ठ अमावस्या पर उमड़ा जनसैलाब: श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान
ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में देश भर से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और पितृ तर्पण किया।
ज्येष्ठ अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान
ज्येष्ठ अमावस्या के पावन और आध्यात्मिक अवसर पर उत्तराखंड की पवित्र धर्मनगरी हरिद्वार में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह के तड़के से ही मुख्य घाटों, विशेषकर हर की पौड़ी पर भक्तों की भारी भीड़ जमा होने लगी थी। ब्रह्ममुहूर्त के समय से ही चारों ओर वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की गूंज और मां गंगा के जयकारों से पूरा वातावरण पूरी तरह गुंजायमान हो उठा। इस विशेष तिथि पर लाखों की संख्या में भक्तों ने पतित पावनी गंगा नदी के शीतल जल में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई और अपने परिवार की सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि घाटों पर आने वाले किसी भी तीर्थयात्री को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
ज्येष्ठ अमावस्या का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
सनातन हिंदू धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस विशेष दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों का शमन हो जाता है और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त, इस पावन तिथि को शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के रूप में भी पूरे देश में बहुत ही श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने से कुंडली के अनेक दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि इस पावन दिन पर गंगा तटों पर स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
पितृ तर्पण और पूर्वजों की आत्मिक शांति के अनुष्ठान
ज्येष्ठ अमावस्या का यह पावन दिन मुख्य रूप से अपने पितरों, पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं की पूजा-अर्चना और उनकी आत्मिक शांति के लिए पूरी तरह समर्पित माना जाता है। गंगा स्नान संपन्न करने के उपरांत, हजारों श्रद्धालुओं ने घाटों पर बैठकर अपने पुरखों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और विशेष श्राद्ध कर्म के अनुष्ठान पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न किए। ऐसी दृढ़ धार्मिक मान्यता है कि इस अमावस्या तिथि पर किए गए तर्पण से हमारे पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और दीर्घायु होने का मंगलमय आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितृदोष से पीड़ित लोगों के लिए इस दिन गंगा जल से किया गया तर्पण और दान-पुण्य विशेष रूप से फलदायी और कष्ट निवारक माना गया है।
दान-पुण्य की महिमा और घाटों का विहंगम दृश्य
धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ियों को पूरा करते हुए, गंगा स्नान और पितृ तर्पण के बाद श्रद्धालुओं ने घाटों के किनारे बैठे जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, जल के पात्र और धन का खुले मन से दान किया। इस दिन किए गए दान का शास्त्रों में विशेष विधिक महत्व बताया गया है। दोपहर ढलने तक हरिद्वार के विभिन्न प्रमुख घाटों जैसे सुभाष घाट, मालवीय घाट और वीआईपी घाट पर श्रद्धालुओं का तांता निरंतर लगा रहा। गंगा की लहरों पर तैरते हुए अनगिनत रंग-बिरंगे दीये और फूलों के दोने पूरी धर्मनगरी के विहंगम दृश्य को और भी अलौकिक तथा मनोहारी बना रहे थे। यह पावन पर्व भारतीय संस्कृति की अटूट आस्था और पूर्वजों के प्रति सम्मान की महान परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर गया।[1]
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह समाचार रिपोर्ट हरिद्वार से प्राप्त प्राथमिक विजुअल्स, स्थानीय धार्मिक मान्यताओं, सनातन पंचांग की जानकारियों और मीडिया सोर्सेज द्वारा उपलब्ध कराए गए विधिक व सामाजिक तथ्यों पर पूरी तरह आधारित है। इस पर्व से जुड़े विभिन्न अनुष्ठानों के व्यक्तिगत या विधिक फल अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल जनहित में सूचनात्मक और सांस्कृतिक घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, सामाजिक या धार्मिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
VIDEO | Haridwar, Uttarakhand: Devotees take holy dip in the river Ganga on Jyeshtha Amavasya. The day is considered auspicious, which is dedicated to worship ancestors or forefathers.
— Press Trust of India (@PTI_News) May 16, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/2MOK1lKq1M