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विभाग का बड़ा फैसला: खतरनाक संक्रामक रोग घोषित हुआ हंतावायरस

जन स्वास्थ्य मंत्रालय ने हंटावायरस को खतरनाक संक्रामक रोग घोषित करते हुए संदिग्ध मामलों की तुरंत रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

वैश्विक स्तर पर जन स्वास्थ्य और मानवीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरे एक नए घातक वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत और विधिक फैसला लिया है। सरकार ने इस जानलेवा बीमारी की गंभीरता और इसके तेजी से फैलने की आंतरिक क्षमता को देखते हुए इसे आधिकारिक तौर पर खतरनाक संक्रामक रोग की श्रेणी में विधिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। मंत्रालय द्वारा जारी नए विधिक आदेश के तहत अब देश के सभी चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए किसी भी संदिग्ध मामले के सामने आने के महज कुछ ही घंटों के भीतर उसकी आधिकारिक रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि संदिग्ध रोगियों के संपर्क में आए उच्च जोखिम वाले सभी नागरिकों को एक निश्चित अवधि के अनिवार्य और बेहद कड़े पृथकवास चक्र से विधिक रूप से गुजरना होगा, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को समय रहते पूरी तरह तोड़ा जा सके।

श्वसन तंत्र को भारी नुकसान और इंसानों से इंसानों में फैलने का गंभीर खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय तकनीकी टीम और चिकित्सा मूल्यांकन रिपोर्ट के बाद ही सरकार ने इस वायरस को खतरनाक बीमारियों की विधिक सूची में शामिल करने का अंतिम निर्णय लिया है। विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद मुख्य रूप से श्वसन तंत्र और गुर्दे को बहुत गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे मरीज को सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होने लगती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने आधिकारिक विधिक वक्तव्य में इस खतरे को स्पष्ट करते हुए कहा है कि, “यह संक्रमण जो मुख्य रूप से श्वसन तंत्र की बूंदों के माध्यम से वायु मार्ग से फैल सकता है, और इसके कुछ विशिष्ट रूप इंसानों से इंसानों के बीच भी सीधे प्रसारित होने की विधिक क्षमता रखते हैं, अब एक बड़े वैश्विक संकट और गंभीर खतरे के रूप में उभरा है, जिसके कारण इसे इस विशेष श्रेणी में नामित करना विधिक रूप से अत्यंत आवश्यक हो गया था।”

देश भर के चिकित्सालयों में विशेष एक्शन प्लान और निगरानी व्यवस्था लागू

इस जानलेवा बीमारी से निपटने और त्वरित समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक बेहद उन्नत और उच्च स्तरीय एक्शन प्लान को जमीनी स्तर पर विधिक रूप से लागू कर रहा है। इस विशेष कार्ययोजना के अंतर्गत मुख्य रूप से व्यापक रोग निगरानी, उन्नत प्रयोगशाला परीक्षण, त्वरित चिकित्सा उपचार और स्थानीय स्तर पर कड़े विधिक नियमों के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुख्य सचिव ने इस प्रशासनिक तैयारी की विधिक रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रवेश बिंदुओं यानी हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग और निगरानी को कई गुना बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही रोग नियंत्रण विभाग घरेलू स्तर पर सामने आने वाले मामलों के लिए विधिक जांच प्रोटोकॉल और संदिग्ध मरीजों की परिभाषा को पूरी तरह अंतिम रूप देने में जुटा है, ताकि देश के भीतर संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

ग्रामीण अंचलों में संक्रमण का अधिक प्रभाव और त्वरित जांच की विधिक अपील

मुख्य सचिव ने देश भर के सभी प्रांतीय स्वास्थ्य कार्यालयों और सरकारी अस्पतालों को हर समय हाई अलर्ट पर रहने के कड़े विधिक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आधिकारिक मंच से सभी चिकित्सा प्रणालियों को आगाह करते हुए कहा कि, “सभी प्रांतीय स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों को देश भर में कड़ी निगरानी बनाए रखने का विधिक जिम्मा सौंपा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी स्वास्थ्य सुविधाएं संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट तय समय के भीतर करें, उपचार के पुराने तौर-तरीकों की समीक्षा करें और स्थानीय आबादी को इस बीमारी के खतरों के प्रति तुरंत जागरूक करें।” चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यह मूल रूप से चूहों और अन्य छोटे जीवों द्वारा फैलने वाला एक खतरनाक वायरस समूह है। इंसान आमतौर पर इन संक्रमित जीवों के मल-मूत्र, लार या दूषित सतहों के सीधे संपर्क में आने से बीमार होते हैं। ग्रामीण इलाकों, जंगलों और खेतों में इसका जोखिम बहुत अधिक होता है। अधिकारियों ने अपील की है कि जीवों के संपर्क में आए किसी भी व्यक्ति को तेज बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने पर वे बिना देरी किए तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाकर अपनी विधिक जांच करवाएं।[1]

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक विधिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित समाचार सोर्सेज द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। इस विषय से जुड़े किसी भी प्रकार के वैधानिक संदर्भ, तकनीकी आंकड़ों या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी मूल विधिक रिपोर्ट को ही अंतिम और प्रामाणिक माना जाना चाहिए। इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल जनहित में निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, सामाजिक या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief