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प्रादेशिक

मारवाड़ के चांचोड़ी गांव में दहशत का अंत: पिंजरे में फंसा पैंथर

पाली के रानी उपखंड के चांचोड़ी ग्राम में पिछले चार दिनों से आतंक मचाने वाला खूंखार पैंथर आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
पिंजरे में कैद पैंथर

पिंजरे में कैद पैंथर

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पाली (शिंभु सिंह शेखावत)। राजस्थान के पाली जिले के मारवाड़ क्षेत्र के तहत आने वाले रानी उपखंड के चांचोड़ी ग्राम में पिछले कई दिनों से बना हुआ भारी डर और तनाव का माहौल अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। इस ग्रामीण इलाके में वन्यजीवों की आबादी क्षेत्र में बढ़ती पैठ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इस रानी उपखंड के चांचोड़ी ग्राम से सटी हुई ऊंची पहाड़ी और पथरीले रास्तों के आसपास पिछले करीब चार दिनों से एक बड़े खूंखार पैंथर की लगातार आवाजाही देखी जा रही थी, जिससे पूरा इलाका सहमा हुआ था।

मवेशियों का शिकार

पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर यह हिंसक तेंदुआ लगातार भोजन की तलाश में आबादी बस्तियों और खेतों की तरफ रुख कर रहा था। इस दौरान इस खूंखार पैंथर ने ग्रामीणों के कई पालतू गौवंश और छोटे पिल्लों को अपना शिकार बनाया था।

इन हिंसक और लगातार हो रही घटनाओं के बाद से पूरे चांचोड़ी गांव में भारी दहशत का माहौल व्याप्त था। शाम ढलते ही डर के मारे लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना बिल्कुल मुश्किल हो गया था। किसानों ने भी खेतों की तरफ अकेले जाना पूरी तरह बंद कर दिया था।

पिंजरे का जाल

इस विकट और जानलेवा हालात को देखते हुए डरे हुए ग्रामीणों ने तुरंत इसकी लिखित और दूरभाष पर सूचना क्षेत्रीय वन विभाग के उच्चाधिकारियों को दी। इस गंभीर मामले की गंभीरता को समझते हुए देसूरी से वन विभाग की एक विशेष रेस्क्यू टीम आधुनिक संसाधनों के साथ तुरंत मौके पर पहुंची।

वन्यजीव विशेषज्ञों ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पैंथर को सुरक्षित पकड़ने के लिए पहाड़ी क्षेत्र के सबसे सक्रिय रास्ते पर एक मजबूत लोहे का पिंजरा लगाया। पैंथर को आकर्षित करने के लिए पिंजरे के भीतर एक बकरी को रणनीतिक रूप से बांधा गया था।

आधी रात कैद

वन विभाग की यह अनूठी और पारंपरिक जुगत पूरी तरह से काम कर गई। बीती रात करीब दो बजे के समय शिकार की तलाश में पहाड़ी से नीचे उतरा पैंथर उस बकरी को अपना आसान भोजन समझकर जैसे ही पिंजरे के भीतर घुसा, वैसे ही पिंजरे का मुख्य दरवाजा ऑटोमेटिक विधा से झटके के साथ बंद हो गया और वह अंदर कैद हो गया।

सुबह होते ही जैसे ही ग्रामीणों को पैंथर के पिंजरे में पकड़े जाने की भनक लगी, वैसे ही उस खूंखार तेंदुए को करीब से देखने के लिए मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

सुरक्षित रेस्क्यू

तेंदुए के पकड़े जाने की आधिकारिक सूचना मिलते ही बिजोवा नाका के वनपाल चुन्नीलाल देवासी अपनी पूरी रेस्क्यू टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।

वनपाल चुन्नीलाल देवासी ने सफलता की जानकारी देते हुए अपने आधिकारिक बयान में कहा कि, “हमारी टीम ने बेहद सुरक्षित तरीके से पैंथर का सफल रेस्क्यू कर लिया है और उसे अग्रिम जांच के लिए देसूरी ले जाया गया है, जहाँ वन्यजीव चिकित्सकों की देखरेख में सबसे पहले पैंथर का गहन मेडिकल परीक्षण किया जाएगा।” इस बयान के बाद ग्रामीणों ने राहत जताई।

अभ्यारण्य में विदाई

वन विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए तेंदुए की उम्र और स्वास्थ्य मानकों की जांच करना बेहद आवश्यक है ताकि वन्यजीव कानून का पूरी तरह पालन हो सके।

रेस्क्यू दल के मुख्य वन अधिकारियों ने आगामी योजना स्पष्ट करते हुए अंतिम पैराग्राफ में मीडिया को बताया कि, “इस तेंदुए के पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने पर उसे अरावली की सुरक्षित पर्वत श्रृंखलाओं के घने वन्यजीव अभयारण्य में पूरी तरह स्वतंत्र छोड़ दिया जाएगा।” इस सफल रेस्क्यू के बाद रानी उपखंड के चांचोड़ी ग्राम के पहाड़ी के आसपास निवास करने वाले सभी असहाय ग्रामीणों ने चैन की लंबी सांस ली है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित सोर्सेज से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। किसी भी वैधानिक संदर्भ या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग की मूल रिपोर्ट को ही प्रामाणिक माना जाना चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief