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कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में थम नहीं रहा मौत का यह सिलसिला

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संदिग्ध हालात में महिलाओं की मौत थमने का नाम नहीं ले रही है, यहाँ अब तक 5 प्रसूताएं जान गंवा चुकी हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

राजस्थान की कोचिंग सिटी कहे जाने वाले शहर से चिकित्सा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आ रही है। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव और अन्य स्त्री रोग संबंधी ऑपरेशनों के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का खौफनाक दौर जारी है। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान संदिग्ध और रहस्यमयी परिस्थितियों में एक और गंभीर महिला मरीज ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया है। इस ताज़ा दुःखद घटना के बाद इस पूरे संदिग्ध चिकित्सा घटनाक्रम में असमय अपनी जान गंवाने वाली प्रसूताओं की कुल संख्या बढ़कर अब 5 हो गई है।

माइनर ऑपरेशन

यह पूरी हृदय विदारक घटना कोटा के शिवपुरा क्षेत्र की रहने वाली शिरीन नामक महिला से जुड़ी हुई है, जिसकी शनिवार को तड़के दर्दनाक मौत हो गई। प्राप्त प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, मृतका शिरीन 5 महीने की गर्भवती थी और आगामी प्रसव से संबंधित रूटीन परामर्श के लिए अपनी नियमित जांच कराने चिकित्सालय पहुंची थी।

वहां मौजूद ड्यूटी डॉक्टरों ने शिरीन की जांच करने के बाद परिजनों को बच्चेदानी का एक छोटा सा माइनर ऑपरेशन करने की गंभीर सलाह दी थी। परिजनों की लिखित सहमति मिलने के तुरंत बाद स्त्री रोग विशेषज्ञों ने यह ऑपरेशन थियेटर में संपन्न कर दिया था।

अचानक बिगड़ी तबीयत

इस कथित छोटे ऑपरेशन के ठीक बाद शिरीन की शारीरिक स्थिति अचानक बेहद असामान्य होने लगी। डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन टेबल से वार्ड में शिफ्ट करते ही उसका ब्लड प्रेशर (बीपी) बहुत तेजी से नीचे गिर गया।

हालत नियंत्रण से बाहर होती देख अस्पताल प्रशासन ने कथित तौर पर परिजनों पर उसे किसी निजी वेंटिलेटर युक्त अस्पताल में ले जाने का गुप्त दबाव बनाना शुरू कर दिया। निजी वेंटिलेटर केंद्र में इलाज और महंगी दवाइयों का भारी-भरकम खर्च उठाने में यह गरीब परिवार पूरी तरह असमर्थ था, जिससे वे उसे दोबारा गंभीर हालत में इसी सरकारी परिसर में वापस ले आए।

लापरवाही का आरोप

अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में दोबारा भर्ती किए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर इस गर्भवती महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की असमय मृत्यु के बाद कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और उन्होंने वार्ड के बाहर जमकर हंगामा किया।

मृतका के सगे चाचा ने ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ पर घोर चिकित्सीय लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने मीडिया के समक्ष रोते हुए कहा कि, “6 मई को एक छोटे से ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की लापरवाही से बीपी गिरा और हालत बिगड़ने पर हमें निजी अस्पताल रेफर कर डराया गया था।”

पुलिस की मौजूदगी

अस्पताल परिसर में बढ़ते तनाव और हंगामे की भनक लगते ही स्थानीय महावीर नगर थाना पुलिस की एक विशेष टीम भारी जाब्ते के साथ तुरंत मौके पर पहुँची। पुलिस अधिकारियों ने गुस्साए परिजनों को शांत कराया।

हालांकि, पीड़ित परिवार ने मृतका के शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों की विधिक टीम ने परिजनों से पोस्टमार्टम नहीं करवाने की एक लिखित सहमति ली और बिना किसी चीर-फाड़ के शव को अंतिम संस्कार के लिए सीधे उनके सुपुर्द कर दिया, जिसके बाद वे शव घर ले गए।[1]

जांच के आदेश

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में और जेके लोन मातृ शिशु चिकित्सालय में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद इंफेक्शन फैलने से अब तक कुल 5 महिलाओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 5 अन्य महिलाओं का आईसीयू में गहन इलाज जारी है।

इस पूरे गंभीर मामले में अब तक केवल 2 महिलाओं की सेहत में सुधार होने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई है। राज्य सरकार ने चिकित्सा विभाग की एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है, जो इस बात का पता लगा रही है कि ऑपरेशन थियेटर के भीतर इस्तेमाल होने वाली दवाओं या एनेस्थीसिया के इंजेक्शन में कोई दूषित तत्व तो मौजूद नहीं था। इस घटना से पूरे हाड़ौती क्षेत्र में भारी दहशत है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित सोर्सेज से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। किसी भी वैधानिक संदर्भ या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग की मूल रिपोर्ट को ही प्रामाणिक माना जाना चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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