WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार

भीलवाड़ा के श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में रविवार से पवित्र अधिक मास के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान और महाआरती का आयोजन किया गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। राजस्थान के भीलवाड़ा शहर के हृदय स्थल भोपालगंज में स्थित अत्यंत प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में रविवार से पवित्र अधिक मास (जिसे हिंदू धर्म ग्रंथों में पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) का परम श्रद्धा, अटूट विश्वास और अपार हर्षोल्लास के साथ विधिवत आगाज हो गया है। इस अत्यंत पावन महीने के पावन शुभारंभ के विशेष अवसर पर वैष्णव संप्रदाय के इस प्रमुख मंदिर में कई तरह के विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इन आयोजनों के चलते रविवार अलसुबह से ही स्थानीय श्रद्धालुओं का एक बड़ा तांता मंदिर परिसर में लगातार लगा रहा।

भव्य महाअभिषेक

सनातन धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तीन साल में एक बार आने वाला अधिक मास भगवान विष्णु की आराधना के लिए सर्वोपरि माना गया है।

इसी धार्मिक महत्ता को देखते हुए श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में अधिक मास के प्रथम दिन रविवार को सुबह ठीक 5 बजे से ही पूरा गर्भगृह शंखनाद और वैदिक ध्वनियों से गूंज उठा। मंदिर के मुख्य सेवादार और प्रधान पुजारी विष्णु प्रकाश ने बताया कि इस पावन तिथि पर विद्वान वैदिक पंडितों के सानिध्य में सस्वर मंत्रोच्चार के बीच भगवान लक्ष्मी और नारायण का दो बार अत्यंत भव्य पंचामृत अभिषेक संपन्न किया गया।

नयनाभिराम श्रृंगार

इस पवित्र स्नान के बाद ठाकुर जी की प्रतिमाओं को शुद्ध गंगाजल से पवित्र कर विशेष राजसी वस्त्र पहनाए गए। मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी और मुख्य ट्रस्टी ओम प्रकाश अग्रवाल ने इस अनूठे धार्मिक अनुष्ठान के बारे में आगे की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि, “अभिषेक की मुख्य प्रक्रिया के पूर्ण होने के ठीक पश्चात भगवान को नई और नयनाभिराम जरी की विशेष पोशाक धारण कराई गईं तथा स्वर्ण आभूषणों से उनका बेहद दिव्य और अलौकिक श्रृंगार संपन्न किया गया।”

शीतल भोग

भीषण गर्मी के वर्तमान मौसम को देखते हुए देव प्रतिमाओं के खान-पान और सेवा पद्धति में भी मंदिर प्रबंधन द्वारा कुछ आवश्यक और ऋतु अनुकूल बदलाव किए गए हैं।

ट्रस्टी ओम प्रकाश अग्रवाल ने भोग व्यवस्था के बारे में बताया कि, “ठाकुर जी को नयनाभिराम वस्त्र धारण कराने के बाद विशेष रूप से तैयार किए गए शीतल व्यंजनों, मौसमी फलों, माखन-मिश्री और विशेष ठंडाई का भोग मुख्य रूप से अर्पित किया गया।” इस दौरान मंदिर परिसर प्रभु के जयकारों से लगातार गुंजायमान रहा, जिससे संपूर्ण वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

महाआरती का आयोजन

भोग अर्पण की यह मुख्य विधा संपन्न होने के तुरंत बाद मुख्य गर्भगृह में पूर्ण विधि-विधान और शुद्ध घी के दीपकों के साथ भगवान की महाआरती उतारी गई।

इस दौरान श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में मौजूद सैकड़ों महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने एक सुर में आरती गाकर क्षेत्र की खुशहाली और सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। महाआरती की समाप्ति के बाद कतार में खड़े सभी दर्शनार्थियों के बीच मंदिर समिति की तरफ से शीतल चरणामृत और विशेष मोदक के महाप्रसाद का वितरण विधिक रूप से किया गया।

पूरे माह आयोजन

धार्मिक ट्रस्ट के अनुसार, यह विशेष पुरुषोत्तम मास का आयोजन पूरे एक महीने तक बिना किसी व्यवधान के निरंतर चलता रहेगा।

आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए अंतिम पैराग्राफ में मंदिर के प्रधान पुजारी विष्णु प्रकाश ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि, “इस पूरे महीने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में प्रतिदिन शाम को संगीतमय सुंदरकांड पाठ, विशेष छप्पन भोग की झांकी और नानी बाई का मायरा जैसी कई कथाओं का आयोजन होगा।” इसके लिए मंदिर परिसर में छाया और ठंडे पानी के विशेष टेंट भी लगाए गए हैं ताकि भक्तों को कोई परेशानी न हो।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित सोर्सेज से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। किसी भी वैधानिक संदर्भ या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग की मूल रिपोर्ट को ही प्रामाणिक माना जाना चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief