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प्रादेशिक

श्री महाकालेश्वर मंदिर में चंद्रमा और रुद्राक्ष से हुआ भव्य श्रृंगार

श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ अधिकमास के सोमवार को तड़के चार बजे बाबा महाकाल की विश्व प्रसिद्ध दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया।

By अजय त्यागी
1 min read
चन्द्र और रुद्राक्ष से बाबा का श्रृंगार

चन्द्र और रुद्राक्ष से बाबा का श्रृंगार

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धार्मिक नगरी उज्जैन में सोमवार सुबह ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर एक अद्भुत और अलौकिक आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दक्षिणमुखी भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में अलसुबह होने से पहले ही देश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्त भोर होने से पहले ही लंबी-लंबी कतारों में लगकर बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन पाने के लिए उत्सुक दिखे। जैसे ही पट खुले, पूरा भव्य मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" और "हर-हर महादेव" के गगनभेदी जयघोष से पूरी तरह गूंज उठा।

महाकाल के पट

सनातन परंपरा के अनुसार सिंहस्थ नगरी में बाबा महाकाल की भस्म आरती का समय अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है।

इस अलौकिक परंपरा की जानकारी साझा करते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर में सेवारत वरिष्ठ पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि सोमवार सुबह ठीक 4:00 बजे विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती की दिव्य शुरुआत हुई थी। उन्होंने बताया कि भोर की बेला में सबसे पहले वीरभद्र जी से विधिक आज्ञा लेकर मंदिर के मुख्य पट खोले गए। इसके ठीक बाद गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन-अर्चन शुरू हुआ।

पंचामृत से स्नान

पट खुलने के तुरंत बाद स्वयंभू ज्योतिर्लिंग के शुद्धिकरण और जलाभिषेक की मुख्य दिव्य प्रक्रिया शुरू की गई।

पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्थापित भगवान महाकाल का जलाभिषेक गाय के शुद्ध दूध, दही, घी, शक्कर, शहद यानी पंचामृत और विभिन्न मौसमी फलों के ताजे रस से पूरी श्रद्धा के साथ किया गया। महान धार्मिक पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर "हरि ओम" का जल अर्पित किया गया, जिससे गर्भगृह की तरंगें अत्यंत सकारात्मक और ऊर्जावान हो गईं।

अलौकिक श्रृंगार

जलाभिषेक और शुद्धोधक स्नान के पश्चात बाबा के विग्रह को सुखाकर उनका राजाधिराज स्वरूप में विशेष रूप से दिव्य श्रृंगार किया गया।

इसके अंतर्गत गर्भगृह के मुख्य पुजारियों और पुरोहितों ने मिलकर बाबा महाकाल का भांग, चंदन, अबीर और सूखे मेवों से अत्यंत भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया। विशेष कपूर आरती संपन्न होने के बाद गर्भगृह की पारंपरिक मर्यादा के अनुसार ज्योतिर्लिंग रूप में प्रतिष्ठित बाबा महाकाल को चांदी का नवीन चमचमाता मुकुट धारण कराया गया।

रुद्राक्ष की माला

आज सोमवार के पावन अवसर पर किए गए विशेष श्रृंगार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बाबा का स्वरूप भक्तों को बहुत भाया।

बाबा महाकाल के मस्तक पर विशेष रूप से आकर्षक चंद्रमा लगाया गया और उन्हें दुर्लभ रुद्राक्ष की बड़ी मालाओं से अलंकृत किया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा का यह दिव्य और आकर्षक स्वरूप सुबह से ही श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। इसके तुरंत बाद महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा भगवान महाकाल के दिव्य शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई।

साकार स्वरूप दर्शन

भस्मार्पण के दौरान गर्भगृह के भीतर और बाहर झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच यह विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती पूर्ण आनंद के साथ संपन्न हुई।

धार्मिक ग्रंथों में ऐसी अटूट मान्यता है कि शिवलिंग पर भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में आकर भक्तों को सीधे दर्शन देते हैं। यही मुख्य वजह है कि देशभर से शिव भक्त बाबा महाकाल की भस्म आरती का साक्षी बनने उज्जैन पहुंचते हैं। सोमवार के पुनीत दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर सभी भक्तों ने स्वयं को अत्यंत धन्य महसूस किया।(1)

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित सोर्सेज से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। किसी भी वैधानिक संदर्भ या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग की मूल रिपोर्ट को ही प्रामाणिक माना जाना चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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