WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
राष्ट्रीय

चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रहीं मौतें, स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट

चारधाम यात्रा में अब तक पचपन श्रद्धालुओं की मौत होने से चिंतित स्वास्थ्य विभाग ने बीमार यात्रियों के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust

उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में चल रही विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा में पिछले कुछ दिनों से अप्रत्याशित रूप से श्रद्धालुओं की मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा है। चारधाम यात्रा में महज शुरुआती उनतीस दिनों के भीतर ही पचपन श्रद्धालुओं की दुखद मौत होने से उत्तराखंड राज्य का स्वास्थ्य विभाग बेहद गंभीर चिंता में डूब गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से प्राप्त ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन सभी श्रद्धालुओं की मौत का मुख्य कारण अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) और गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हैं।

केदारनाथ मार्ग पर मौतें

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे ज्यादा मौतें केदारनाथ पैदल मार्ग पर दर्ज हुई हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, कुल पचपन मौतों में से सबसे अधिक तीस मौतें अकेले बाबा केदारनाथ धाम के दुर्गम तीर्थयात्रा मार्ग पर हुई हैं। इसके अतिरिक्त, बद्रीनाथ धाम मार्ग पर दस, पवित्र यमुनोत्री धाम मार्ग पर आठ और गंगोत्री धाम मार्ग पर सात श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई है। बीते रविवार को भी केदारनाथ पैदल मार्ग पर चढ़ाई के दौरान दो और यात्रियों ने दम तोड़ दिया।[1]

स्वास्थ्य मंत्री का बयान

इस संवेदनशील स्थिति पर उत्तराखंड के कैबिनेट स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए विभाग को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, “तीर्थयात्रियों की बढ़ती मृत्यु दर को रोकने के लिए इस पूरे मामले पर बेहद गंभीरता से विचार किया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले ही विभाग ने विभिन्न भाषाओं में स्वास्थ्य परामर्श (हेल्थ एडवाइजरी) जारी किए थे, जिसमें हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या मधुमेह से पीड़ित मरीजों को पूरी जांच के बाद ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई थी।

श्रद्धालुओं का भारी हुजूम

राज्य में लगातार हो रही तेज बारिश और ऊंची चोटियों पर बर्फबारी जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं का हुजूम थमता नजर नहीं आ रहा है।

अब तक कुल पंद्रह लाख तिरसठ हजार छह सौ बहत्तर श्रद्धालु चारों प्रमुख धामों के दर्शन कर चुके हैं। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले इस आंकड़े के लगभग ढाई करोड़ तक पहुंच जाने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण स्वास्थ्य ढांचे और तैनात किए गए मेडिकल स्टाफ पर भी काफी दबाव देखा जा रहा है।

रुद्रनाथ के कपाट खुले

इसी बीच, चमोली जिले में स्थित पंच केदार के चौथे केदार के रूप में पूजे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध रुद्रनाथ मंदिर के कपाट भी खोल दिए गए हैं।

सोमवार सुबह वैदिक विधि-विधान, मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर के गर्भगृह के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस पावन और भव्य आध्यात्मिक अवसर का साक्षी बनने के लिए देश भर से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय निवासी वहां उपस्थित थे। कपाट खुलते ही पूरी हिमालयी घाटी "हर हर महादेव" और "जय बाबा रुद्रनाथ" के नारों से गूंज उठी।

एकानन स्वरूप की पूजा

पवित्र रुद्रनाथ मंदिर का पंच केदार तीर्थस्थलों में एक अत्यंत विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है, जहां महादेव के मुख की पूजा होती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के इस रूप को 'एकानन स्वरूप' कहा जाता है। राजसी हिमालयी चोटियों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी अटूट आध्यात्मिक महत्ता, लुभावनी प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी आभा के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही अब अगले छह महीनों तक बाबा रुद्रनाथ की नियमित पूजा-अर्चना और विशेष धार्मिक अनुष्ठान अनवरत जारी रहेंगे।

कठिन है पैदल ट्रैक

रुद्रनाथ की यह पवित्र वार्षिक तीर्थयात्रा उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और घने अल्पाइन जंगलों के बीच से होकर गुजरने वाले अपने बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण पैदल ट्रैक के लिए जानी जाती है।

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता, साहसिक ट्रेकिंग और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडव भाइयों ने ही इन पंच केदार मंदिरों की स्थापना की थी। बहरहाल, चारधाम यात्रा में सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रबंधन को अब और अधिक कड़ा किया जा रहा है ताकि बाबा के दर पर आने वाले किसी भी भक्त को अपनी जान न गंवानी पड़े।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों, स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक एडवाइजरी और चारधाम यात्रा के प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक ऊंचाई पर यात्रा करने के अपने स्वास्थ्य जोखिम होते हैं। किसी भी पुरानी बीमारी से पीड़ित यात्रियों को यात्रा पर निकलने से पहले डॉक्टरी सलाह अवश्य लेनी चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर पाठकों द्वारा लिए जाने वाले किसी भी व्यक्तिगत स्वास्थ्य या यात्रा संबंधी निर्णयों के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source