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राजस्थान में राज्य कर्मचारियों ने भरी हुंकार, कार्य बहिष्कार तय

राजस्थान में राज्य कर्मचारियों की लंबित 25 सूत्री मांगों को लेकर महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन और पूर्ण कार्य बहिष्कार की घोषणा की है।

By अजय त्यागी
1 min read
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बैठक में आन्दोलन की रणनीति पर चर्चा

राजस्थान में राज्य कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित और न्यायोचित मांगों पर अपनाए जा रहे उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने अब पूरी तरह से आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है। इसी सिलसिले में आज राजधानी जयपुर के गवर्नमेंट प्रेस कार्यालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन प्रदेश स्तरीय महाबैठक का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार के कर्मचारी विरोधी रवैये के खिलाफ और कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की गई। राजस्थान में राज्य कर्मचारियों का यह आक्रोश आने वाले दिनों में सचिवालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

वित्तीय लाभों पर गुस्सा

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया की इस बैठक में विभिन्न संवर्गों की लंबित मांगों पर विस्तृत मंथन किया गया है।

बैठक के दौरान राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) को बीमा कंपनी को नहीं देकर पूर्व की भांति समस्त अनुमोदित अस्पतालों में ओपीडी एवं आईपीडी तथा दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सरेंडर लीव (समर्पित अवकाश) का नकद भुगतान तुरंत जारी करने, बजट घोषणा के अनुरूप पदोन्नति में अनुभव एवं सेवा अवधि में 2 वर्ष की छूट, संविदाकर्मियों एवं ठेका कर्मचारियों के अविलंब नियमितीकरण सहित लंबित 25 सूत्री मांगपत्र जैसे संवेदनशील वित्तीय लाभों को लेकर एवं चिकित्सा मंत्री द्वारा आरजीएचएस को बीमा कंपनी को देने के बयान पर कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा।

सब्र का बांध टूटा

बैठक में मौजूद समस्त पदाधिकारियों ने एक सुर में सरकार को चेतावनी दी कि कर्मचारियों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है और अब केवल कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि विभिन्न विभागों जैसे राजस्व, शिक्षा, चिकित्सा और तकनीकी संवर्गों में पदोन्नति की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। इसके अलावा, महंगाई भत्ते की बकाया किस्तों और सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने में भी सरकार लगातार आनाकानी कर रही है, जिससे राज्य के करीब आठ लाख से अधिक नियमित और संविदा कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष पैदा हो गया है।

आंदोलन की रूपरेखा

महासंघ (एकीकृत) ने सरकार के ध्यानाकर्षक हेतु चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन की घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि कल, यानी 19 मई को महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में माननीय मुख्यमंत्री के नाम मुख्य सचिव महोदय को अंतिम चेतावनी ज्ञापन सौंपा जाएगा।

इसके तुरंत बाद, 20 मई से राज्य के सभी जिलों में मोर्चा खोलते हुए समस्त जिला अध्यक्षों द्वारा जिला कलेक्टर, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों (HOD) तथा कार्यालय अध्यक्षों के माध्यम से मुख्यमंत्री को चेतावनी ज्ञापन भिजवाए जाएंगे। यदि इसके बावजूद भी सरकार की नींद नहीं खुली, तो आगामी 25 मई से 30 मई तक पूरे राजस्थान के कर्मचारी हर दिन दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे तक पूर्ण रूप से कार्य का बहिष्कार करेगे।

कर्मचारी जागृति यात्रा

महासंघ ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि इस ऐतिहासिक कार्य बहिष्कार के बाद भी यदि दमनकारी नीतियां नहीं बदली गईं, तो पूरे प्रदेश में प्रचंड 'कर्मचारी जागृति यात्रा' निकालकर कर्मचारियों को जाग्रत करते हुए बड़ा आंदोलन किया जायेगा।

महासंघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि, “यदि सरकार हमारी 25 सूत्री मांगों पर तुरंत सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो पूरे राज्य में सामूहिक अवकाश और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा कड़ा कदम उठाया जाएगा; जिसकी समस्त जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन और जिला प्रशासन की होगी।”

एकजुटता का अहसास

इस आक्रोश महाबैठक को प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़, कुलदीप यादव, विनोद सिद्धा, शेर सिंह यादव, देवेंद्र सिंह नरूका, राजेन्द्र शर्मा, अजयवीर सिंह, ओमप्रकाश चौधरी, सुरेश चंद शर्मा, प्रकाश यादव, विजय सिंह, चंद्रभान चौधरी, पवन शर्मा, भंवर सिंह हाडा, शंभू सिंह हाडा, गोपाल सिंह तंवर, खेमराज सिंह सोलंकी, तेज प्रकाश चतुर्वेदी, कान्ति कुमार शर्मा, सर्वेश्वर शर्मा, रणजीत मीणा, सुभाष यादव, शिवकुमार, प्रहलाद राय, नाथू सिंह गुर्जर, बहादुर सिंह, महेश कुमार, गोपाल शर्मा, ज्ञानचंद जांगिड़, प्रताप सिंह खुडी, लक्ष्मी नारायण मीणा, शशि शर्मा सहित प्रदेशभर से आए सभी जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ कर्मचारी नेताओं ने संबोधित करते हुए संगठन की एकजुटता का अहसास कराया।

दमनकारी नीतियां बदलें

बैठक के समापन पर कर्मचारी नेताओं ने संकल्प लिया कि जब तक सरकार लिखित में समझौता लागू नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।

विभिन्न जिलों जैसे जोधपुर, उदयपुर, कोटा और बीकानेर से आए प्रतिनिधियों ने भी जयपुर के इस फैसले का पूर्ण समर्थन किया है। राजस्थान में राज्य कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार की बेरुखी ने उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। राजस्थान में राज्य कर्मचारियों का यह संयुक्त मोर्चा अब जिला स्तर पर कमेटियां बनाकर आने वाले सप्ताह में होने वाले एक घंटे के कार्य बहिष्कार की तैयारियों को जमीनी स्तर पर अंतिम रूप देने में जुट गया है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) द्वारा जयपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों, कर्मचारी नेताओं के आधिकारिक वक्तव्यों और उनके द्वारा जारी 25 सूत्री मांगपत्र के प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। कर्मचारियों की हड़ताल, कार्य बहिष्कार और प्रशासनिक वार्ताओं के संबंध में कोई भी तात्कालिक निर्णय राज्य सरकार के विधिक आदेशों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर पाठकों या कर्मचारियों द्वारा लिए जाने वाले किसी भी व्यक्तिगत या विधिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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