भीलवाड़ा के नौगावां सांवरिया सेठ मंदिर में अन्नकूट लूट का आयोजन
भीलवाड़ा के नौगावां सांवरिया सेठ मंदिर में पुरुषोत्तम मास के तहत भव्य पंचामृत अभिषेक, अन्नकूट लूट और भजन संध्या का विशाल आयोजन किया गया।
अन्नकूट लूट महोत्सव
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का एक विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसमें दान-पुण्य और हरि भजन से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। भीलवाड़ा के नौगावां सांवरिया सेठ मंदिर में चल रहे अधिक मास महोत्सव के तहत आज श्रद्धा, समर्पण और अलौकिक आनंद का एक अनूठा महासंगम देखने को मिला। पूरा मंदिर परिसर देश के कोने-कोने और आसपास के जिलों से आए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पूरी तरह अट गया, जहाँ पैर रखने तक की जगह शेष नहीं बची थी। चारों तरफ "हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की" के गगनभेदी और पावन जयकारे लगातार गूंज रहे थे।
ब्रज जैसा नजारा
इस पावन अवसर पर भीलवाड़ा के नौगावां सांवरिया सेठ मंदिर का क्षेत्र साक्षात् नाथद्वारा और ब्रज भूमि की तरह एक अलौकिक और दिव्य धाम के रूप में जीवंत हो उठा।
सुबह की पहली किरण के साथ ही समूचे पांडाल में विद्वान आचार्यों के मुखारविंद से निकले वैदिक मंत्रोच्चार गूंजने लगे थे। उत्सव की शुरुआत में सबसे पहले सनातन परंपरा के अनुसार पूजनीय गौ-माता का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन संपन्न किया गया। इसके तुरंत बाद सांवरिया सेठ का गाय के शुद्ध दूध, दही, सुगंधित घी, शहद, बूरा और पवित्र गंगाजल से भव्य पंचामृत महाअभिषेक शुरू किया गया।
श्रीनाथ जी का रूप
जैसे-जैसे मंदिर के गर्भगृह में शंख, घंटियां और घड़ियाल बज रहे थे, पंडाल में मौजूद भक्तों का उत्साह और आंतरिक तरंगें अपने चरम पर पहुंच रही थीं।
अभिषेक की रस्म पूरी होने के बाद जब ठाकुर जी का मुख्य पर्दा खोला गया, तो साक्षात् हरि रूप के दर्शन पाकर हर आंख सजल हो उठी। आज सांवरिया सेठ को हूबहू नाथद्वारा के श्रीनाथ जी की प्राचीन शैली की तर्ज पर जरी-कढ़ाई से सुसज्जित, रंग-बिरंगी और अत्यंत आकर्षक पोशाक धारण कराई गई थी, जिसका अलौकिक और मनमोहन रूप देखते ही बनता था।
भव्य हवन अनुष्ठान
भीलवाड़ा के नौगावां सांवरिया सेठ मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के अगले चरण में वेदपाठी पंडितों द्वारा मूल भागवत पाठ का संगीतमय वाचन किया गया, जिसे सुनकर सभी भक्त भाव-विभोर हो गए।
पाठ की विधिक पूर्णाहुति पर विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण और संपूर्ण भीलवाड़ा क्षेत्र की खुशहाली की मंगल कामना के साथ एक भव्य हवन कुंड का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य अतिथियों, यजमानों और न्यास के वरिष्ठ ट्रस्टियों ने पवित्र आहुतियां प्रदान कीं और उसके बाद ठाकुर जी की कपूर से भव्य महाआरती उतारी गई, जिसमें समूचा जनसमूह एक साथ झूम उठा।
अन्नकूट लूट महोत्सव
शाम के समय उस मुख्य और ऐतिहासिक आकर्षण का क्षण आया, जिसका सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को सुबह से ही बड़ी बेसब्री से इंतजार था।
भीलवाड़ा के नौगावां सांवरिया सेठ मंदिर में आयोजित इस 'अन्नकूट लूट महोत्सव' के लिए परिसर के ठीक बीचों-बीच विशालकाय कांसे के थाल (पारंपरिक भाषा में शोले) सजाए गए थे। इन विशाल थालों में स्वादिष्ट अन्नकूट की मिश्रित सब्जी और सफेद चावल के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगाए गए थे। दूसरी तरफ पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा और एक जैसी सुंदर थीम ड्रेस में सजे-धजे भगवान सांवरिया सेठ के ग्वाले और गोपियां पूरी मुस्तैदी से खड़े थे।
द्वापर युग की याद
जैसे ही ठाकुर जी को राजभोग लगाने के बाद मुख्य पुजारी द्वारा अन्नकूट लूट की विधिवत घोषणा हुई, पूरा परिसर एक अद्भुत ऊर्जा से भर गया।
सांवरिया सेठ के ग्वाले पूरे उत्साह और उमंग के साथ इन 'शोले' (थालों) पर टूट पड़े। भगवान के प्रसाद स्वरूप इस पवित्र चावल और सब्जी को आपस में लूटने का यह दृश्य इतना मनोरम और जीवंत था कि उपस्थित हर शख्स को द्वापर युग की पौराणिक ब्रज लीला की याद आ गई। प्रसाद लूटने का यह दुर्लभ नजारा वाकई अद्भुत और रोंगटे खड़े कर देने वाला था, जिसे देख लोग धन्य हो गए।
छप्पन भोग की घोषणा
महोत्सव के दौरान विख्यात भजन गायक सुरेश काबरा ने एक से बढ़कर एक सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दीं, जिस पर श्रद्धालु देर रात तक पांडाल में थिरकते रहे।
इस दौरान जब मंदिर की मुख्य दान पेटी को खोला गया, तो उसमें से 2,54,000 रुपए की नकद राशि दान स्वरूप प्राप्त हुई। इसके साथ ही ट्रस्ट द्वारा घोषणा की गई कि, "आगामी रविवार को मंदिर परिसर में गायों के लिए विशेष छप्पन भोग का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा; जिसमें सभी नगरवासी आमंत्रित हैं।" इस सफल आयोजन में भंवरलाल दरगड, बुद्धि बाई, मुकेश पलोड, और मुख्य ग्वाले सूरज सिंह की 32 जनों की टीम सहित दामोदर अग्रवाल, गोविंद प्रसाद सोडाणी और मनीष बहेडिया का सराहनीय सहयोग रहा।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह धार्मिक और सांस्कृतिक समाचार रिपोर्ट भीलवाड़ा के नौगावां स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर ट्रस्ट द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारियों, यजमानों की सूची और स्थानीय संवाददाता (पंकज पोरवाल) द्वारा प्रेषित प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। मंदिर की दान राशि, आगामी कार्यक्रमों की तिथियां और छप्पन भोग का समय मंदिर प्रबंधन समिति के विधिक और आंतरिक निर्णयों के पूर्णतः अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाई जाने वाली किसी भी व्यक्तिगत या धार्मिक धारणा के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।