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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बड़ी बढ़ोतरी, जनता बेहाल

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है, जिससे दिल्ली में पेट्रोल करीब 98.64 रुपये पहुंच गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे लगातार उछाल के बीच आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को एक बार फिर करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा पिछले लगभग चार वर्षों से कीमतों में संशोधन पर लगी रोक को हटाए जाने के बाद, यह एक हफ्ते के भीतर ईंधन की दरों में की गई दूसरी बड़ी वृद्धि है। इस फैसले के बाद से ही देश के तमाम महानगरों में ईंधन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं।

दिल्ली में नए दाम

उद्योग जगत के विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई इस ताजा बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 97.77 रुपये से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है।

इसी तरह दिल्ली में डीजल की कीमतें भी 90.67 रुपये से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई हैं। विभिन्न राज्यों में मूल्य वर्धित कर (वेट) और स्थानीय करों की दरें अलग-अलग होने के कारण हर राज्य और शहर में पेट्रोल-डीजल के अंतिम खुदरा दाम भिन्न हो सकते हैं।[1]

चार साल बाद संशोधन

इससे पहले बीते शुक्रवार को भी सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये की भारी बढ़ोतरी की थी।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि देश में चार से अधिक वर्षों के अंतराल के बाद तेल की कीमतों में किया गया वह पहला संशोधन था। पिछले कई महीनों से देश के कुछ प्रमुख राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सरकारी ईंधन विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद देश में तेल की कीमतों को पूरी तरह स्थिर रखा हुआ था।

ईरान युद्ध का असर

लेकिन अब चुनावों की समाप्ति और वैश्विक स्तर पर उपजे भू-राजनीतिक तनाव के चलते कंपनियों को अपने बढ़ते घाटे का कुछ बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना पड़ रहा है।

ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। गत 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों तथा उसके बाद तेहरान की ओर से की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा

इस भीषण सैन्य संघर्ष के चलते वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए सबसे महत्वपूर्ण जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते तेल की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है।

यही वजह है कि भारतीय तेल कंपनियों के लिए कच्चे तेल का आयात लगातार महंगा होता जा रहा है। पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में तेल की कीमतों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

सीएनजी भी हुई महंगी

ईंधन के दामों में लगी यह आग सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि खाना पकाने और वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी गैस भी लगातार महंगी हो रही है।

बीती 15 मई को दिल्ली और मुंबई सहित देश के कई प्रमुख शहरों में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी। इसके ठीक बाद रविवार को एक बार फिर सीएनजी की दरों में 1 रुपये प्रति किलो का नया इजाफा कर दिया गया।

चौतरफा महंगाई की मार

सीएनजी और एलपीजी के दामों में आ रहे इस लगातार उछाल ने परिवहन क्षेत्र के साथ-साथ आम मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को भी पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही इस लगातार वृद्धि के कारण मालभाड़े में भी भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, जिससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं, फल और सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं। ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने भी ईंधन की इस अनियंत्रित बढ़ोतरी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से टैक्स कम करने की मांग की है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह वाणिज्यिक समाचार रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हुए उतार-चढ़ाव, सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी खुदरा मूल्य सूचकांक और वैश्विक व्यापारिक घटनाक्रमों के प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। ईंधन की कीमतों का निर्धारण, उत्पाद शुल्क और वैट की दरें पूरी तरह से भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय और राज्य सरकारों के नीतिगत निर्णयों के अधीन हैं। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर पाठकों द्वारा लिए जाने वाले किसी भी आर्थिक या व्यावसायिक निर्णय के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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