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दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल, तीन दिनों तक थमेंगे पहिए

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल से 21 मई से तीन दिनों तक ऑटो और टैक्सियों के पहिए थमने से दफ्तर और गंतव्य तक पहुंचने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल की घोषणा के बाद देश की राष्ट्रीय राजधानी में आगामी दिनों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। लगातार बढ़ती ईंधन की कीमतों से परेशान होकर दिल्ली के विभिन्न कमर्शियल वाहन चालक संघों (यूनियनों) ने आगामी 21 मई से 23 मई तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी व्यापक हड़ताल पर जाने की बड़ी योजना तैयार की है। टैक्सी और ऑटो के किरायों में तत्काल सम्मानजनक बढ़ोतरी की मांग को लेकर बुलाए गए इस चक्का जाम के कारण लाखों दैनिक यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार को लिखा पत्र

इस बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करते हुए ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को एक आधिकारिक विधिक पत्र लिखा है।

इस पत्र के माध्यम से संघ ने दिल्ली के चालकों की दयनीय आर्थिक स्थिति और उनकी प्रमुख जायज मांगों को पुरजोर तरीके से सरकार के समक्ष उठाया है। ट्रांसपोर्ट कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन और उग्र हो जाएगा।

परिवार चलाना हुआ मुश्किल

चालक संगठनों के आला पदाधिकारियों का कहना है कि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार आसमान छूती कीमतों के कारण अब ऑटो और टैक्सी चलाना पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि, “लगातार महंगी होती गैस और तेल की कीमतों की वजह से मध्यम वर्गीय चालक आज के दौर में अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए गंभीर रूप से संघर्ष कर रहे हैं; हमारी आमदनी का बड़ा हिस्सा ईंधन में ही चला जाता है।”

तीन दिवसीय हड़ताल

उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए दिल्ली के समस्त परिवहन ऑपरेटरों और चालकों से इस शांतिपूर्ण आंदोलन को सफल बनाने की पुरजोर अपील की है।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि, “दिल्ली के अन्य प्रमुख परिवहन संगठनों के साथ उचित समन्वय स्थापित करने के बाद 'चालक शक्ति यूनियन' ने 21, 22 और 23 मई को तीन दिवसीय चक्का जाम का आह्वान किया है; हम सभी चालकों से अपील करते हैं कि इन तीन दिनों में अपने वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद रखें।”[1]

यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

परिवहन विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल के कारण सिर्फ स्थानीय यात्रियों को ही परेशानी नहीं होगी, बल्कि रेलवे स्टेशनों, अंतरराज्यीय बस अड्डों (ISBT) और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने वाले हजारों यात्रियों को भी भारी असुविधा झेलनी पड़ेगी।

दिल्ली में इस समय रोजाना करीब एक लाख से अधिक ऑटो-रिक्शा और करीब अस्सी हजार से अधिक ऐप-आधारित टैक्सियां (ओला-उबर) सड़कों पर दौड़ती हैं। इन सभी के पहिए थमने से पूरी दिल्ली की रफ्तार पर ब्रेक लग जाएगा।

किराया समीक्षा की मांग

यूनियनों की मुख्य मांग है कि सरकार तुरंत एक उच्च स्तरीय 'किराया समीक्षा समिति' (Fare Revision Committee) का गठन करे, जो हर छह महीने में ईंधन की कीमतों के अनुपात में किराए का निर्धारण करे।

इसके अलावा, चालकों ने दिल्ली सरकार से ऐप-आधारित एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी कमीशनखोरी पर भी लगाम लगाने की मांग की है। चालकों का आरोप है कि ये निजी कंपनियां कुल किराए का एक बड़ा हिस्सा खुद रख लेती हैं, जिससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले गरीब चालकों को नाममात्र की बचत होती है।

आपातकालीन सेवाएं बहाल

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग के वरिष्ठ विधिक अधिकारियों ने कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।

हालांकि, चालक यूनियनों ने आश्वस्त किया है कि इस तीन दिवसीय चक्का जाम के दौरान एम्बुलेंस, स्कूली वाहनों और अन्य अत्यंत आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को रास्ते से नहीं रोका जाएगा। लेकिन यदि आम जनता ने समय रहते वैकल्पिक इंतजाम जैसे कि दिल्ली मेट्रो या डीटीसी बसों का रुख नहीं किया, तो उन्हें दफ्तर और गंतव्य तक पहुंचने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।।

अंतिम विधिक चेतावनी

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि तीन दिनों के इस शांतिपूर्ण चक्का जाम के बाद भी यदि दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय ने कोई सकारात्मक विधिक कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा।

इस हड़ताल की वजह से दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम जैसे पड़ोसी शहरों से आने-जाने वाले व्यावसायिक वाहनों पर भी व्यापक असर पड़ने की संभावना है। दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल से जुड़े इस बड़े घटनाक्रम पर दिल्ली की आम जनता की सांसें अटकी हुई हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह परिवहन और नागरिक केंद्रित समाचार रिपोर्ट ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और चालक शक्ति यूनियन द्वारा जारी प्रेस बयानों, उपराज्यपाल व मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे गए मांग पत्रों और प्राथमिक विधिक तथ्यों पर आधारित है। ऑटो-टैक्सी किरायों में किसी भी प्रकार का संशोधन या नीतिगत बदलाव पूरी तरह से दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्रालय और राज्य सरकार के विधिक सेवा नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा लिए जाने वाले किसी भी व्यक्तिगत या व्यावसायिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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