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भोजशाला परिसर में विजय महोत्सव का आगाज, अखंड ज्योति स्थापित की गई

भोजशाला परिसर में विजय महोत्सव के तहत मध्य प्रदेश के धार जिले में हिंदू संगठनों ने अखंड ज्योति स्थापित कर भव्य जश्न मनाया है।

By अजय त्यागी
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भोजशाला परिसर में विजय महोत्सव

भोजशाला परिसर में विजय महोत्सव के भव्य आयोजन के साथ मध्य प्रदेश के धार जिले में एक ऐतिहासिक जश्न की शुरुआत हो गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा हिंदू समुदाय को इस ऐतिहासिक स्मारक में बिना किसी प्रतिबंध के नियमित पूजा-अर्चना करने की पूर्ण विधिक अनुमति मिलने के ठीक बाद मंगलवार को विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस परिसर में एक विशाल "विजय उत्सव" का आयोजन किया। इस ऐतिहासिक विधिक निर्णय से उत्साहित धार शहर और देश के अन्य हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने परिसर में पहुंचकर इस उत्सव में भाग लिया।

अखंड ज्योति की स्थापना

आयोजकों से प्राप्त ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस "महाविजय महोत्सव" की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माता वाग्देवी (देवी सरस्वती) की विशेष पूजा और महाआरती के साथ की गई।

इसके साथ ही परिसर के भीतर भोजशाला परिसर में विजय महोत्सव के दौरान एक "अखंड ज्योति" (अनंत काल तक जलने वाली लौ) की विधिक रूप से स्थापना की गई है। इस उत्सव के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन ने पूरे धार जिले में सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त किए थे, ताकि कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे और श्रद्धालु शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मन्नतें पूरी कर सकें।[1]

लंबा सत्याग्रह हुआ सफल

इस बड़े धार्मिक आंदोलन का नेतृत्व करने वाले भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडे ने इस भावुक और ऐतिहासिक मौके पर अपने विचार साझा किए हैं।

उन्होंने वर्षों से चले आ रहे अपने शांतिपूर्ण संघर्ष को याद करते हुए मीडिया के समक्ष कहा कि, “हम हर मंगलवार को अपने इस विधिक सत्याग्रह के हिस्से के रूप में यहाँ इस उम्मीद के साथ आते थे कि एक न एक दिन हमारा यह कठिन संघर्ष अवश्य सफल होगा; आज हमें हमारी वर्षों की तपस्या का मीठा फल मिल गया है।”

एक चरण पूरा हुआ

संरक्षक विश्वास पांडे ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, “हम पहले भोजशाला को एक कैदी की तरह मानते थे क्योंकि हमारे पास केवल मंगलवार को ही यहाँ आकर पूजा करने की विधिक प्रशासनिक अनुमति थी; लेकिन हम पूरे वर्ष यहाँ पूजा करने का स्थायी विधिक अधिकार चाहते थे।”

उन्होंने आगे बताया कि, “यही कारण था कि हम हर मंगलवार को ठीक उसी स्थान पर आकर हवन और प्रार्थना करते थे, जहाँ से हमारी पवित्र वाग्देवी की प्राचीन मूर्ति को ब्रिटिश काल में लंदन ले जाया गया था; आज हमारे उस लंबे आंदोलन का पहला चरण पूरी तरह सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।”

वर्षभर पूजा का अधिकार

समिति के पदाधिकारियों ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि अब उन्हें वर्ष के सभी 365 दिन भोजशाला के भीतर जाकर विधिक रूप से पूजा-अर्चना करने और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने भोजशाला परिसर में विजय महोत्सव मनाने का ऐतिहासिक अधिकार प्राप्त हो चुका है।

विश्वास पांडे ने आगे कहा कि, “यह जानकर हम सभी बहुत खुश हैं कि जल्द ही हमारी मूल आराध्य देवी की प्रतिमा को उनके इसी वास्तविक और मूल स्थान पर दोबारा विधिक रूप से स्थापित किया जाएगा; और हमारा यह लंबा सत्याग्रह उसी पावन दिन पूरी तरह से संपन्न हो जाएगा।”

ऐतिहासिक विवाद की पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि धार स्थित यह ग्यारहवीं सदी का ऐतिहासिक स्मारक लंबे समय से एक बड़े विधिक और धार्मिक विवाद का केंद्र रहा है।

पुरातत्व विभाग के वर्ष 2003 के पुराने विधिक नियम के मुताबिक, हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा करने की और मुस्लिम समुदाय को केवल शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर एएसआई द्वारा की गई वैज्ञानिक जांच (सर्वेक्षण) की रिपोर्ट के बाद, इस परिसर के विधिक स्वरूप को लेकर एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है।

सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी

इस बड़े उत्सव के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए धार के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक खुद सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए थे।

भोजशाला के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह के आसपास भारी मात्रा में पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियां और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। हिंदू संगठनों ने आने वाले सभी श्रद्धालुओं से शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की पुरजोर अपील की है, ताकि अदालती आदेश का पूरी तरह विधिक सम्मान किया जा सके।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

इस नए विधिक आदेश के बाद धार जिले में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के तेजी से बढ़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

स्थानीय व्यापारियों और होटलों के मालिकों ने भी एएसआई के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे देश भर के श्रद्धालुओं का आना-जाना अब सालभर लगा रहेगा। अंततः, भोजशाला परिसर में विजय महोत्सव के इस भव्य आयोजन ने धार के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में एक नया उत्साह फूंक दिया है, जिसे लेकर बहुसंख्यक समाज में भारी हर्ष व्याप्त है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह ऐतिहासिक स्मारक और सांस्कृतिक उत्सव से जुड़ी समाचार रिपोर्ट भोज उत्सव समिति द्वारा जारी बयानों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के हालिया विधिक आदेशों और स्थानीय संवाददाताओं द्वारा प्रेषित प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। भोजशाला परिसर के अंतिम विधिक मालिकाना हक, धार्मिक अधिकारों और लंदन से मूर्ति वापस लाने की विधिक प्रक्रिया पूरी तरह से माननीय उच्च न्यायालय और भारत सरकार के विधिक नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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