WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
प्रादेशिक

बीकानेर में भ्रष्टाचार की जांच टालने पर CEO चौतरफा घिरे

बीकानेर में भ्रष्टाचार की जांच टालने और संभागीय आयुक्त द्वारा दी गई अंतिम मियाद पूरी होने के बाद भी कार्रवाई न करने पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी चौतरफा घिर गए।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust

बीकानेर में भ्रष्टाचार की जांच टालने और उच्चाधिकारियों के प्रशासनिक दिशा-निर्देशों को ठंडे बस्ते में डालने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। संभाग के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बार-बार लिखित रिमाइंडर भेजने के बावजूद निचले स्तर के अधिकारी किस कदर लापरवाही बरत रहे हैं, इसकी बानगी इस समय बीकानेर संभाग में साफ देखने को मिल रही है। इस लचर रवैये और मियाद पूरी होने के बाद भी कोई कदम न उठाए जाने को लेकर ग्रामीणों और कानूनविदों में भारी रोष है।

संभागीय आयुक्त का पत्र

बीकानेर में भ्रष्टाचार की जांच मामले के आधिकारिक विवरण के अनुसार, राजस्थान सरकार के कार्यालय संभागीय आयुक्त बीकानेर संभाग की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जिला परिषद बीकानेर को एक बेहद कड़ा और अंतिम पत्र भेजा गया था।

संभागीय आयुक्त विश्राम मीना द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में लूणकरणसर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मकड़ासर में पिछले 10 वर्षों के दौरान हुए भारी गबन और वित्तीय अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच करने के कड़े निर्देश दिए गए थे।

नौ बार पहले भेजे रिमाइंडर

हैरानी की बात यह है कि 04 मई को लिखे इस पत्र से पूर्व भी संभागीय आयुक्त कार्यालय द्वारा इस गंभीर घोटाले की तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट मांगने के लिए जिला परिषद को एक या दो नहीं, बल्कि कुल नौ बार पूर्व में अधिकारिक रिमाइंडर भेजे गए।

इन पत्रों का सिलसिला इस वर्ष की शुरुआत में 30 जनवरी 2026 से शुरू होकर फरवरी, मार्च और अप्रैल महीनों के दौरान लगातार जारी रहा। इसके बावजूद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने जांच रिपोर्ट समय पर प्रेषित नहीं की, जिसे कार्य के प्रति घोर लापरवाही माना जा रहा है।

एडवोकेट ने लगाया आरोप

इस प्रशासनिक सुस्ती पर तीखा हमला बोलते हुए जाने-माने एडवोकेट सुरेश गोस्वामी ने सोशल मीडिया और मीडिया विंग्स के माध्यम से पूरे मामले को उजागर किया है।

एडवोकेट सुरेश गोस्वामी ने लिखित में अवगत कराया है कि, “बीकानेर में भ्रष्टाचार की जांच के सम्बन्ध में संभागीय आयुक्त बीकानेर के आदेशों को किस तरह उनके मातहत अधिकारी खुलेआम नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, इसकी जीती-जागती बानगी बीकानेर में देखने को मिल रही है; मुख्य कार्यकारी अधिकारी गबन करने वाले आरोपी सरपंच को खुला संरक्षण और बढ़ावा दे रहे हैं।”

परिवादी को नहीं दी सूचना

अधिवक्ता ने बताया कि इस गंभीर घोटाले को लेकर परिवादी डूंगरसिंह पुत्र देवीसिंह (निवासी बिंझरवाली) ने पिछले कई महीनों से लगातार प्रशासनिक चौखट पर न्याय की गुहार लगाई है।

परंतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीकानेर ने आरोपी सरपंच को कथित तौर पर शह व बढ़ावा देकर ना तो तय समय सीमा में त्रिस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया और ना ही पीड़ित परिवादी डूंगरसिंह को मामले की विगति या कार्रवाई की कोई आधिकारिक सूचना प्रदान की।

सरकार की उड़ी खिल्ली

अब ग्रामीण नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति तैयार कर ली है।

एडवोकेट सुरेश गोस्वामी ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आगे कहा कि, “एक तरफ सूबे की सरकार प्रदेश से भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बीकानेर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महोदय संभागीय आयुक्त के आदेशों की खिल्ली उड़ाकर सीधे तौर पर ग्रामीण भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।”

समाप्त हुई सात दिन की अंतिम मियाद

मामले की गंभीरता को देखते हुए संभागीय आयुक्त विश्राम मीना ने गत 4 मई 2026 को जिला परिषद को अंतिम लिखित चेतावनी जारी करते हुए 7 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का सख्त अल्टीमेटम दिया था।

अत्यंत चिंताजनक बात यह है कि 4 मई को लिखे गए इस अंतिम आदेश की 7 दिन की तय समय-सीमा (मियाद) भी अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इस मियाद के बीत जाने के बाद भी जिला परिषद स्तर पर कोई मौका निरीक्षण या कमेटी का गठन नहीं किया गया है।

सख्त कार्रवाई की मांग

संभागीय आयुक्त ने स्पष्ट आदेश दिया था कि यदि प्राथमिक जांच में ग्राम पंचायत मकड़ासर का सरपंच दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत प्रभाव से आरोप-पत्र भिजवाया जाए।

लेकिन तय मियाद खत्म होने के बाद अब पीड़ित ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच को दबाने के आरोप में अविलंब मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीकानेर के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अंततः, बीकानेर में भ्रष्टाचार की जांच टालने के इस बड़े प्रशासनिक गठजोड़ के सामने आने के बाद संभाग के ग्रामीण विकास से जुड़े महकमों में हड़कंप मचा हुआ है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण विकास कोष में हेरफेर से जुड़ी समाचार रिपोर्ट संभागीय आयुक्त कार्यालय बीकानेर द्वारा जारी आधिकारिक पत्राचार (पत्रांक 413, दिनांक 04-05-26), एडवोकेट सुरेश गोस्वामी द्वारा प्रस्तुत लिखित बयानों पर आधारित है। ग्राम पंचायत मकड़ासर में हुए वित्तीय गबन के आरोपों की अंतिम सत्यता और अधिकारियों की जवाबदेही पूरी तरह से पंचायतीराज विभाग की विभागीय जांच और माननीय न्यायालय के अंतिम न्यायिक आदेशों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief