नर्सिंग कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग
चित्तौड़गढ़ के साड़ास सीएचसी में नर्सिंग कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और गंभीर मानसिक प्रताड़ना को लेकर जिला कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई गई है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) साड़ास में कार्यरत नर्सिंग कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार का एक बेहद ही संवेदनशील और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। चिकित्सालय में तैनात एक महिला एएनएम और संपूर्ण स्टाफ ने वहां के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. मुक्तेश कुमार जगरिया पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना, गाली-गलौज करने और कार्यस्थल पर असुरक्षित माहौल पैदा करने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नर्सेज जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है।
एएनएम का दर्दनाक संदेश
भीलवाड़ा से नर्सेज संयोजक नूर मोहम्मद खान ने पीड़ित महिला एएनएम सुनीता देवी द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा गया एक दर्दनाक संदेश और स्टाफ कर्मचारियों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन की प्रति मीडिया के साथ साझा की है।
महिला एएनएम सुनीता देवी ने राजस्थान नर्सिंग यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष देवाराम चौधरी और नूर मोहम्मद खान को भेजे संदेश में रोते हुए अपना दर्द बयां किया है। एएनएम ने लिखा है कि वह हर स्तर पर प्रशासनिक गुहार लगाकर पूरी तरह से हार चुकी है और अब भारी मानसिक तनाव में जी रही है।
आपत्तिजनक व्यवहार के आरोप
पीड़ित महिला कर्मचारी ने जिला कलेक्टर महोदया को लिखित शिकायत भेजकर अवगत कराया है कि प्रभारी चिकित्सक पिछले दो वर्षों से उन्हें व्यक्तिगत रूप से टारगेट कर रहे हैं।


उन्होंने शिकायत में बताया कि डॉ. जगरिया द्वारा ओपीडी के समय उपस्थित मरीजों और आम जनता के सामने आए दिन गंदी-गंदी गालियां दी जाती हैं। फीमेल स्टाफ के साथ बेहद आपत्तिजनक और भद्दी बातें करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसके साथ ही महिला कार्मिकों की पर्सनल लाइफ में जबरन दखलअंदाजी कर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियां दी जा रही हैं।
आत्महत्या की चेतावनी
महिला एएनएम सुनीता देवी शारीरिक रूप से भी रीढ़ की हड्डी (एल 5 स्पाइन) की गंभीर समस्या से जूझ रही हैं, जिसके बावजूद वे अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रही हैं।
उन्होंने चित्तौड़गढ़ कलेक्टर को भेजे पत्र में अत्यंत व्यथित होकर लिखा कि, “चिकित्सा प्रभारी द्वारा लगातार किए जा रहे इस अमानवीय व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के कारण मैं अब आत्महत्या करने पर मजबूर हो गई हूँ; यदि मेरे साथ भविष्य में किसी भी प्रकार की कोई अनहोनी घटना या अप्रिय गतिविधि होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रभारी डॉ. मुक्तेश जगरिया की होगी।”
वैक्सीनेशन कार्य में बाधा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साड़ास के नर्सिंग कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार का यह सिलसिला केवल एक महिला कर्मचारी तक ही सीमित नहीं है।
संस्थान के अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मियों ने भी सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर जिला कलेक्टर को एक अन्य शिकायत पत्र प्रेषित किया है। इस संयुक्त पत्र में कर्मचारियों ने बताया है कि डॉक्टर महोदय द्वारा सरकारी ड्यूटी पर उपस्थित होने के बावजूद उनकी अटेंडेंस शीट पर जानबूझकर हस्ताक्षर नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण पिछले दो महीनों से पूरा स्टाफ बिना वेतन के काम करने को मजबूर है।
सरकारी योजना पर असर
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब वे शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना 'एचपीवी वैक्सीनेशन' के तहत स्कूल की छोटी बालिकाओं का टीकाकरण करने अस्पताल लाते हैं, तो डॉक्टर महोदय परिजनों के सामने ही भ्रामक बातें करते हैं।

डॉक्टर कथित तौर पर अभिभावकों के सामने कहते हैं कि, “यह वैक्सीन आप अपनी जिम्मेदारी पर लगवाना, मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है, तुम लोग केवल टारगेट पूरा करने के चक्कर में इन बच्चियों की जान ले लोगे।” इस गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से जनता में भारी भ्रम और भय का माहौल पैदा हो रहा है।
जिला परिषद तक शिकायत
स्टाफ ने बताया कि नर्सिंग कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के इस पूरे मामले की शिकायत पूर्व में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को भी दी गई थी, परंतु वहां से कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
सीएमएचओ साहब हर बार आरोपी डॉक्टर को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। डॉक्टर भी खुलेआम यह धौंस जमाता है कि उसकी पहुंच ऊपर तक है और कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस कारण अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर, सीएचओ, एएनएम और सफाई कर्मी अत्यंत डरे हुए हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
वर्तमान में इस संयुक्त शिकायत पत्र पर अस्पताल के दस से अधिक जिम्मेदार कर्मचारियों ने अपने आधिकारिक हस्ताक्षर कर तुरंत प्रभाव से डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
राजस्थान नर्सिंग यूनियन ने भी चेतावनी दी है कि यदि नर्सिंग कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार नहीं रोका गया एवं पीड़ित महिला कर्मचारी को न्याय नहीं मिला और कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वृहद स्तर पर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। अंततः, नर्सिंग कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के इस बड़े मामले ने चित्तौड़गढ़ के स्वास्थ्य महकमे में खलबली मचा दी है और अब सभी को जिला कलेक्टर की त्वरित कार्रवाई का इंतजार है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह कार्यस्थल पर उत्पीड़न और विभागीय विवाद से जुड़ी समाचार रिपोर्ट पीड़ित महिला एएनएम सुनीता देवी द्वारा जिला कलेक्टर चित्तौड़गढ़ को भेजे गए प्रार्थना पत्र, एनएचएम स्टाफ के हस्ताक्षरित शिकायत पत्र और राजस्थान नर्सिंग यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। चिकित्सा अधिकारी पर लगे आरोपों की सत्यता, वेतन रोकने के कारणों और अनुशासनात्मक कार्रवाई का अंतिम निर्णय पूरी तरह से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान सरकार की आंतरिक जांच समिति के नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।