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दुबारे हाथी कैंप में पर्यटकों की एंट्री बैन, घायल हाथी की मौत

दुबारे हाथी कैंप में पर्यटकों की एंट्री बैन होने के बीच आपसी लड़ाई में कल घायल हुए विशालकाय हाथी मार्तंड ने भी आज तड़के दम तोड़ दिया है।

By अजय त्यागी
1 min read
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कल के हादसे में घायल हाथी की मौत

दुबारे हाथी कैंप में पर्यटकों की एंट्री बैन होने के बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच आज मंगलवार को वन्यजीव गलियारे से एक और बेहद दुखद खबर सामने आई है। कर्नाटक के कोडागु (कूर्ग) जिले के प्रसिद्ध कावेरी नदी तट पर स्थित दुबारे एलीफेंट कैंप में कल दो हाथियों के बीच हुई भीषण खूनी लड़ाई में गंभीर रूप से घायल हुए 34 वर्षीय नर हाथी 'मार्तंड' की भी आज मौत हो गई है। इसी घायल हाथी के नीचे कल दबने से तमिलनाडु की एक महिला पर्यटक ने दम तोड़ दिया था।

कावेरी नदी में हुआ था द्वंद्व

वन विभाग के वरिष्ठ वन्यजीव प्रभाग से प्राप्त ताज़ा जानकारी के अनुसार, यह पूरी दर्दनाक घटना कल सोमवार को उस समय शुरू हुई थी, जब हाथियों के झुंड को प्रतिदिन की तरह नदी के किनारे पानी पिलाने और स्नान कराने के लिए सोमवारपेट झील के पास ले जाया गया था।

उसी समय अचानक 'कांचन' और 'मार्तंड' नामक दो शक्तिशाली नर हाथी आपस में बुरी तरह भिड़ गए थे। माहुतों द्वारा लगातार नियंत्रित करने के बावजूद कांचन ने मार्तंड पर बेहद हिंसक हमला कर दिया था।

कल मची थी भारी भगदड़

कल सोमवार को कावेरी नदी के किनारे हाथियों के इस हिंसक द्वंद्व युद्ध को देखकर वहां मौजूद देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अचानक भारी भगदड़ मच गई थी।

इसी आपाधापी के दौरान तमिलनाडु से अपने परिवार के साथ घूमने आई 33 वर्षीय महिला पर्यटक जेनिसी अचानक अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर गईं और कांचन के जानलेवा प्रहार से लड़खड़ाकर गिरे मार्तंड नामक हाथी के विशालकाय शरीर के नीचे पूरी तरह दब गई थीं, जिससे उनकी कल ही मौके पर मौत हो गई थी। जिसके चलते दुबारे हाथी कैंप में पर्यटकों की एंट्री बैन कर दी गई है। 

आज इलाज के दौरान तोड़ा दम

हाथियों के इस हिंसक युद्ध में 34 वर्षीय नर हाथी मार्तंड के अंदरूनी अंगों में गहरी चोटें आई थीं और उसकी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह टूट गई थी।

वन्यजीव पशु चिकित्सकों की एक विशेष मेडिकल टीम ने कल रात से ही मार्तंड को बचाने के लिए आपातकालीन चिकित्सा उपचार शुरू किया था। परंतु रीढ़ की गंभीर चोटों के कारण उसने दवाओं पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी और अंततः आज मंगलवार को मार्तंड ने भी तड़पते हुए दम तोड़ दिया है।

दुबारे हाथी कैंप में पर्यटकों की एंट्री बैन

इस दोहरे और भयानक हादसे के तुरंत बाद पूरे कोडागु जिला प्रशासन और वन प्रभाग में आज भी भारी हड़कंप मचा हुआ है।

वन विभाग के आला अधिकारियों ने सुरक्षा की दृष्टि से एहतियातन कदम उठाते हुए दुबारे हाथी कैंप को दो दिनों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया है। वन्यजीव विभाग के मुख्य संरक्षक ने बताया कि हाथियों के व्यवहार में आए इस अप्रत्याशित आक्रामक मूड को देखते हुए फिलहाल सभी बाहरी पर्यटकों के प्रवेश और नदी सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।[1]

मंत्री ने दिए सख्त निर्देश

कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर बी. खांड्रे ने कल महिला पर्यटक और आज हाथी मार्तंड की हुई मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उच्च स्तरीय जांच के सख्त आदेश जारी किए हैं।

उन्होंने राज्य के सभी वन्यजीव सफारी और हाथी शिविरों के लिए एक नया 'मानक संचालन प्रचालन' (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने साफ कहा है कि, “भविष्य में पर्यटकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा; और सभी कैंपों में सैलानियों को हाथियों के स्नान की प्रक्रिया से न्यूनतम 100 फीट की सुरक्षित दूरी बनाए रखनी होगी।”

सुरक्षा मानकों की समीक्षा

हाथियों के इस हिंसक व्यवहार के कारणों का पता लगाने के लिए आज मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की देखरेख में वरिष्ठ माहुतों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है।

वर्तमान में हाथियों के ब्रीडिंग सीजन और अत्यधिक गर्मी के कारण उनके व्यवहार में आने वाले इन बदलावों पर अब गहन वैज्ञानिक अध्ययन करने की बात कही जा रही है। आखिरकार, दुबारे हाथी कैंप में पर्यटकों की एंट्री बैन होने के इस बड़े प्रशासनिक फैसले के बाद दक्षिण भारत के सभी प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्रों पर सुरक्षा मानकों और आपातकालीन तैयारियों की नए सिरे से गंभीर समीक्षा की जा रही है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह वन्यजीव हादसे और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों से जुड़ी समाचार रिपोर्ट कर्नाटक वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिकamp; प्रेस विज्ञप्ति, कोडागु जिला पुलिस के बयानों और स्थानीय संवाददाताओं द्वारा प्रेषित प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। हाथियों के हिंसक व्यवहार के वैज्ञानिक कारणों, मुआवजे की घोषणा और कैंप खोलने की अंतिम तिथि का निर्धारण पूरी तरह से पर्यावरण मंत्रालय के स्थापित तय नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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