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जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन, समस्याओं का हुआ समाधान

जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन कर जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं को कानूनी और वित्तीय नियमों की बड़ी ट्रेनिंग दी गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन

जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन होने के साथ ही राजस्थान के सामाजिक और कल्याणकारी इतिहास में एक बेहद स्वर्णिम व ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। राजधानी जयपुर के प्रशासनिक गलियारे में पहली बार अपनी तरह का यह अनूठा और सबसे बड़ा प्रांतीय सम्मेलन सफलता के साथ संपन्न हुआ है। इस महासंगम का मूल उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के ग्रास रूट यानी जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले छोटे गैर-सरकारी संगठनों को एक मजबूत साझा मंच प्रदान करना था।

विद्वजनों का मिला मार्गदर्शन

इस राज्य स्तरीय सम्मेलन में प्रदेश भर से आए सैकड़ों गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया है।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में स्वयंसेवी संस्थाओं के सामने आने वाली रोजमर्रा की व्यावहारिक समस्याओं और उनके कानूनी समाधानों पर बहुत ही बारीकी से खुली चर्चा की गई है। इसके लिए विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किए गए, जिसमें देश के कई नामचीन विद्वजनों ने न सिर्फ अपने विचार व्यक्त किए, बल्कि समाज सेवा की राह में आने वाली बाधाओं पर सबका मार्गदर्शन भी किया।

प्रोजेक्ट और डॉक्यूमेंटेशन ट्रेनिंग

जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन सत्र के दौरान छोटे संगठनों को सबसे बड़ी सीख यह दी गई कि वे अपनी संस्था के जरूरी विधिक डॉक्यूमेंट्स किस प्रकार तैयार करें।

एक्सपर्ट्स ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय डोनर्स (दानदाताओं) को अपनी सामाजिक योजनाओं की प्रभावी प्रस्तुति देकर किस प्रकार एप्रोच किया जाए। इसके साथ ही यह भी सिखाया गया कि किस प्रकार दो या दो से अधिक सामाजिक संगठन आपसी सहयोग, समन्वय और सहकार्यता के माध्यम से समाज के वंचित तबके के उत्थान के लिए मिलकर एक साथ काम कर सकते हैं।

वित्तीय और लीगल मैटर्स

कॉन्क्लेव के दूसरे तकनीकी सत्र में स्वयंसेवी संस्थाओं को आयकर विभाग के नवीनतम नियमों, एफसीआरए लाइसेंस और कानूनी व वित्तीय मामलों को सुगमता से डील करने के गुर सिखाए गए।

विशेषज्ञों ने कड़े शब्दों में जोर दिया कि सरकारी और कॉर्पोरेट फंड का सही उपयोग करने के लिए आंतरिक ऑडिट प्रणाली को मजबूत रखना बेहद आवश्यक है। इस महत्वपूर्ण डिजिटल कॉन्क्लेव का भव्य आयोजन प्रसंग वशिष्ठ चैरिटेबल ट्रस्ट, ऑनर टिल फाउंडेशन और नोवा टेरा फेडरेशन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

सीके बिरला हॉस्पिटल का सहयोग

इस पूरे सामाजिक आयोजन को सफल बनाने में क्रेडिबल हेल्थ पार्टनर के रूप में प्रतिष्ठित सीके बिरला हॉस्पिटल ने अपना बहुमूल्य तकनीकी और चिकित्सकीय सहयोग प्रदान किया है।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस जे. के. राका साहिब उपस्थित रहे। सेवानिवृत्त जस्टिस जे. के. राका साहिब ने इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि, "कानूनी रूप से साक्षर होकर ही देश के स्वयंसेवी संगठन आम जनता के अधिकारों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से कर सकते हैं।"

महासंदेश पोस्टर का विमोचन

समारोह में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में पधारीं प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. अमला बत्रा ने भी इस वृहद कॉन्क्लेव के दूरगामी उद्देश्यों की जमकर प्रशंसा की है।

इसी मंच पर प्रसंग वशिष्ठ चैरिटेबल ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी रेणु वशिष्ठ के पावन सानिध्य में इस सदी के महासंदेश "सत्य से प्रेम, प्रेम से कर्म करें" नामक एक विशेष जन जागृति पोस्टर का विमोचन भी गरिमामयी ढंग से संपन्न हुआ। यह पोस्टर समाज में नैतिक मूल्यों और निस्वार्थ कर्म की भावना को बढ़ावा देने का काम करेगा।

ईमानदारी का गल्ला प्रोजेक्ट

ऑनर टिल फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. गीता पारीक ने इस अवसर पर अपनी संस्था के दो अत्यंत महत्वाकांक्षी लाइव प्रोजेक्ट्स के बारे में भावुक विचार व्यक्त किए।

उन्होंने समाज के वंचित बच्चों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे "ईमानदारी का गल्ला" और "मुझे भी कुछ कहना है" प्रोजेक्ट्स की विस्तृत रूपरेखा देश भर से आए प्रतिनिधियों के सामने रखी। इसके बाद नोवा टेरा फेडरेशन की प्रखर डायरेक्टर मयूरी जोशी ने सभी आगंतुक अतिथियों, चिकित्सकों और डॉक्टरों का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया।

सत्यमेव जयते का उदघोष

जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन के इस भव्य सम्मेलन का समापन पूरे हॉल में गूंजे "सत्यमेव जयते" के गगनभेदी और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत पवित्र उदघोष के साथ बहुत ही गरिमामयी माहौल में हुआ है।

सभी संस्थाओं ने भविष्य में मिलकर काम करने और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने का कड़ा प्रशासनिक संकल्प लिया है। आखिरकार, जयपुर में एनजीओ कॉन्क्लेव का आयोजन होने के इस ऐतिहासिक कदम के बाद राजस्थान के सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी सुदृढ़ता और संगठित सहकार्यता के एक बेहद नए व उज्‍जवल युग का सूत्रपात हो गया है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह सामाजिक चेतना, स्वयंसेवी संस्थाओं के सम्मेलन और विधिक जागरूकता से जुड़ी समाचार रिपोर्ट प्रसंग वशिष्ठ चैरिटेबल ट्रस्ट, ऑनर टिल फाउंडेशन और संबंधित सहयोगी संस्थाओं द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट, मुख्य अतिथियों के बयानों और स्थानीय संवाददाताओं द्वारा प्रेषित प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। गैर-सरकारी संगठनों के लीगल रजिस्ट्रेशन, वित्तीय नियमों और विभिन्न प्रोजेक्ट्स के विधिक क्रियान्वयन का अंतिम निर्धारण पूरी तरह से भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों और तय प्रशासनिक गाइडलाइंस के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief