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ब्यावर में गोचर भूमि में सड़क निर्माण का विरोध तेज हुआ

ब्यावर में गोचर भूमि में सड़क निर्माण का विरोध कर ग्रामीणों ने सीमांकन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg ग्रामीणों का धरना

ग्रामीणों का धरना

ब्यावर (शिंभु  सिंह शेखावत)। ब्यावर में गोचर भूमि में सड़क निर्माण का विरोध होने के साथ ही नवनिर्मित ब्यावर जिले के ग्रामीण अंचलों में प्रशासनिक तनाव और जन आक्रोश की एक बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। जिले के लिखमणियां क्षेत्र से लेकर केकिंदड़ा ग्राम तक पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा प्रस्तावित नई डामरीकरण सड़क निर्माण कार्य को लेकर चरागाह भूमि का यह पुराना विवाद अब पूरी तरह गहरा गया है। बिना उचित विधिक सीमांकन के निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्रवासी नाराज हैं।

अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू

स्थानीय प्रशासन और निर्माण ठेकेदार की इस मनमर्जी और गोचर भूमि में सड़क निर्माण के खिलाफ आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रभावित स्थल पर टेंट लगाकर अपना अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि संबंधित ठेकेदार द्वारा राजस्व नियमों को ताक पर रखकर गोचर भूमि में मनमर्जी से खुदाई और सड़क निर्माण किया जा रहा है। इस अवैध निर्माण गतिविधि से मूक पशुओं के चरने की प्रारंभिक चरागाह भूमि पूरी तरह नष्ट और प्रभावित हो जाएगी।

राजस्व रिकॉर्ड का हवाला

धरना स्थल पर मौजूद केकिंदड़ा के प्रबुद्ध ग्रामीणों ने विभिन्न सरकारी दस्तावेजों और पुराने राजस्व रिकॉर्ड का कड़ा हवाला देते हुए अपनी बात मीडिया के सामने रखी।

उन्होंने बताया कि इस गांव की कीमती गोचर भूमि खसरा नंबर 627, 489, 685, 666, 667, 668, 669, 681, 680, 645, 647, 657, 654, 25 एवं 36 में पूर्णतया दर्ज है। इस विधिक रिकॉर्ड के बावजूद भी राजस्व विभाग द्वारा आज तक इस पूरी विवादित चरागाह भूमिका मौके पर जाकर कोई सीमांकन नहीं किया गया है।

ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन

जनता की भावनाओं को दरकिनार करने के कारण ब्यावर में गोचर भूमि में सड़क निर्माण का विरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी कई बार जिला कलेक्टर और स्थानीय उपखंड प्रशासन को लिखित ज्ञापन देकर गोचर भूमि का सरकारी सीमांकन करवाने एवं पूर्व में हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने की पुरजोर मांग की थी, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के चलते धरातल पर आज तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी।

पुलिस जाप्ता न मिलने की समस्या

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इससे पहले 12 दिसंबर 2025 और हाल ही में 23 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन द्वारा इस चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए बकायदा विशेष राजस्व टीमें भी गठित की गई थीं।

लेकिन विडंबना यह रही कि दोनों ही बार स्थानीय थानों से पर्याप्त पुलिस जाप्ता (बल) उपलब्ध नहीं होने के कारण टीमें मौके पर नहीं पहुंच सकीं और बिना कार्रवाई के ही पूरी फाइल बंद हो गई। इससे भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए।

नायब तहसीलदार का बयान

इस पूरे गंभीर प्रशासनिक गतिरोध और जन आंदोलन को लेकर क्षेत्र के नायब तहसीलदार प्रहलादराम ने न्यूज़ रूम को महत्वपूर्ण विभागीय जानकारी साझा की है।

नायब तहसीलदार प्रहलादराम ने ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए आधिकारिक तौर पर बताया कि, “आगामी 26 मई को पुनः गोचर भूमि से हर प्रकार का अवैध अतिक्रमण पूरी तरह हटाने और पैमाइश के लिए एक उच्च स्तरीय राजस्व team का गठन कड़ाई से कर दिया गया है।”

ग्रामीणों की कड़ी चेतावनी

इधर धरना स्थल पर डटे ग्रामीणों ने कड़े शब्दों में मांग की है कि पहले राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार गोचर भूमि की सरकारी बाउंड्री तय की जाए।

उसके बाद ही विधिक नक्शे के अनुसार सड़क निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाए। ग्रामीणों ने सामूहिक संकल्प लेते हुए प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी यह जायज मांगें धरातल पर पूरी नहीं होती हैं, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना और विरोध प्रदर्शन पूरी मुस्तैदी के साथ लगातार जारी रहेगा।

एकजुट हुआ ग्रामीण समाज

धरना स्थल पर सामाजिक कार्यकर्ता अमराराम, महादेव, जगदीश, बाबूलाल, दीनाराम जाट और रामनिवास सहित बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण महिला-पुरुष मौजूद रहे।

सभी वक्ताओं ने एक सुर में पर्यावरण और पशुधन के संरक्षण के लिए इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की बात कही। आखिरकार, ब्यावर में गोचर भूमि में सड़क निर्माण का विरोध होने के इस बड़े कदम के बाद संपूर्ण जिले के राजस्व अधिकारियों में हड़कंप मच गया है और अब हर किसी की नजरें आगामी 26 मई को होने वाली प्रशासनिक पैमाइश की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह ग्रामीण जन आक्रोश, चरागाह भूमि विवाद और सड़क निर्माण गतिरोध से जुड़ी समाचार रिपोर्ट ब्यावर जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बयानों, ग्रामीणों के प्रदर्शन और स्थानीय राजस्व संवाददाताओं से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। गोचर भूमि के विधिक सीमांकन, खसरा नंबरों की जांच और अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई का अंतिम निर्णय पूरी तरह से राजस्थान सरकार के राजस्व नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief