ओडिशा में उगाया दुर्लभ मियाजाकी आम: प्रशासन से मांगी गई मदद
ओडिशा में उगाया दुर्लभ मियाजाकी आम आजकल चर्चा में है। मलकानगिरी के किसान देबा पाढ़ियामी ने इसे उगाकर सरकार से उचित मार्गदर्शन की मांग की है।
ओडिशा में उगाया दुर्लभ मियाजाकी आम
ओडिशा में उगाया दुर्लभ मियाजाकी आम आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। मलकानगिरी जिले के किसान देबा पाढ़ियामी ने अपने खेत में जापान के प्रसिद्ध मियाजाकी किस्म के पौधे को फलने-फूलने में सफलता हासिल की है। यह आम अपनी बेहतरीन मिठास और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों के लिए प्रसिद्ध है। देबा की इस अनूठी मेहनत ने राज्य के कृषि मानचित्र पर एक नया और गौरवशाली अध्याय जोड़ दिया है।(1)
चार साल का सफर
किसान देबा पाढ़ियामी को चार साल पहले एक समाज सेवी ने मियाजाकी आम का पौधा भेंट स्वरूप दिया था। उन्होंने इसे अपने बच्चे की तरह सहेज कर रखा और बिना किसी आधुनिक संसाधन के पूरी मेहनत से तैयार किया। कड़ी धूप और बदलते मौसम की चुनौतियों को झेलते हुए पेड़ अब फलों से लद गया है। इस उपलब्धि के बाद से ही किसान की नींद उड़ गई है क्योंकि वे इसे लेकर बहुत चिंतित हैं।
मार्गदर्शन की दरकार
मियाजाकी आम की दुनिया भर में भारी मांग है, लेकिन देबा को इसे बेचने का सही तरीका नहीं पता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि इस दुर्लभ फल की सही कीमत क्या हो सकती है और इसे कहां बेचना चाहिए।" वे जानकारी के अभाव में डरे हुए हैं कि कहीं उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल न मिल पाए। इसलिए, वे कृषि विभाग से तुरंत आधिकारिक सहायता चाहते हैं।
सरकार से उम्मीद
ओडिशा में उगाया दुर्लभ मियाजाकी आम अब प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय है। देबा का कहना है कि यदि उन्हें सरकार द्वारा थोड़ी मदद मिल जाए, तो वह अपने जिले के अन्य किसानों को भी इस तरह की उन्नत खेती के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उनका मानना है कि मियाजाकी आम की खेती मलकानगिरी की अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता रखती है। वे कृषि अधिकारियों के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
मियाजाकी की विशेषता
मियाजाकी आम अपनी लाल रंग की चमक और बेहतरीन मिठास के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसकी खेती मुख्य रूप से जापान के मियाजाकी शहर में होती है, जहां से इसका नामकरण हुआ है। यह आम एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। भारत के कुछ हिस्सों में भी अब इसकी सफल खेती की खबरें आ रही हैं, जो किसानों के लिए नई उम्मीदें जगाती हैं।
बाजार और संभावनाएं
ओडिशा में उगाया दुर्लभ मियाजाकी आम का वजन आमतौर पर 350 ग्राम से अधिक होता है और इसका रंग लाल से बैंगनी तक हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस आम की कीमत लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है, जो इसे एक लग्जरी फल बनाती है। हालांकि, भारत में इसकी कीमत अलग-अलग राज्यों के अनुसार भिन्न हो सकती है। देबा पाढ़ियामी की सफलता यह दिखाती है कि आदिवासी क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक खेती के द्वारा बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
भविष्य की योजना
किसान देबा पाढ़ियामी ने अब इस पेड़ को सुरक्षित रखने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से भी अपील की है कि वे इस अमूल्य फसल को देखने के लिए संयम बरतें। उनका लक्ष्य अब इस साल मिलने वाली फसल से नए पौधे तैयार करना और बागवानी को और बड़ा बनाना है। उन्होंने कहा, "मेरा सपना है कि मेरा गांव मियाजाकी आम की खेती का केंद्र बने और यहां के किसानों को बेहतर कमाई का जरिया मिले।"
एक नई क्रांति
अंत में, ओडिशा में उगाया दुर्लभ मियाजाकी आम साबित करता है कि सही अवसर मिलने पर किसान किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। देबा पाढ़ियामी का प्रयास न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के कृषि प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा है। यदि सरकार समय रहते उन्हें सहायता प्रदान करती है, तो यह मियाजाकी आम की खेती आने वाले समय में मलकानगिरी के लिए एक नई पहचान और समृद्धि का द्वार खोलेगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह समाचार रिपोर्ट किसान देबा पाढ़ियामी द्वारा मियाजाकी आम की खेती के दावों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। मियाजाकी आम की गुणवत्ता, बाजार मूल्य और खेती से जुड़े तकनीकी तथ्यों का अंतिम निर्धारण कृषि विशेषज्ञों और आधिकारिक सरकारी मानकों के अधीन है। इस समाचार के माध्यम से दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या अन्य निर्णयों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
VIDEO | Deba Padhiami in Odisha's Malkangiri has been sleepless over a mango.
— Press Trust of India (@PTI_News) May 20, 2026
It's not just another mango, but the Japanese-origin Miyazaki variety, reportedly one of the most expensive globally. And, Deba, has grown that Miyazaki in Malkangiri, four years after receiving a… pic.twitter.com/F60dvElm51