भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी
भारतीय शेयर बाजार में मध्य पूर्व संकट के चलते भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी के प्रमुख सेक्टर्स लाल निशान में बंद हुए।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक संकट और कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक भारी उछाल के कारण घरेलू वित्तीय बाजार में सोमवार को ब्लैक मंडे जैसा नजारा देखने को मिला है। भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबारी सत्र से ही चौतरफा बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिससे प्रमुख सूचकांक धड़ाम हो गए। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में एक प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए विनाशकारी ड्रोन हमले के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, जिसका सीधा नकारात्मक असर घरेलू परिसंपत्तियों पर पड़ा।
सूचकांकों में बड़ी गिरावट
सोमवार सुबह करीब 10:05 बजे भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 करीब 1.26 प्रतिशत यानी 298 अंक टूटकर 23,347.2 के स्तर पर आ गया।
ठीक इसी समय बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भी 1.20 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 74,335.62 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी कि "समय तेजी से बीत रहा है" ने निवेशकों के सेंटिमेंट को वैश्विक स्तर पर पूरी तरह से मंदी की तरफ धकेल दिया है।
चौतरफा बिकवाली का दबाव
बाजार की इस भारी गिरावट में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि व्यापक बाजार सूचकांकों में भी निवेशकों ने अपने शेयर बेचने में जल्दबाजी दिखाई।
सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान बाजार के कुल 16 प्रमुख सेक्टर्स में से 15 सेक्टर्स पूरी तरह लाल निशान में डूबे रहे। इस दौरान छोटे और मझोले शेयरों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रॉडर स्मॉल-कैप सूचकांक में 2.1 प्रतिशत और मिड-कैप सूचकांक में 1.6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे रिटेल निवेशकों को भारी वित्तीय चपत लगी है।
कच्चे तेल में भारी उबाल
अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में इस युद्ध के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
घरेलू बाजार के इस संकट पर अपनी विशेषज्ञ राय देते हुए इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और अनुसंधान प्रमुख जी. चोकालिंगम ने कहा कि, “मध्य पूर्व में ड्रोन हमलों ने तेल की कीमतों में उछाल को तेज कर दिया है, जिससे निकट भविष्य में शेयर बाजार लगातार गहरे दबाव में बने रह सकते हैं।” उनके अनुसार इस वैश्विक अनिश्चितता के कारण अन्य एशियाई बाजारों में भी औसतन 0.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
विदेशी पूंजी की रिकॉर्ड निकासी
जी. चोकालिंगम ने आगे वित्तीय विश्लेषण करते हुए बताया कि कच्चे तेल की उच्च कीमतें भारत के व्यापार घाटे को खतरनाक स्तर तक बढ़ा रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “बढ़ता व्यापार घाटा रुपये को ऐतिहासिक रूप से कमजोर कर रहा है, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा लगातार बाहर निकाल रहे हैं।” आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने इस साल अब तक 23.52 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं, जो कि वर्ष 2025 के कुल वार्षिक आउटफ्लो के रिकॉर्ड को भी पार कर गया है।
हैवीवेट शेयर्स धराशायी
भारतीय शेयर बाजार को संभालने वाले दिग्गज शेयरों में शुमार एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 1.4 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अतिरिक्त, दिग्गज धातु कंपनी टाटा स्टील का चौथी तिमाही का शुद्ध लाभ अनुमान से कम रहने के कारण उसके शेयर 5 प्रतिशत तक टूट गए। वहीं पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन के चौथी तिमाही के मुनाफे में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद उसके शेयर 4.1 प्रतिशत गिर गए। मोतीलाल ओसवाल के अनुसार पावर ग्रिड का यह मुनाफा केवल टैक्स एसेट समायोजन के कारण बढ़ा है, जबकि इसका मुख्य राजस्व अनुमान से कम रहा।
ग्लैंड फार्मा में तेजी
इस चौतरफा मंदी और बिकवाली के दौर में भी फार्मा सेक्टर की कंपनी ग्लैंड फार्मा ने बाजार के विपरीत जाकर शानदार प्रदर्शन किया।
ग्लैंड फार्मा का मार्च तिमाही का शुद्ध लाभ 97 प्रतिशत बढ़ने की रिपोर्ट के बाद उसके शेयरों में 13.4 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया। हालांकि, यह बढ़त बाजार को संभालने के लिए नाकाफी साबित हुई। डॉलर के मुकाबले रुपये के सर्वकालिक रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच जाने से निवेशकों में हाहाकार मचा हुआ है, जिसके चलते आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।[1]
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह समाचार रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या परिसंपत्ति में पूंजी लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से विधिक परामर्श अवश्य लें। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी व्यापारिक निर्णय, वित्तीय लाभ या नुकसान के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।