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राष्ट्रीय

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा बैंक लोन धोखाधड़ी और निवेश घोटाले के सिलसिले में आप नेता दीपक सिंगला और बाबा जी फाइनेंस ग्रुप पर छापेमारी की गई।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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देश की राजधानी दिल्ली और तटीय राज्य गोवा में सोमवार तड़के केंद्रीय जांच एजेंसियों की भारी हलचल से राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। यहाँ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक लोन धोखाधड़ी के एक कथित गंभीर मामले के सिलसिले में आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता दीपक सिंगला तथा उनके अन्य करीबियों के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई को विधिक रूप से अंजाम दिया गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी को शक है कि बैंक ऋण से प्राप्त करोड़ों रुपये की धनराशि को अवैध रूप से दूसरी जगहों पर डायवर्ट किया गया है।

आप नेता निशाने पर

जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, दीपक सिंगला आम आदमी पार्टी के एक बेहद प्रमुख और बड़े चेहरे माने जाते हैं।

वे पूर्व में दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के टिकट पर विश्वास नगर विधानसभा क्षेत्र से आधिकारिक उम्मीदवार भी रह चुके हैं। सोमवार सुबह केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के साथ ईडी की विशेष टीमों ने सिंगला के दिल्ली और गोवा स्थित निजी आवासों तथा व्यावसायिक परिसरों में एक साथ प्रवेश किया और मुख्य गेटों को पूरी तरह से बंद कर दिया।

दस्तावेजों की सघन जांच

सर्च ऑपरेशन के दौरान जांच अधिकारियों द्वारा वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के विवरण और विभिन्न चल-अचल संपत्तियों में किए गए निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण विधिक दस्तावेजों की गहनता से संवीक्षा की जा रही है।

यह बात भी सामने आई है कि दीपक सिंगला पहले भी एक अन्य वित्तीय जांच के सिलसिले में वर्ष 2024 के दौरान जांच एजेंसी के रडार पर आ चुके हैं। वर्तमान छापेमारी की इस बड़ी कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता सिंगला ने फिलहाल मीडिया के समक्ष अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान जारी नहीं किया है।

वित्तीय अनियमितता

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इस मामले में बैंक से लिए गए ऋणों में हुई कथित गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से जांच की जा रही है।

एजेंसी मुख्य रूप से इस बात के प्रामाणिक साक्ष्य जुटा रही है कि क्या लोन के रूप में मिली भारी धनराशि का उपयोग उसी काम के लिए किया गया जिसके लिए वह स्वीकृत हुई थी, या फिर उसे शेल कंपनियों के जरिए कहीं और खपाया गया। इस मामले में कई चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और वित्तीय सलाहकार भी केंद्रीय जांच एजेंसी की पैनी नजरों के दायरे में आ चुके हैं।

सुभाष नगर में छापा

इसी अभियान के समानांतर, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दिल्ली के ही एक अन्य बड़े और सनसनीखेज निवेश घोटाले (इन्वेस्टमेंट फ्रॉड) के मामले में भी अपनी दंडात्मक कार्रवाई को काफी तेज कर दिया गया है।

ईडी की एक अन्य विशेष टीम ने दिल्ली के सुभाष नगर इलाके में स्थित 'बाबा जी फाइनेंस ग्रुप' से जुड़े मुख्य संचालक राम सिंह के ठिकानों पर कड़ा छापा मारा। इस ग्रुप पर आम जनता को निवेश के नाम पर भारी रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये हड़पने का बेहद गंभीर आपराधिक आरोप है।

बड़ा निवेश घोटाला

प्रवर्तन निदेशालय के आला अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे वित्तीय रैकेट के जरिए आम और सीधे-साधे लोगों से निवेश की आड़ में बहुत बड़ी रकम अवैध रूप से वसूली गई थी।

शुरुआती जांच के अनुसार, “बाबा जी फाइनेंस ग्रुप के संचालक राम सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा लगभग 180 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है।” इस मामले में पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ही केंद्रीय एजेंसी ने अपनी इस वित्तीय जांच का विधिक दायरा बढ़ाया है।

बढ़ेगा जांच का दायरा

फिलहाल दोनों ही बड़े वित्तीय मामलों में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त किए गए गुप्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, डिजिटल रिकॉर्ड्स और संदिग्ध बैंकिंग ट्रांजैक्शन की बारीकी से फोरेंसिक जांच की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े कई अन्य रसूखदार लोगों को पूछताछ के लिए समन जारी कर सीधे मुख्यालय बुलाया जा सकता है, जिससे जांच का दायरा और अधिक विस्तृत होने की पूरी संभावना है। दोनों ही जगहों पर देर शाम तक केंद्रीय टीमों की यह छापेमारी लगातार जारी रही।[1]

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज प्राथमिकियों, आधिकारिक छापों और प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के इन मामलों में शामिल व्यक्तियों की विधिक संलिप्तता और दोषसिद्धि पूरी तरह से सक्षम न्यायालय के अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी विधिक संदर्भ या परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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