गेहूं के एमएसपी भुगतान का संकट, नकद राशि न मिलने से किसान परेशान
दमोह में गेहूं के एमएसपी भुगतान का संकट गहराने से किसान परेशान हैं। बैंकों में नकद राशि की कमी के चलते भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे किसान संकट में हैं।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा प्रबंधक भारती तिवारी
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में रबी फसल की कटाई के बाद किसानों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। अपनी उपज मंडियों में बेचने के बाद भी उन्हें भुगतान के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जिसके चलते दमोह में गेहूं के एमएसपी भुगतान का संकट गहरा गया है। किसान अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए सुबह से ही बैंक और गल्ला मंडी की शाखाओं के बाहर लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं।
गल्ला मंडी शाखा की स्थिति
दमोह गल्ला मंडी स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा प्रबंधक भारती तिवारी ने इस समस्या की गंभीरता को साझा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी बैंक के पास किसानों को देने के लिए फंड की कमी हो रही है। इस गेहूं के एमएसपी भुगतान का संकट पर उन्होंने कहा कि "हमारा पैसा बैंकों में जमा है, लेकिन आरबीआई से फंड रिलीज न होने के कारण हमें समय पर नकद राशि नहीं मिल पा रही है।"[1]
बैंकों के बीच धन का सामंजस्य
प्रबंधक भारती तिवारी के अनुसार, जिला सहकारी बैंक का पैसा पीएनबी, एसबीआई और आईडीबीआई जैसी प्रमुख बैंकों में जमा है। हालांकि, ये बैंक उन्हें रोजाना मांग के अनुसार नकद राशि उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं। शाखा को हर दिन किसानों के भुगतान के लिए कम से कम 50 लाख रुपये की आवश्यकता होती है, लेकिन उन्हें मात्र 10 से 30 लाख रुपये ही मिल रहे हैं। इसके चलते वे हर किसान को बहुत छोटी राशि देने पर मजबूर हैं।
किसानों को छोटी किश्तें
सीमित नकदी के कारण बैंक किसानों को एक बार में पूरा भुगतान करने के बजाय 10,000, 20,000 या अधिकतम 50,000 रुपये की नकद राशि ही दे पा रहे हैं। इस गेहूं के एमएसपी भुगतान का संकट के कारण किसानों को बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के नाते दमोह में मंडियों के माध्यम से होने वाला यह भुगतान किसानों के आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अब ठप पड़ा है।
कृषि अर्थव्यवस्था पर असर
दमोह में चल रहा यह गेहूं के एमएसपी भुगतान का संकट न केवल किसानों की दैनिक जरूरतों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि स्थानीय बाजार की अर्थव्यवस्था को भी धीमा कर रहा है। खाद, बीज और कृषि यंत्रों की खरीद के लिए किसान इसी भुगतान पर निर्भर रहते हैं। यदि समय रहते आरबीआई और जिला प्रशासन ने इस कैश क्रंच की समस्या का समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले समय में बुवाई के कार्यों पर विपरीत असर पड़ सकता है।
प्रशासनिक सतर्कता जरूरी
वर्तमान में किसान आर्थिक दबाव में हैं और बैंकों के पास नकद राशि की उपलब्धता न होना एक प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी उपज बेच दी है और अब वे बैंक का अधिकारिक पैसा पाने के हकदार हैं। इस गेहूं के एमएसपी भुगतान का संकट को सुलझाने के लिए बैंक अधिकारियों को अब वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाना होगा ताकि किसानों को उनके हक का पूरा पैसा बिना किसी देरी के मिल सके।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह रिपोर्ट विभिन्न समाचार एजेंसियों से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी परिस्थिति में संबंधित विभागों अथवा एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट को ही मान्य समझा जाएगा। रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए जाने वाले किसी भी निर्णय अथवा होने वाले परिणाम के लिए लेखक और प्रकाशक/संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।
VIDEO | Damoh: Farmers face cash crunch over wheat MSP payments. Bharti Tiwari, Branch Manager, Damoh Galla Mandi Branch, District Cooperative Central Bank, said,
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
"Our money is deposited in the banks, and we are here to withdraw those funds. However, the RBI is not releasing… pic.twitter.com/3my8hm5x57