अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और नए प्रतिबंधों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत तेजी से तीन फीसदी से अधिक बढ़ी।
एशियाई बाजारों में मजबूती के बीच भारतीय रुपये में शुरुआती सुधार की संभावना लेकिन आयातकों की डॉलर मांग से घरेलू मुद्रा पर दबाव कायम।
घरेलू संस्थागत लिवाली और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में लगातार 5वें दिन तेजी दर्ज की गई जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा।
वैश्विक बाजारों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के ब्यौरे से पहले सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है जिससे निवेशक अब सतर्क रुख अपना रहे हैं।
खाड़ी देशों के शेयर बाजार में सोमवार को बढ़त देखी गई है। निवेशक इस समय कॉर्पोरेट नतीजों और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही भू-राजनीतिक हलचलों पर नजर बनाए हुए हैं।
डॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम में गिरावट के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बदलाव देखा जा रहा है।
कतर वार्ता के सकारात्मक संकेतों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें औंधे मुंह गिरीं जिसमें पिछले चार महीनों का सबसे निचला स्तर देखा गया।
भारतीय रुपये का मूल्य बुधवार को एशियाई बाजारों में अन्य मुद्राओं की कमजोरी के बावजूद रिजर्व बैंक की संभावित डॉलर बिकवाली के चलते पूरी तरह स्थिर बना रहा।
सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी के दबाव और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते बुधवार को एक प्रतिशत तक टूट गईं।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट से निवेशक चिंतित हैं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के प्रभावित आवागमन के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से मजबूत हुई
सोने के व्यापार में मंदी के कारण गहनों की मांग में भारी गिरावट आई है। कारीगरों और व्यापारियों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह बहाल होने के संकेतों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और संकट का दौर शुरू हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग से हर तरफ भारी तनाव देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक बदलावों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए आर्थिक नीतिगत फैसलों के कारण डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।