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स्वास्थ्य

रात में बंद मिला अस्पताल का गेट: पार्किंग में हुई महिला की डिलीवरी

फरीदाबाद के सेक्टर तीन स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की पार्किंग में एक गर्भवती महिला द्वारा शिशु को जन्म देने से हड़कंप मच गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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औद्योगिक शहर फरीदाबाद के एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में देर रात आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की कथित कमी का एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। सेक्टर तीन में स्थित प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य केंद्र (एफआरयू-दो) के परिसर में देर रात एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के कारण समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने का आरोप लगा है।

इस कथित प्रशासनिक शिथिलता के कारण पीड़ित महिला को चिकित्सालय की खुली पार्किंग में ही शिशु को जन्म देना पड़ा। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार के सदस्यों ने अस्पताल प्रशासन और रात के समय ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग कर्मचारियों के खिलाफ कथित लापरवाही और असंवेदनशील व्यवहार के गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में भारी विरोध प्रदर्शन किया।

यह घटना स्थानीय स्तर पर रात के समय मिलने वाली आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की मुस्तैदी और उनकी वास्तविक उपलब्धता पर कई बड़े सवालिया निशान खड़े करती है।

प्रसव पीड़ा से तड़पती रही महिला और बंद मिला मुख्य प्रवेश द्वार

घटनाक्रम की विधिक पृष्ठभूमि साझा करते हुए पीड़ित महिला के परिजनों ने बताया कि वे देर रात गंभीर स्थिति में प्रसव पीड़ा से तड़प रहे मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। पीड़ित महिला बलेश को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद उनके रिश्तेदार चमन चंडीला उन्हें तुरंत इस स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे।

परिजनों का स्पष्ट रूप से दावा है कि, “जब हम मरीज को लेकर अस्पताल के मुख्य द्वार पर पहुंचे, तो वहां का मुख्य गेट पूरी तरह से बंद था और आपातकालीन कक्ष के भीतर तत्काल सहायता के लिए कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी या सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था।”

चूंकि पीड़ित महिला अत्यधिक शारीरिक पीड़ा के कारण चलने में पूरी तरह असमर्थ थी, इसलिए उनके साथ आए परिजनों ने स्वयं ही अस्पताल परिसर में रखी एक व्हीलचेयर की व्यवस्था की। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को तलाशने का काफी प्रयास किया, लेकिन काफी समय तक उन्हें कोई चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी।

लाचारी में बुजुर्ग महिलाओं ने पार्किंग में ही कराई आपातकालीन डिलीवरी

अस्पताल परिसर में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के बीच गर्भवती महिला की शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। जब प्रसव का दर्द असहनीय सीमा से बाहर हो गया और जच्चा-बच्चा दोनों की जान पर भारी संकट मंडराने लगा, तो परिवार की बुजुर्ग महिलाओं ने तत्परता दिखाते हुए लाचारी में अस्पताल की खुली पार्किंग में ही सुरक्षित प्रसव की विधिक प्रक्रिया को अंजाम दिया।

महिला के पति देवेंद्र चंडीला ने अस्पताल के प्रशासनिक रवैये पर भारी रोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “यह पूरी घटना चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही का जीवंत प्रमाण है; प्रसव संपन्न हो जाने के बाद जब अस्पताल का स्टाफ बाहर आया और हमने उनसे अपनी परेशानी साझा की, तो उन्होंने हमारे साथ बेहद अभद्र और रूखा व्यवहार किया।”

उन्होंने इस पूरे मामले की विधिक जांच कराने और दोषी नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष और जांच समिति का विधिक गठन

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन ने अपना अलग विधिक पक्ष प्रस्तुत किया है। स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी सिविल सर्जन डॉक्टर रचना ने मामले की विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए अपने आधिकारिक बयान में कहा कि, “यह मामला पूरी तरह से हमारे संज्ञान में आ चुका है; महिला अत्यंत गंभीर और अंतिम क्षणों की स्थिति में अस्पताल लाई गई थी, जिसके बाद उनके परिजन स्टाफ नर्स को बुलाने के लिए ऊपरी मंजिल पर गए थे।”

डॉक्टर रचना के अनुसार, नर्स को प्रसव के लिए आवश्यक सुरक्षा ग्लव्स और जरूरी चिकित्सा उपकरण जुटाने में महज पांच से सात मिनट का समय लगा, लेकिन इसी संक्षिप्त अवधि के भीतर पार्किंग में प्रसव की प्रक्रिया स्वतः संपन्न हो गई।

उन्होंने आगे बताया कि, “घटना के तुरंत बाद हमारी स्टाफ नर्स ने मौके पर पहुंचकर सभी आवश्यक विधिक व चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी कीं और जच्चा-बच्चा दोनों को सुरक्षित वार्ड में दाखिल कराया; वर्तमान में दोनों की स्थिति पूरी तरह से स्थिर है।” सिविल सर्जन ने मामले की निष्पक्षता के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।[1]

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समसामयिक समाचार रिपोर्ट आधिकारिक विधिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित समाचार सोर्सेज द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। इस विषय से जुड़े किसी भी प्रकार के वैधानिक संदर्भ, तकनीकी आंकड़ों या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी मूल विधिक रिपोर्ट को ही अंतिम और प्रामाणिक माना जाना चाहिए। इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल जनहित में निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, सामाजिक या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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