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विक्रमशिला पुल पर गर्डर लॉन्चिंग शुरू: युद्ध स्तर पर चल रहा है काम

भागलपुर के क्षतिग्रस्त विक्रमशिला सेतु पर रक्षा मंत्रालय के अधीन बीआरओ ने हल्के वाहनों के आवागमन हेतु बेली ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg बेली ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू

बेली ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू

बिहार के भागलपुर जिले को उत्तर बिहार और सीमांचल के अनेक महत्वपूर्ण जिलों से जोड़ने वाले जीवनदायिनी विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा हाल ही में अचानक ढह गया था। पुल के मुख्य पाया के समीप आरसीसी स्लैब का एक बड़ा हिस्सा गंगा नदी में समा जाने के कारण इस व्यस्ततम जलमार्ग और सड़क मार्ग पर पूरी तरह से आवागमन ठप हो गया था। इस अभूतपूर्व संकट को देखते हुए बिहार सरकार की विशेष सिफारिश पर केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप किया है। भारतीय थल सेना की विंग बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की कुशल तकनीकी टीम ने स्थानीय पुल निर्माण निगम के साथ मिलकर इस टूटे हुए पुल के ऊपर ही एक अस्थाई बेली ब्रिज बनाने का मोर्चा संभाल लिया है।

अनूठा प्रोजेक्ट

यह परियोजना भारतीय इंजीनियरिंग और रक्षा मंत्रालय के इतिहास में एक बेहद अनूठी और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि यहां बहती गंगा नदी के ऊपर बने एक पहले से ही ऊंचे और आंशिक रूप से जर्जर हो चुके कंक्रीट के ढांचे के ऊपर एक नया स्थिर स्टील आधारित बेली ब्रिज लॉन्च किया जा रहा है। बीआरओ के अधीक्षण अभियंता के कुशल नेतृत्व में देश के सर्वश्रेष्ठ तकनीशियन बाहरी क्षेत्रों से मंगाए गए अत्याधुनिक भारी-भरकम उपकरणों और स्टील गर्डर्स की लॉन्चिंग का कार्य रात-दिन एक करके युद्ध स्तर पर संपन्न कर रहे हैं। इस बेली ब्रिज के निर्माण के लिए प्रमुख तकनीकी और मुंबई की विशेषज्ञ स्ट्रक्चरल एजेंसियों की भी तकनीकी मदद ली जा रही है ताकि मूल सेतु की लोड क्षमता का सही आकलन किया जा सके।

तात्कालिक अनिवार्यता

इस व्यस्ततम सेतु के अचानक क्षतिग्रस्त होने से प्रतिदिन यात्रा करने वाले अनेक आम यात्रियों, बीमार मरीजों, दैनिक व्यापारियों और स्कूली बच्चों को अत्यंत कष्टकारी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था। वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न घाटों के बीच वैकल्पिक नाव और कार्गो सेवाओं का संचालन किया जा रहा है, लेकिन वह इस भारी जन-दबाव को संभालने में पूरी तरह से सक्षम नहीं है।

इसी आवश्यकता और जनहित को ध्यान में रखते हुए पथ निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस अस्थायी पुल को पहली प्राथमिकता दी है। इस संबंध में विभाग के वरिष्ठ सचिव ने समीक्षा बैठक में निर्देश देते हुए कहा कि, “इस क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर हल्के वाहनों का परिचालन जल्द से जल्द बहाल करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इस कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

बड़े लाभ

तकनीकी ब्लूप्रिंट के अनुसार, मुख्य क्षतिग्रस्त हिस्से पर लंबा स्टील बेली ब्रिज बनाने के साथ-साथ उसके आगे और पीछे के अन्य कमजोर स्लैबों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पूरक बेली ब्रिज भी साथ में ही निर्मित किए जा रहे हैं। बीआरओ की टीम प्रत्येक लेन की चौड़ाई मानक के अनुसार रख रही है ताकि हल्के मोटर वाहन और पैदल यात्री बिना किसी बाधा के पूरी सुरक्षा के साथ नदी पार कर सकें।

अस्पताल और प्रशासन के सूत्रों ने इस कार्ययोजना की सराहना करते हुए कहा कि, “इस बेली ब्रिज के सफलतापूर्वक स्थापित हो जाने के बाद क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पुनः सुचारू हो जाएगी।” इस ब्रिज के पूरा होने के तुरंत बाद समानांतर रूप से एक ट्रस ब्रिज का निर्माण भी अगले कुछ समय के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ताकि पूर्ण मरम्मत होने तक यातायात सुदृढ़ बना रहे।[1]

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित सोर्सेज से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। किसी भी वैधानिक संदर्भ या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग की मूल रिपोर्ट को ही प्रामाणिक माना जाना चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief