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भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.2275 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण घरेलू मुद्रा बाजार में सोमवार को भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। वैश्विक मंदी के गहराते बादलों के बीच सोमवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में जारी ईरान युद्ध की वजह से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक देश भारत के सामने बड़ी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। डॉलर की मजबूत मांग और घरेलू शेयर बाजार से विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी से मुद्रा बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बिगड़ गया है।

पांचवें सत्र में गिरावट

सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 0.3 प्रतिशत टूटकर 96.2275 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गई।

इस गिरावट के साथ ही इसने अपने पिछले सर्वकालिक निचले स्तर 96.1350 के रिकॉर्ड को भी पूरी तरह पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2026 में पूरे एशिया महाद्वीप में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन चुका भारतीय रुपया आज लगातार पांचवें सत्र में रिकॉर्ड गिरावट के साथ बंद हुआ है, जिससे आयातकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप

मुंबई के वरिष्ठ मुद्रा डीलरों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि केंद्रीय बैंक समय पर कदम नहीं उठाता तो यह गिरावट और भी ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकती थी।

विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि, “यदि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सरकारी बैंकों के माध्यम से डॉलर बेचने का संभावित हस्तक्षेप नहीं किया गया होता, तो भारतीय रुपया आज के कारोबारी सत्र में और भी अधिक गहराई तक गोता लगा सकता था।” आरबीआई लगातार विदेशी मुद्रा भंडार से बाजार को तरलता प्रदान कर रहा है।

आयात पर सख्त प्रतिबंध

मुद्रा बाजार में डॉलर की कमी को दूर करने और रुपये को विधिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए भारत सरकार के नीति निर्माताओं ने कई कड़े कदम उठाए हैं।

बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के अलावा, सरकार ने हाल ही में चांदी के आयात पर कई तरह के कड़े विनियामक प्रतिबंध लगा दिए हैं ताकि चालू खाता घाटे (सीएडी) को नियंत्रित किया जा सके। आंकड़ों के मुताबिक, जब से मध्य पूर्व में ईरान युद्ध की शुरुआत हुई है, तब से लेकर अब तक भारतीय मुद्रा मूल्य में लगभग 5.5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

भविष्य का नया अनुमान

वैश्विक वित्तीय ब्रोकरेज फर्मों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल के इस नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए अपने आगामी अनुमानों में बड़ा संशोधन किया है।

बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) ग्लोबल रिसर्च के विश्लेषकों ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चिंता जताते हुए कहा है कि, “कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहने की आशंका के कारण, हम वर्ष 2026 के मध्य तक रुपये के कमजोर होकर 96 प्रति डॉलर और साल के अंत तक 98 प्रति डॉलर तक गिरने का अनुमान लगा रहे हैं।”

विदेशी पूंजी की निकासी

ग्लोबल रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते राजकोषीय घाटे और उच्च हेजिंग लागत के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर कम हुआ है।

मार्च महीने से लेकर अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने स्थानीय शेयर और बांड बाजारों से कुल 23.5 अरब डॉलर से अधिक की शुद्ध बिकवाली की है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए हालिया ड्रोन हमले के बाद ईरान युद्ध को रोकने के वैश्विक राजनयिक प्रयास पूरी तरह से पटरी से उतरते हुए नजर आ रहे हैं।

घरेलू परिसंपत्तियों पर दबाव

इस वैश्विक अनिश्चितता का सीधा और गहरा असर भारत के घरेलू वित्तीय बाजारों और प्रमुख सूचकांकों पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

सोमवार को भारत का 10 वर्षीय बेंचमार्क बांड यील्ड 6 आधार अंक बढ़कर 7.12 प्रतिशत पर पहुंच गया। इसके साथ ही प्रमुख घरेलू शेयर सूचकांक निफ्टी 50 में भी 1 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंततः भारतीय रुपया इस वैश्विक मुद्रा युद्ध और महंगाई के दबाव में लगातार संघर्ष कर रहा है, जिससे आगामी दिनों में आयात महंगा होने के आसार हैं।[1]

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक बयानों, प्रशासनिक आदेशों और प्रमाणित सोर्सेज से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। किसी भी वैधानिक संदर्भ या अंतिम नियमों के लिए संबंधित सरकारी विभाग की मूल रिपोर्ट को ही प्रामाणिक माना जाना चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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