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इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़, करोड़ों की ठगी

गुजरात में इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़ होने से मचे हड़कंप के बीच नौ शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

By अजय त्यागी
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इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़

इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़

इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने एक बेहद चौंकाने वाले काले नेटवर्क को नेस्तनाबूद कर दिया है। गांधीनगर में की गई इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पुलिस ने देश-विदेश में फैले इस गिरोह के नौ मुख्य गुर्गों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पकड़े गए शातिर अपराधी 'डर्टी क्रिप्टो' को टेदर (यूएसडीटी) में बदलकर डार्क वेब के जरिए बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध लेनदेन को अंजाम दे रहे थे।

डार्क वेब पर सक्रियता

ब्लॉकचेन तकनीक के गहन विश्लेषण से पुलिस को पता चला है कि यह सिंडिकेट डार्क वेब पर संचालित होने वाली एक बेहद गोपनीय वेबसाइट 'आर्टेमिसलैब.सीसी' का इस्तेमाल कर रहा था।

इस अवैध वेबसाइट के माध्यम से दुनिया भर में नशीले पदार्थों की बिक्री से होने वाली काली कमाई को क्रिप्टो वॉलेट्स में रूट किया जा रहा था। जांच टीम ने जब मुख्य सरगना मोहसिन सादिक मोलानी के डिजिटल वॉलेट्स को खंगाला, तो उसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर के अन्य बड़े अपराधियों से सीधे जुड़े हुए पाए गए।

आतंकवादी संगठनों से कनेक्शन

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आधिकारिक बयान देते हुए बताया कि, “इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़ होने से पकड़े गए इस सिंडिकेट के तार बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित वैश्विक आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने के पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं।”

प्रशासनिक जांच में यह बात भी पूरी तरह साफ हुई है कि इस नेटवर्क के कई संदिग्ध क्रिप्टो वॉलेट सीधे तौर पर इजरायल के एनबीसीटीएफ, हमास, यमन के अंसार अल्लाह (हुथी), और ईरान के आईआरजीसी-क्यूएफ जैसे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के खातों से जुड़े हुए थे।

मोनेरो करेंसी का उपयोग

इस खतरनाक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के शातिर अपराधी सुरक्षा और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए एक विशेष रणनीति पर काम कर रहे थे।

वे सामान्य बिटकॉइन के बजाय पूरी तरह से प्राइवेसी और गोपनीयता पर केंद्रित रहने वाली 'मोनेरो' जैसी डिजिटल करेंसी का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए कर रहे थे। मोनेरो ब्लॉकचेन की जटिल कोडिंग के कारण इसके ट्रांजैक्शन सेंडर और रिसीवर का पता लगाना बेहद पेचीदा होता है, जिसका फायदा उठाकर वे अपनी अवैध पहचान छुपा रहे थे।

जेल से चल रहा था नेटवर्क

मुख्य आरोपी मोहसिन मोलानी ने पुलिस रिमांड के दौरान कबूल किया है कि यह सिंडिकेट वर्ष 2023 से यूनाइटेड किंगडम (यूके) में भी ड्रग्स तस्करी का एक बड़ा साम्राज्य चला रहा था।

इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट में मोहम्मद जुबैर पोपेटिया सहित कई अन्य प्रवासी भारतीय भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। गिरोह का एक अन्य मुख्य आरोपी सलमान गुलाम अली अंसारी इस समय ब्रिटेन की एक हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद है, लेकिन वहां से भी वह जेल के भीतर से इस पूरे काले कारोबार को रिमोट कंट्रोल की तरह ऑपरेट कर रहा था।

करोड़ों की काली कमाई

जांच दल के अधिकारियों के अनुसार, सभी नामजद आरोपियों के क्रिप्टो वॉलेट्स से हुए वित्तीय लेन-देन का कुल मूल्य 2.39 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक आंका गया है।

भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 226.54 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े को पार कर जाती है। गांधीनगर में मारे गए इस छापे के दौरान पुलिस ने मौके से 13 अत्याधुनिक मोबाइल फोन, एक हाई-टेक लैपटॉप, एक टैबलेट और एक लाख पच्चीस हजार पांच सौ रुपये की नकदी बरामद की है।[1]

दर्ज हुआ सख्त मुकदमा

अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए सभी अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 111(2)(ब), 153, 61 और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66(सी) व 66(डी) के तहत अत्यंत सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

क्रिप्टोकरेंसी के अवैध उपयोग को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस मामले में अपनी एंट्री कर सकता है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़ होने से इनमें से कई आरोपियों के खिलाफ पूर्व में भी विभिन्न राज्यों में साइबर धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दर्ज हैं।

इंटरनेशनल नेटवर्क पर नजर

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस समय मामले की विस्तृत जांच लगातार जारी है, जिससे आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन उजागर होने की पूरी संभावना है।

भारत सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा विंग भी इस मनी लॉन्ड्रिंग मॉड्यूल पर नजर बनाए हुए है। आखिरकार, देश के भीतर इंटरनेशनल क्रिप्टो करेंसी रैकेट का भंडाफोड़ होने की इस ऐतिहासिक घटना के बाद साइबर सेल ने आम नागरिकों को बिना पहचान वाले डिजिटल एसेट्स में निवेश न करने की कड़ाई से सलाह दी है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़ी समाचार रिपोर्ट गुजरात पुलिस की गांधीनगर साइबर सेल द्वारा जारी आधिकारिक बयानों, ब्लॉकचेन विश्लेषण रिपोर्ट और आरोपियों के कबूलनामे के प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। हवाला कारोबार, ड्रग तस्करी और वैश्विक टेरर फंडिंग के आरोपों की अंतिम सत्यता और आरोपियों की सजा का निर्धारण पूरी तरह से सक्षम अदालतों की न्यायिक प्रक्रिया और तय प्रशासनिक नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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