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अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने सौंपा ज्ञापन

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी।

By अजय त्यागी
1 min read
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अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने सौंपा ज्ञापन

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौर के आह्वान पर आज प्रदेशभर के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की है। भीलवाड़ा जिलाध्यक्ष लक्की ब्यावट के नेतृत्व में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने सरकार के संवेदनहीन रवैये के विरोध में जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। इस प्रदर्शन में राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया है।

लंबित मांगों पर ज्ञापन

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत की लंबित मांगों को लेकर आज कलेक्ट्रेट पर भारी भीड़ जमा हुई। महासंघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमित व्यास ने बताया कि सरकार की निरंतर उपेक्षा से कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो व्यापक कदम उठाए जाएंगे। कर्मचारियों का तर्क है कि वेतन कटौती के बावजूद सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

आरजीएचएस की ठप सेवा

कर्मचारियों की प्रमुख चिंता आरजीएचएस सुविधा का लंबे समय से ठप होना है। पिछले डेढ़ माह से वेतन से कटौती के बाद भी निजी अस्पतालों में यह सुविधा नहीं मिल रही है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। महासंघ ने स्पष्ट कहा कि, "सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति गंभीर होना चाहिए, क्योंकि कर्मचारी अपनी रक्षा के लिए संघर्षरत हैं।"

अन्य प्रमुख लंबित मांगें

वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद भी समर्पित अवकाश का नगद भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा, वोकेशनल प्रशिक्षकों की लंबे समय से लंबित हरियाणा मॉडल लागू करने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। महात्मा गांधी अस्पताल में कार्यरत कंप्यूटर कर्मियों को सीएसआर में शामिल करने और मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ का बकाया वेतन दिलाने की मांग को लेकर भी अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया है।

सरकार को दी चेतावनी

ज्ञापन सौंपते हुए महासंघ ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। अमित व्यास ने स्पष्ट किया कि, "यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो हम प्रतिदिन एक घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे।" इसके बाद भी यदि मांगें अनसुनी रहीं, तो प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन और पूर्ण कार्य बहिष्कार की घोषणा की जाएगी। कर्मचारी अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।

एकजुट हुआ कर्मचारी वर्ग

इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी और विभिन्न संघों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। करण सिंह, ललित जीनगर, दिनेश खटीक, विनोद सोनी, पवन सेन, मुरलीधर शर्मा, आशीष सोनी, धनराज प्रजापत, श्रीराम साहू और गोपाल व्यास सहित अनेक प्रतिनिधियों ने सरकार से अपनी मांगों को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। सभी कर्मचारी अब सरकार के अगले निर्णय पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं और भविष्य की रणनीति तय कर रहे हैं।

सरकार का रुख अनिश्चित

कर्मचारियों का मानना है कि उनकी मांगें पूर्णतः वाजिब हैं और इन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया गया है। सरकार की ओर से लगातार मिल रहे आश्वासनों के बावजूद धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है। प्रशासनिक गलियारों में भी कर्मचारियों के इस असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। उम्मीद है कि अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत की इन मांगों पर सरकार जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय लेकर स्थिति को संभालने का प्रयास करेगी।

डिस्क्लेमर: 

यह रिपोर्ट प्राप्त तथ्यों और कर्मचारी संगठनों द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। प्रकाशक/संपादक का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को प्रशासन के संज्ञान में लाना है। रिपोर्ट में कही गई सभी बातें संबंधित कर्मचारी संगठनों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों और मांगों पर आधारित हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief